📍नई दिल्ली | 30 Aug, 2025, 12:58 PM
Indian Navy NUH RFI: भारत ने अपने हेलिकॉप्टर बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने एक साथ दो बड़े रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी किए हैं, जिनके तहत कुल 276 नए हेलिकॉप्टरों की खरीद की जाएगी। इन हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल सेना, वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड द्वारा किया जाएगा।
पहला रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन इस महीने जारी किया गया है, जिसमें 200 रिकॉनिसेंस एंड सर्विलांस हेलिकॉप्टर (RSH) की तत्काल जरूरत बताई गई है। इनमें से 120 हेलिकॉप्टर भारतीय सेना और 80 हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना को दिए जाएंगे। इन हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल सीमावर्ती इलाकों में निगरानी करने, सैनिकों को तेजी से पहुंचाने और दुर्गम इलाकों में छोटी लेकिन अहम कार्रवाइयों के लिए किया जाएगा।
दूसरा रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन 22 अगस्त को 76 नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (NUH) के लिए जारी की गई। इसमें 51 हेलिकॉप्टर नौसेना और 25 कोस्ट गार्ड को दिए जाएंगे। इन हेलिकॉप्टरों से समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।
दोनों ही खरीद प्रक्रियाओं में कहा गया है कि भारत मेक इन इंडिया पहल को प्राथमिकता देगा। इसका मतलब है कि इन हेलिकॉप्टरों का उत्पादन और तकनीक का बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय ने आदेश जारी कर कहा है कि ऐसे कैडेट्स को ECHS के तहत चिकित्सा सुविधाएं दी जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर सरकार से पूछा था कि इन कैडेट्स के लिए बेहतर देखभाल, मुआवजा और बीमा की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही।https://t.co/zjzJ1xVaYu#SupremeCourt…
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 29, 2025
सरकार इस बार समयसीमा पर खास ध्यान दे रही है। रिकॉनिसेंस और सर्विलांस हेलिकॉप्टरों के लिए कंपनियों को 18 अक्टूबर तक प्रस्ताव भेजने का समय दिया गया है और 2026 की शुरुआत में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया जाएगा। इसके बाद 2027 के मध्य तक कॉन्ट्रैक्ट साइन होने की उम्मीद है और 2028 से हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी शुरू हो जाएगी। नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर कार्यक्रम का शेड्यूल भी इसी तरह रहेगा और 2029-30 तक इनकी सप्लाई होने लगेगी।
भारतीय सेना लंबे समय से पुराने चीता और चेतक हेलिकॉप्टरों को रिप्लेस करने की कोशिश कर रही है। ये हेलिकॉप्टर 1960 के दशक से सेवा में हैं और कई बार तकनीकी खामियों की वजह से हादसे हो चुके हैं। हालांकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL ने सेना के लिए लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर भी बनाया, लेकिन ऑटोपायलट और फ्लाइट कंट्रोल सॉफ्टवेयर में दिक्कतों के चलते यह परियोजना समय पर आगे नहीं बढ़ पाई। यही वजह है कि अब सरकार ने विदेशी कंपनियों को भी इस प्रतिस्पर्धा में शामिल करने का रास्ता खोला है।
इस बड़ी खरीद में कई कंपनियां दिलचस्पी दिखा रही हैं। एयरबस अपने H145M मॉडल को टाटा के साथ साझेदारी के जरिए पेश कर रही है। एमडी हेलिकॉप्टर्स हल्के टेक्टिकल जरूरतों के लिए MD 530F ला रही है। रूस का KA-226T भी इस दौड़ में है, लेकिन कीमत और लोकल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी शर्तों के चलते इस पर अनिश्चय है। इस बीच मुंबई की मैक्स एयरोस्पेस एंड एविएशन भी इस प्रक्रिया में उतरी है। कंपनी Bell 407Xi हेलिकॉप्टर पेश कर रही है, जो ऊंचाई वाले इलाकों और कठिन मौसम में काम करने के लिए बेहतरीन माना जाता है।
मैक्स एयरोस्पेस ने हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के साथ एक बड़ा समझौता किया है। जून में कंपनी ने 960 मिलियन डॉलर का एमओयू साइन किया, जिसके तहत नागपुर एयरपोर्ट के पास एक हेलिकॉप्टर असेंबली और टेस्टिंग प्लांट बनाया जाएगा। नागपुर पहले से ही एयरोस्पेस सेक्टर का मजबूत सेंटर है और 2026 तक यह प्लांट चालू हो जाएगा। इसके बाद अगले आठ साल में यहां बड़े पैमाने पर हेलिकॉप्टर निर्माण शुरू होगा।
नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर कार्यक्रम की चर्चा 2014 से चल रही है, लेकिन इस बार जारी RFI को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नौसेना ने साफ कर दिया है कि नए हेलिकॉप्टरों में ब्लेड फोल्डिंग की सुविधा होनी चाहिए ताकि जहाजों पर इन्हें आसानी से रखा जा सके। साथ ही इनमें पहियों वाला लैंडिंग गियर और पहले से ऑपरेशनल सेवा का अनुभव होना भी अनिवार्य होगा।
बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने इस साल का बजट नौ फीसदी बढ़ाया है और इसे सुधारों का साल बताया है। हेलिकॉप्टरों की खरीद को उसी व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है। मंत्रालय का मकसद अब छोटे अपग्रेड की बजाय बड़े स्तर पर पूरी सिस्टम को आधुनिक बनाना है।