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हिंद महासागर में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत! जर्मनी और यूरोपीय यूनियन के बाद IFC-IOR में ग्रीस की एंट्री

पिछले एक महीने में ग्रीस तीसरा देश है, जिसने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए IFC-IOR में शामिल होने का ऐलान किया है...

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📍नई दिल्ली | 9 Feb, 2026, 9:57 PM

India-Greece Defence Deal: भारत और ग्रीस के बीच सोमवार को अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ग्रीस के रक्षा मंत्री निकोलास-जॉर्जियोस डेंडियास ने हिस्सा लिया। इस बैठक की अहम बात यह रही कि ग्रीस ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) में एक ग्रीक इंटरनेशनल लायजन ऑफसर तैनात करेगा। पिछले एक महीने में ग्रीस तीसरा देश है, जिसने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए IFC-IOR में शामिल होने का ऐलान किया है। ग्रीस के इस कदम के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री भूमिका काफी अहम हो गई है।

सोमवार को दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ग्रीस के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री निकोलास-जॉर्जियोस डेंडियास के बीच नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। इस दौरान एक जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर भी हुए, जिसका मकसद रक्षा उद्योग में साझेदारी को मजबूत करना है। साथ ही वर्ष 2026 के लिए द्विपक्षीय मिलिट्री कोऑपरेशन प्लान का आदान-प्रदान भी किया गया। (India-Greece Defence Deal)

India-Greece Defence Deal: क्या है आईएफसी-आईओआर?

यह केंद्र भारतीय नौसेना ने साल 2018 में गुरुग्राम स्थापित किया था। इसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, समुद्री गतिविधियों पर नजर रखना और मित्र देशों के साथ रियल-टाइम सूचना साझा करना है। समुद्री डकैती, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध मछली पकड़ना और संदिग्ध जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने में यह केंद्र अहम भूमिका निभाता है।

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जब कोई देश यहां अपना इंटरनेशनल लायजन ऑफिसर भेजता है, तो उसका मतलब होता है कि वह भारत के साथ सीधे तौर पर समुद्री सुरक्षा सहयोग में जुड़ रहा है। लायजन ऑफिसर अपने देश की नौसेना और आईएफसी-आईओआर के बीच सूचना का सेतु बनता है। इससे किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कॉर्डिनेशन संभव होता है।

ग्रीस का यह फैसला इसलिए भी खास है क्योंकि ग्रीस एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र है। भूमध्य सागर में उसकी सक्रिय भूमिका रही है। अब वह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर काम करेगा। यह भारत-ग्रीस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। (India-Greece Defence Deal)

आईएफसी-आईओआर में कितने देश हैं शामिल

आईएफसी-आईओआर में पहले से कई देशों के लायजन ऑफिसर तैनात हैं। सूत्रों के मुताबिक आईएफसी-आईओआर से दुनियाभर की 50 ज्यादा संस्थाएं जुड़ी हैं। जबकि इसमें 28 पर्टनर देश हैं। वहीं इसमें तैनात इंटरनेशनल लायजन अफसरों की संख्या फिलहाल 15 है। सूत्रों ने बताया कि अगले 6 से 12 महीनों में इसमें 5 से 6 सदस्दीय देश और शामिल होने वाले हैं।

पहले से तैनात देशों में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, जापान, म्यामार, इटली, मालदीव, केन्या, मॉरीशस, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, यूनाइटेड किंगडम और यूनाइटेड स्टेट्स जैसे देश शामिल हैं। अब ग्रीस के जुड़ने से यह नेटवर्क और मजबूत होगा। इस साल जर्मनी और यूरोपीय यूनियन ने भी प्रस्ताव दिया है कि वह अपना प्रतिनिधि भेजेगा। वहीं पिछले साल अप्रैल 2025 में इंडोनेशिया ने भी यहां अधिकारी तैनात करने की घोषणा की थी। (India-Greece Defence Deal)

यह भारत के लिए क्यों है अहम कदम?

पहला, इससे भारत की समुद्री सुरक्षा में नेतृत्व की भूमिका मजबूत होती है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ना, तस्करी और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने में यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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दूसरा, यह भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और “सागर” यानी क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास की नीति को मजबूत करता है। क्वाड देशों के अलावा यूरोपीय देशों की भागीदारी से भारत का सहयोग दायरा और व्यापक हुआ है।

तीसरा, समुद्री मार्गों की बेहतर निगरानी से व्यापारिक सुरक्षा बढ़ती है। हिंद महासागर से होकर दुनिया का बड़ा हिस्सा व्यापार गुजरता है, इसलिए सूचना साझाकरण बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

कुल मिलाकर, IFC-IOR में लगातार बढ़ती आईएलओ की तैनाती भारत की समुद्री कूटनीति के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक भरोसेमंद और सक्रिय साझेदार के रूप में स्थापित करती है।

यह सब दर्शाता है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा का केंद्र बनता जा रहा है। दुनिया के कई देश यह मानने लगे हैं कि अगर इस क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षित समुद्री व्यापार सुनिश्चित करना है, तो भारत के साथ सहयोग जरूरी है। वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री क्षेत्र से गुजरता है। ऐसे में सूचना साझा करने का यह सिस्टम बेहद अहम हो जाता है। (India-Greece Defence Deal)

भारत-ग्रीस के बीच स्वदेशी रक्षा उद्योग पर जोर

बैठक के दौरान दोनों देशों ने इस बात पर भी जोर दिया कि वे अपने स्वदेशी रक्षा उद्योग को आगे बढ़ाएंगे। भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल और ग्रीस के एजेंडा 2030 रक्षा सुधार कार्यक्रम को जोड़कर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई। इसका मतलब है कि भविष्य में दोनों देश रक्षा उत्पादन, टेक्नोलॉजी और संयुक्त परियोजनाओं में साथ काम कर सकते हैं।

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इस यात्रा के दौरान ग्रीक रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि भी दी और मानेकशॉ सेंटर में ट्राई-सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। ग्रीक प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु में रक्षा और औद्योगिक प्रतिष्ठानों का दौरा भी किया, जहां उन्होंने डीपीएसयू, निजी रक्षा कंपनियों और स्टार्ट-अप से बातचीत की। (India-Greece Defence Deal)

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