📍नई दिल्ली | 2 Dec, 2025, 7:56 PM
India SSBN Aridhaman: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने पुष्टि की है कि भारत की नई न्यूक्लियर बैलिस्टिक सबमरीन आईएनएस अरिधमन बहुत जल्द नौसेना में शामिल की जाएगी। उन्होंने यह एलान भारतीय नौसेना दिवस 2025 से ठीक दो दिन पहले किया।
India SSBN Aridhaman: अरिधमन इस सीरीज की तीसरी पनडुब्बी
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि स्वदेश में बनाई गई यह पनडुब्बी देश की न्यूक्लियर डिटरेंस यानी प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूती देगी। उन्होंने इसे भारत के रणनीतिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इससे पहले 29 अगस्त 2024 में स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड ने दूसरी न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) आईएनएस अरिघात को विशाखापट्टनम में कमीशन किया था। अब अरिधमन इस सीरीज की तीसरी पनडुब्बी होगी।
आईएनएस अरिधमन को भारत की तीसरी एसएसबीएन है, जो आईएनएस अरिहंत और आीएनएस अरिघात की की तुलना में आकार में बड़ी और क्षमता में अधिक ताकतवर है। इसके बड़े आकार की वजह से इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली न्यूक्लियर-टिप्ड मिसाइलें ले जाने की क्षमता और बढ़ जाती है। इससे भारत की समुद्र आधारित न्यूक्लियर स्ट्राइक क्षमता पहले से कहीं अधिक ताकतवर हो जाएगी।
अरिधमन में एडवांस मिसाइलें लगाने की तैयारी
आईएनएस अरिघात में के-4 मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, जिनकी रेंज लगभग 3,000 किलोमीटर है। आईएनएस अरिहंत के पास के-15 मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज 750 किलोमीटर मानी जाती है। अरिधमन में और भी एडवांस मिसाइलें लगाने की तैयारी है, जिससे यह पनडुब्बी गहरे समुद्र से लंबी दूरी तक वार करने में सक्षम होगी। सूत्रों के मुताबिक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के साथ जारी तनाव के बीच अरिधमन भारत के लिए एक भरोसेमंद रणनीतिक प्रतिरोधक भूमिका निभाएगी।
नो फर्स्ट यूज नीति
भारत की एसएसबीएन सीरीज देश की नो फर्स्ट यूज नीति का एक प्रमुख स्तंभ है। एनएफयू का मतलब है कि भारत पहले न्यूक्लियर हमला नहीं करेगा, लेकिन यदि कोई देश भारत पर हमला करता है तो भारत मजबूत सेकंड-स्ट्राइक यानी जवाबी न्यूक्लियर हमला करने में सक्षम रहेगा। ऐसी स्थिति में एसएसबीएन की भूमिका सबसे अहम होती है, क्योंकि ये पनडुब्बियां लंबे समय तक समुद्र में छिपी रह सकती हैं और किसी भी हमले के बाद सुरक्षित रहकर जवाबी स्ट्राइक कर सकती हैं।
यह पनडुब्बियां समुद्र की सतह से सैकड़ों मीटर नीचे, बिना किसी बाहरी संपर्क के, कई दिनों तक छिपी रह सकती हैं। इसी कारण इन्हें किसी देश के न्यूक्लियर ट्रायड (लैंड-एयर-सी क्षमता) का सबसे सुरक्षित हिस्सा माना जाता है। अरिहंत-क्लास की ये एसएसबीएन भारत को यह भरोसा देती हैं कि किसी भी संकट की स्थिति में देश की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर नहीं पड़ेगी।
चीन के पास छह जिन-क्लास एसएसबीएन
भारत की एसएसबीएन क्षमता की तुलना अगर चीन से की जाए तो चीन के पास अभी छह जिन-क्लास एसएसबीएन हैं, जिनमें जेएल-3 मिसाइलें लगाई जाती हैं। इन जेएल-3 मिसाइलों की रेंज करीब 10,000 किलोमीटर मानी जाती है। चीन के पास छह न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (एसएसएन) भी हैं। वहीं अमेरिका के पास 14 ओहियो-क्लास एसएसबीएन और 53 एसएसएन हैं। भारत अभी एसएसबीएन निर्माण के शुरुआती लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण चरण में है।
आईएनएस अरिधमन का निर्माण भारत की स्वदेशी क्षमता का प्रतीक है। यह पनडुब्बी विशाखापट्टनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में तैयार की गई है। इसमें न्यूक्लियर पावर प्लांट, एडवांस्ड सोनार सिस्टम, नेविगेशन टेक्नोलॉजी और स्टील्थ फीचर्स शामिल हैं, जो इसे किसी भी दुश्मन की निगरानी से लगभग अदृश्य बना देती हैं। नौसेना अधिकारियों के अनुसार, इस पनडुब्बी का पूरा फोकस भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करना है।
एसएसबीएन प्रोजेक्ट से मिलीं कई सीखें
भारत के एसएसबीएन प्रोजेक्ट का उद्देश्य समंदर से न्यूक्लियर स्ट्राइक क्षमता को पूर्ण रूप से विकसित करना है। आईएनएस अरिहंत की पहली ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट से लेकर अरिघात तक भारत ने कई तकनीकी सीखें हासिल कीं। अरिधमन में इन सभी अनुभवों को और बेहतर स्तर पर लागू किया गया है। यह एसएसबीएन लंबी दूरी, ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता और हाई लेवल के स्टील्थ के साथ समुद्र में एक मजबूत सैन्य उपस्थिति देगी।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह कदम ईस्ट चाइना सी, साउथ चाइना सी और इंडियन ओशन रीजन में बनने वाले सुरक्षा दबावों के बीच बेहद महत्वपूर्ण है। चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों और उसकी एसएसबीएन क्षमता को देखते हुए भारत का यह कदम रणनीतिक रूप से बहुत मायने रखता है।
आईएनएस वाघशीर सबमरीन इस साल साल हुई शामिल
भारतीय नौसेना चीफ एडमिरल दिनेश ने बताया कि पिछले एक साल में नौसेना ने अपनी ताकत में काफी बढ़ोतरी की है। उन्होंने बताया कि नौसेना ने कई अहम युद्धपोतों को अपने बेड़े में शामिल किया है, जिससे भारत की समुद्री निगरानी, सुरक्षा और स्ट्राइक क्षमता पहले से अधिक मजबूत हुई है। एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार, जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईएनएस वाघशीर को कमीशन किया था। यह पनडुब्बी स्कॉर्पीन क्लास का हिस्सा है और आधुनिक हथियारों तथा एडवांस तकनीक से लैस है।
एक साल में एक पनडुब्बी समेत 13 नए युद्धपोत नौसेना का हिस्सा
इसके साथ ही नौसेना ने आईएनएस उदयगिरी को भी बेड़े में शामिल किया। यह खास जहाज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया 100वां स्वदेशी युद्धपोत है। नौसेना के अनुसार, इस उपलब्धि ने भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता को एक नई पहचान दी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि पिछले एक साल में एक पनडुब्बी समेत कुल 13 नए युद्धपोत नौसेना का हिस्सा बने हैं। इन नए जहाजों के शामिल होने से समुद्र में भारत की मौजूदगी और मॉनिटरिंग क्षमता काफी बढ़ गई है। नौसेना के अधिकारी मानते हैं कि इनसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में लगातार निगरानी रखना आसान होगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
पनडुब्बियों में महिलाओं को जगह
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव का भी जिक्र किया गया। एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि नौसेना अब पनडुब्बियों में महिलाओं को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पहले भारत में महिला अधिकारियों को पनडुब्बियों में जगह नहीं दी जाती थी, लेकिन अब यह नीति बदली जा रही है। नौसेना चीफ ने कहा कि जल्द ही महिलाएं भी पनडुब्बी अधिकारी के रूप में सेवा दे सकेंगी। इसे नौसेना में एक बड़ा सामाजिक और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे युवा महिलाओं के लिए समुद्री रक्षा क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे और नौसेना में विविधता व प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा।
साइबर हमलों, ड्रोन-आधारित खतरों से निपटने की तैयारी
एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना बदलते वैश्विक माहौल में हर चुनौती का सामना करने के लिए खुद को लगातार तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि नौसेना साइबर हमलों, ड्रोन-आधारित खतरों और समुद्री घुसपैठ जैसे नए खतरों से निपटने के लिए अपनी ऑपरेशनल रेडिनेस को और बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, मजबूत प्रशिक्षण और नए प्लेटफॉर्म नौसेना की क्षमता को और ऊंचाई दे रहे हैं।



