📍हैदराबाद | 11 Mar, 2026, 6:10 PM
Heavyweight Torpedo India: जर्मनी की प्रमुख नौसैनिक कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) और हैदराबाद स्थित भारतीय डिफेंस कंपनी वीईएम टेक्नोलॉजीज ने भारत में संयुक्त रूप से हेवीवेट टॉरपीडो बनाने के लिए एक बड़ा समझौता किया है। दोनों कंपनियों के बीच हुआ यह टीमिंग एग्रीमेंट भारत में टॉरपीडो टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर और “मेक-इन-इंडिया” के तहत आधुनिक टॉरपीडो डेवलप करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समझौते के तहत देश में ही भारतीय नौसेना के लिए आधुनिक हेवीवेट टॉरपीडो का निर्माण किया जाएगा।
Heavyweight Torpedo India: भारत में बनेगा आधुनिक हेवीवेट टॉरपीडो
इस समझौते के तहत भारत में एक अत्याधुनिक हेवीवेट टॉरपीडो डेवलप और तैयार किया जाएगा। यह टॉरपीडो भारतीय नौसेना की मौजूदा पनडुब्बियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। टॉरपीडो एक ऐसा अंडरवाटर हथियार होता है जिसे पनडुब्बियों या युद्धपोतों से लॉन्च किया जाता है। इसका इस्तेमाल दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।
हेवीवेट टॉरपीडो आमतौर पर लंबी दूरी तक हमला करने और ज्यादा शक्तिशाली वारहेड ले जाने की क्षमता रखते हैं। इसलिए आधुनिक नौसेनाओं के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण हथियार माना जाता है। नई योजना के तहत इस टॉरपीडो को भारतीय नौसेना की मौजूदा सबमरीन फ्लीट के अनुसार डिजाइन किया जाएगा। (Heavyweight Torpedo India)
हैदराबाद में होगा निर्माण
टीकेएमएस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट माइकल ओजेगोव्स्की ने इस समझौते को दोनों कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता टीकेएमएस और वीईएम के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। उनके अनुसार, इस सहयोग के माध्यम से टॉरपीडो टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर भारत को नौसैनिक रक्षा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना के जरिए वीईएम भारतीय नौसेना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगी और भारत की तकनीकी स्वतंत्रता को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस प्रोजेक्ट में मुख्य उत्पादन जिम्मेदारी वीईएम टेक्नोलॉजीज संभालेगी। कंपनी हैदराबाद में अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में टॉरपीडो के निर्माण की तैयारी करेगी। रॉ मटेरियल की खरीद से लेकर फैब्रिकेशन, मैन्युफैक्चरिंग और फाइनल असेंबली तक का पूरा काम भारत में ही किया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार भविष्य में यहां हर साल लगभग 500 टॉरपीडो तक बनाने की क्षमता विकसित की जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय नौसेना की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भारत को टॉरपीडो उत्पादन के क्षेत्र में भी मजबूत बना सकता है। (Heavyweight Torpedo India)
समझौते में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी होगा
इस सहयोग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर है। टीकेएमएस की सहयोगी कंपनी एटलस इलेक्ट्रोनिक टॉरपीडो से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीक और सॉफ्टवेयर लाइसेंस वीईएम को उपलब्ध कराएगी। इससे भारतीय कंपनी को अत्याधुनिक टॉरपीडो टेक्नोलॉजी तक पहुंच मिलेगी और वह इसे भारत में विकसित और उत्पादन कर सकेगी। जानकारों का मानना है कि इससे भारत की तकनीकी स्वतंत्रता बढ़ेगी और रक्षा उत्पादन में विदेशी निर्भरता कम होगी। (Heavyweight Torpedo India)
सितंबर 2025 में एमओयू हुआ था साइन
टीकेएमएस और वीईएम के बीच सहयोग की शुरुआत पहले ही हो चुकी थी। सितंबर 2025 में दोनों कंपनियों के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) साइन किया गया था। उस समझौते में टॉरपीडो के डेवलपमेंट, इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और मॉडर्नाइजेशन पर काम करने की योजना बनाई गई थी। अब नया टीमिंग एग्रीमेंट उसी सहयोग का अगला चरण माना जा रहा है, जिसमें वास्तविक उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की दिशा में आगे बढ़ा गया है। (Heavyweight Torpedo India)
भविष्य में बन सकता है जॉइंट वेंचर
दोनों कंपनियां इस सहयोग को आगे और भी बढ़ाने की योजना बना रही हैं। मध्यम अवधि में टीकेएमएस और वीईएम मिलकर एक जॉइंट वेंचर भी स्थापित कर सकते हैं। इस जॉइंट वेंचर का उद्देश्य भारतीय बाजार को लंबे समय तक उच्च गुणवत्ता वाले हेवीवेट टॉरपीडो उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ-साथ भविष्य में निर्यात के अवसर भी तलाशे जा सकते हैं। अगर भारत में बने टॉरपीडो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हैं तो उन्हें दूसरे देशों को भी निर्यात किया जा सकता है। (Heavyweight Torpedo India)
भारतीय नौसेना को मिलेगा फायदा
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा भारतीय नौसेना को मिलेगा। फिलहाल कई महत्वपूर्ण हथियार सिस्टम्स के लिए भारत को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर टॉरपीडो का निर्माण भारत में ही शुरू हो जाता है तो नौसेना को समय पर हथियार उपलब्ध कराना आसान होगा। इसके अलावा रखरखाव, अपग्रेड और मरम्मत जैसे काम भी देश के भीतर ही किए जा सकेंगे। इससे ऑपरेशनल रेडीनेस यानी युद्ध के लिए तैयारी की क्षमता भी बढ़ेगी।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती
यह परियोजना भारत की आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया पहल को भी मजबूत करेगी। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने पर सरकार लगातार जोर दे रही है। ऐसे सहयोग से भारत की रक्षा इंडस्ट्री को नई तकनीक, निवेश और रोजगार के अवसर मिलते हैं। इसके साथ ही देश की रणनीतिक स्वतंत्रता भी मजबूत होती है क्योंकि महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम हो जाती है।
टीकेएमएस दुनिया की प्रमुख नेवल डिफेंस कंपनियों में से एक है। कंपनी जर्मनी के कील, विस्मार और ब्राजील के इटाजाई जैसे शहरों में शिपयार्ड संचालित करती है और दुनिया भर में नौसैनिक तकनीक उपलब्ध कराती है। यह कंपनी पनडुब्बियों, युद्धपोतों, समुद्री इलेक्ट्रॉनिक्स और सुरक्षा तकनीकों के क्षेत्र में काम करती है। करीब 185 सालों के अनुभव के साथ टीकेएमएस नेवल डिफेंस टेक्नोलॉजी में अग्रणी कंपनियों में गिनी जाती है। (Heavyweight Torpedo India)

