📍नई दिल्ली | 24 Feb, 2026, 2:14 PM
30mm Naval Gun India: भारत अब समुद्र में अपनी ताकत और बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। रक्षा मंत्रालय के तहत भारतीय नौसेना ने देश की कंपनियों से एक खास तरह के वेपन सिस्टम नेवल सरफेस गन (एनएसजी) को बनाने के लिए आगे आने को कहा है। इसके लिए एक आधिकारिक दस्तावेज जारी किया गया है, जिसे “एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट” यानी ईओआई कहा जाता है। भारतीय नौसेना ने पहले भी यह ईओआई जारी कर चुकी है। लेकिन इसे फिर से जारी किया गया है।
सरल भाषा में समझें तो सरकार यह जानना चाहती है कि देश की कौन-कौन सी कंपनियां एक आधुनिक 30 मिमी नेवल सरफेस गन और उसके साथ जुड़ा इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम बना सकती हैं। अगर कंपनियां योग्य पाई जाती हैं, तो उन्हें इस सिस्टम को डेवलप करने का मौका दिया जाएगा।
यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि अब भारत धीरे-धीरे ऐसे हथियार खुद बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो पहले विदेशों से खरीदे जाते थे। (30mm Naval Gun India)
30mm Naval Gun India: क्या 30 मिमी नेवल गन सिस्टम?
यह एक ऐसा हथियार होता है, जिसे समुद्र में चलने वाले युद्धपोत यानी नेवल शिप पर लगाया जाता है। इसका काम बहुत पास से आने वाले खतरे को तुरंत निशाना बनाना होता है। आज के समय में खतरे सिर्फ बड़े युद्धपोत या मिसाइल नहीं हैं। अब छोटे ड्रोन, तेज स्पीड वाली नावें, और पानी के नीचे छिपकर हमला करने वाले लोग भी बड़ा खतरा बन चुके हैं। ऐसे में इस तरह की गन बहुत काम आती है।
इस गन के साथ एक खास सिस्टम जोड़ा जाएगा, जिसे इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम (EOFCS) कहा जाता है। यह सिस्टम कैमरा, सेंसर और कंप्यूटर की मदद से टारगेट को पहचानता है और सटीक निशाना लगाने में मदद करता है। यानी यह सिर्फ एक बंदूक नहीं होगी, बल्कि एक पूरा स्मार्ट सिस्टम होगा जो खुद टारगेट को पहचानकर उस पर हमला कर सकेगा। (30mm Naval Gun India)
यह 30 एमएम गन जहाजों की नजदीकी रक्षा यानी क्लोज-इन वेपन सिस्टम का हथियार है। यह ड्रोन, तेज हमलावर नावें (फास्ट अटैक क्राफ्ट), स्विमिंग डाइवर्स और असिमेट्रिक खतरों को 3-5 किमी के अंदर मार गिराएगी। नौसेना के छोटे जहाजों (ओपीवी, एफएसी) पर मुख्य हथियार और बड़े जहाजों (डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट) पर बैकअप बनेगी। (30mm Naval Gun India)
यह प्रोजेक्ट क्यों है गेमचेंजर
आज का युद्ध पहले जैसा नहीं रहा। अब दुश्मन बड़े जहाज या मिसाइल ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे ड्रोन और तेज स्पीड वाली नावों (स्विफ्ट क्राफ्ट) से भी हमला करता है। रेड सी जैसे इलाकों में हाल के हमलों ने साफ दिखा दिया है कि पास से आने वाले इन खतरों को रोकने के लिए मजबूत क्लोज-इन डिफेंस सिस्टम कितना जरूरी है।
अब तक भारत जिन 30 मिमी गन का इस्तेमाल करता था, वे या तो बाहर से खरीदी गई थीं या उनकी क्षमता सीमित थी। लेकिन नई स्वदेशी 30 मिमी नेवल सरफेस गन के साथ EOFCS सिस्टम कई मामलों में ज्यादा आधुनिक और असरदार होगी। (30mm Naval Gun India)
यह सिस्टम रडार जामिंग की स्थिति में भी काम कर सकेगा, क्योंकि इसमें कैमरा और सेंसर आधारित टारगेटिंग होगी। इसका मतलब है कि दुश्मन अगर इलेक्ट्रॉनिक जामिंग भी करे, तब भी यह गन अपना काम जारी रखेगी।
यह गन पूरी तरह स्टेबलाइज्ड होगी, यानी समुद्र की तेज लहरों के बीच भी निशाना सटीक रहेगा। साथ ही यह नेटवर्क्ड सिस्टम होगा, जिससे जहाज अकेले नहीं, बल्कि पूरी फ्लीट एक साथ जुड़कर ऑपरेशन कर सकेगी।
यह सिस्टम जहाज के कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) से जुड़ा होगा, जिससे पूरे जहाज के हथियार और सेंसर एक साथ काम करेंगे। गन की फायरिंग स्पीड तेज होगी और इसमें ऐसे गोला-बारूद का इस्तेमाल होगा जो टारगेट के पास जाकर फट सके (प्रॉक्सिमिटी फ्यूज)। इसे पूरी तरह समुद्री माहौल के हिसाब से बनाया जाएगा, यानी नमकीन पानी, झटकों, कंपन और -20°C से +55° से. तक के तापमान में भी यह सही काम करेगा। (30mm Naval Gun India)
साथ ही इसका रखरखाव आसान होना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे मौके पर ही ठीक किया जा सके। इसमें रिमोट कंट्रोल, मैनुअल और ऑटो – तीनों मोड होंगे, यानी जरूरत के हिसाब से इसे अलग-अलग तरीके से चलाया जा सकेगा।
नौसेना को इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 97 सिस्टम मिलने की संभावना है, जिससे दर्जनों युद्धपोतों की ताकत बढ़ेगी। साथ ही एमएसएमई और स्टार्टअप कंपनियों को भी इसमें हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। योजना के अनुसार, सबसे कम कीमत देने वाली कंपनी (L1) को ज्यादा सिस्टम मिलेंगे, जबकि दूसरी कंपनियों (L2/L3) को भी मौका दिया जाएगा अगर वे कीमत मैच करें। सफल कंपनी को आधिकारिक सर्टिफिकेट भी मिलेगा, जो आगे के प्रोजेक्ट्स में काम आएगा। (30mm Naval Gun India)
‘मेक-II’ कैटेगरी के तहत प्रोजेक्ट
इस ईओआई का मुख्य उद्देश्य देश की कंपनियों को मौका देना है। नौसेना यह देखना चाहती है कि कौन-सी भारतीय कंपनी इस प्रोजेक्ट को संभाल सकती है। जो कंपनियां इस ईओआई का जवाब देंगी, उनमें से कुछ को चुना जाएगा और फिर उन्हें इस सिस्टम का प्रोटोटाइप यानी शुरुआती मॉडल बनाने का काम दिया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि अगर सिर्फ एक कंपनी भी सभी शर्तें पूरी करती है, तो भी प्रोजेक्ट आगे बढ़ाया जाएगा। यानी सरकार इस काम में देरी नहीं करना चाहती।
यह प्रोजेक्ट “मेक-II” कैटेगरी के तहत किया जा रहा है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि कंपनियां पहले अपने खर्च पर इस सिस्टम का प्रोटोटाइप बनाएंगी। अगर वह सफल रहता है, तो नौसेना बाद में उसी सिस्टम को खरीद सकती है। यह खरीद “बाय (इंडियन-IDDM)” कैटेगरी के तहत होगी, जिसमें पूरी तरह भारतीय डिजाइन और निर्माण को प्राथमिकता दी जाती है। इससे सरकार का पैसा भी बचता है और कंपनियों को इनोवेशन करने का मौका भी मिलता है। (30mm Naval Gun India)
इस प्रोजेक्ट की सबसे अहम शर्तों में से एक है इंडिजिनस कंटेंट (IC) यानी स्वदेशी हिस्सेदारी। इस गन सिस्टम का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा भारत में बना होना चाहिए। बाद में यह बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक करना होगा। सिर्फ इतना ही नहीं, इस स्वदेशी हिस्से का कम से कम आधा भाग भारत में बने मटेरियल, पार्ट्स या सॉफ्टवेयर से होना चाहिए। वहीं, यह नियम सिर्फ गन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस टूल्स और टेस्टिंग इक्विपमेंट पर भी लागू होगा। सरकार की योजना है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए पूरी सप्लाई चेन को देश के अंदर ही विकसित किया जाए। (30mm Naval Gun India)
विदेशी कंपनियों की क्या होगी भूमिका?
इस प्रोजेक्ट में विदेशी कंपनियां सीधे हिस्सा नहीं ले सकतीं, लेकिन वे भारतीय कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में जुड़ सकती हैं। अगर कोई भारतीय कंपनी किसी विदेशी कंपनी से तकनीक लेती है, तो उसे साफ-साफ बताना होगा कि कौन-सी तकनीक ली जा रही है और उसमें स्वदेशी हिस्सेदारी का योगदान कितना है। साथ ही, बिना भारत सरकार की अनुमति के इस सिस्टम के किसी भी हिस्से की जांच या ऑडिट कोई विदेशी एजेंसी नहीं कर सकती। यह नियम सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रखा गया है। (30mm Naval Gun India)
कैसे होगा कंपनियों का चयन?
जो कंपनियां इस प्रोजेक्ट में हिस्सा लेना चाहती हैं, उन्हें अपने बारे में पूरी जानकारी देनी होगी। इसमें उनकी तकनीकी क्षमता, वित्तीय स्थिति, पहले किए गए प्रोजेक्ट और मैन्युफैक्चरिंग अनुभव शामिल होंगे। नौसेना इन सभी पहलुओं के आधार पर कंपनियों का मूल्यांकन करेगी और फिर कुछ कंपनियों को आगे के चरण के लिए चुनेगी। इसके बाद प्रोटोटाइप बनाया जाएगा, उसका परीक्षण होगा और सफल होने पर बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू किया जाएगा। (30mm Naval Gun India)
भारत फोर्ज बना रही है 30 एमएम और 75 एमएम नेवल गन
भारत फोर्ज भी भारतीय नौसेना के लिए 30 मिमी और 75 मिमी नेवल गन बना रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि ये गन 2026 के अंत तक या 2027 तक टेस्ट होकर तैयार हो जाएं। भारत फोर्ज पुणे में अपने प्लांट में इन गन्स पर काम कर रही है। यह पहली बार होगा जब इस तरह की आधुनिक नेवल गन पूरी तरह भारत में डिजाइन और बनाई जाएगी।
30 मिमी गन छोटी दूरी के खतरों के लिए है। जैसे ड्रोन, तेज नावें या समुद्र में अचानक हमला करने वाले छोटे टारगेट। यह करीब 3 से 5 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन को निशाना बना सकती है।
75/76 मिमी गन इससे बड़ी होती है और जहाजों पर मुख्य हथियार के तौर पर इस्तेमाल होती है। अभी भारत ज्यादातर ऐसी गन बाहर से लेता है, लेकिन यह नई गन उस कमी को पूरा कर सकती है। (30mm Naval Gun India)
इन गन्स को इस तरह बनाया जा रहा है कि ये समुद्र की तेज लहरों में भी सही निशाना लगा सकें। यानी जहाज हिल रहा हो, फिर भी फायरिंग सटीक होगी। इनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम भी जोड़ा जाएगा, जिससे दिन और रात दोनों समय टारगेट को आसानी से देखा और निशाना बनाया जा सकेगा। अगर दुश्मन रडार को जाम कर दे, तब भी यह सिस्टम काम करेगा। इनका फायरिंग स्पीड भी तेज होगा, जिससे कम समय में ज्यादा फायर किया जा सकेगा। साथ ही इसमें अलग-अलग तरह के गोला-बारूद जैसे हाई एक्सप्लोसिव और आर्मर पियर्सिंग इस्तेमाल किए जा सकेंगे। सबसे अहम बात यह है कि इन गन्स में 70% से ज्यादा हिस्सा भारत में ही बनाया जा रहा है। (30mm Naval Gun India)


