📍गोवा/नई दिल्ली | 21 Feb, 2026, 7:42 PM
Goa Maritime Conclave 2026: गोवा में आयोजित गोवा मैरिटाइम कॉन्क्लेव 2026 (जीएमसी-26) में कई देशों में सहमति जताई है कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा अब किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं रही, बल्कि यह सभी देशों की साझा चुनौती बन चुकी है। भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित इस बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में 15 देशों के नौसेना प्रमुख और वरिष्ठ समुद्री विशेषज्ञ शामिल हुए।
यह कॉन्क्लेव गोवा के नेवल वॉर कॉलेज में आयोजित किया गया, जहां समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। इस बार की थीम थी- “कॉमन मैरिटाइम सिक्योरिटी चैलेंजेज इन आईओआर – डायनामिक थ्रेट्स से निपटने के लिए लाइन्स ऑफ एफर्ट को आगे बढ़ाना।” आसान शब्दों में समझें तो यह बैठक इस बात पर केंद्रित थी कि बदलते समुद्री खतरों से मिलकर कैसे निपटा जाए।
इस कॉन्क्लेव का सबसे अहम संदेश यही रहा कि हिंद महासागर में बढ़ते खतरों का सामना करने के लिए देशों के बीच बेहतर तालमेल, तेजी से जानकारी साझा करना और संयुक्त कार्रवाई बेहद जरूरी है। (Goa Maritime Conclave 2026)
Goa Maritime Conclave 2026: भारत बना “कन्वीनर”
इस पूरे आयोजन में भारत की भूमिका एक “कन्वीनर” यानी सबको साथ लाने वाले देश के रूप में सामने आई। भारत ने न सिर्फ इस बैठक की मेजबानी की, बल्कि एक ऐसा मंच भी दिया जहां सभी देश खुलकर अपनी बात रख सकें और मिलकर समाधान निकाल सकें।
यह कॉन्क्लेव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “महासागर विजन” (म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ एक्रॉस रीजेंस) के तहत आयोजित किया गया। इसका मतलब है कि सुरक्षा और विकास दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना। (Goa Maritime Conclave 2026)
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि आज समुद्री खतरे तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में सिर्फ जानकारी साझा करना काफी नहीं है, बल्कि अब मिलकर कार्रवाई करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी, बेहतर जानकारी साझा करने की व्यवस्था और संयुक्त ऑपरेशन के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।
इस कॉन्क्लेव में बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, केन्या, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, तंजानिया, थाईलैंड जैसे देशों के प्रमुख और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। (Goa Maritime Conclave 2026)
किन मुद्दों पर हुई सबसे ज्यादा चर्चा
कॉन्क्लेव में जिन मुद्दों पर सबसे ज्यादा फोकस रहा, उनमें अवैध मछली पकड़ना, ड्रग तस्करी, समुद्री अपराध और अन्य ट्रांसनेशनल क्राइम शामिल थे।
विशेष रूप से “आईयूयू फिशिंग” यानी अवैध, अप्रतिबंधित और अनियमित फिशिंग को बड़ा खतरा माना गया। यह सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं करता, बल्कि कई बार सुरक्षा के लिए भी खतरा बन जाता है।
इसके अलावा ड्रग तस्करी और समुद्री रास्तों के जरिए होने वाले अपराधों पर भी गंभीर चिंता जताई गई। विशेषज्ञों ने कहा कि ये नेटवर्क अब ज्यादा संगठित और तकनीक का इस्तेमाल करने वाले हो गए हैं। (Goa Maritime Conclave 2026)
रियल टाइम जानकारी साझा करने पर जोर
कॉन्क्लेव में यह बात बार-बार सामने आई कि अगर समुद्र में होने वाली गतिविधियों की जानकारी समय पर साझा की जाए, तो कई खतरों को पहले ही रोका जा सकता है।
इसके लिए मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस यानी समुद्री क्षेत्र की निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
पहले सत्र में चर्चा हुई कि अलग-अलग देशों के बीच रियल टाइम इंफॉर्मेशन शेयरिंग सिस्टम को कैसे बेहतर बनाया जाए। इसमें यह भी कहा गया कि सभी देशों के सिस्टम आपस में जुड़ें, ताकि किसी भी घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। (Goa Maritime Conclave 2026)
क्षमता निर्माण और ट्रेनिंग पर फोकस
दूसरे सत्र में देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और क्षमता निर्माण पर चर्चा हुई। इसमें यह सुझाव दिया गया कि सभी देश अपने ट्रेनिंग संसाधनों को साझा करें और ज्यादा से ज्यादा संयुक्त अभ्यास करें। इससे न सिर्फ तकनीकी क्षमता बढ़ेगी, बल्कि एक-दूसरे के साथ काम करने की समझ भी बेहतर होगी।
विशेषज्ञों ने कहा कि लंबे समय तक समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए मजबूत संस्थागत ढांचा जरूरी है। यानी सिर्फ बैठकें करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थायी सिस्टम बनाना होगा। (Goa Maritime Conclave 2026)

पूर्व नौसेना प्रमुख का अहम सुझाव
कॉन्क्लेव में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने कहा कि आज के समय में समुद्री सुरक्षा के लिए तीन चीजें सबसे जरूरी हैं- इनमें रियल टाइम जानकारी, मजबूत समन्वय और लगातार क्षमता विकास है।
उन्होंने यह भी कहा कि आईयूयू फिशिंग और ड्रग तस्करी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर जिम्मेदारी लेनी होगी। (Goa Maritime Conclave 2026)
सभी देशों ने जताई साझा प्रतिबद्धता
कॉन्क्लेव के अंत में सभी देशों के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी बात रखी और इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना ही एकमात्र रास्ता है।
सभी देशों ने यह माना कि हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता तभी संभव है जब सहयोग, भरोसा और साझा जिम्मेदारी हो। (Goa Maritime Conclave 2026)
इस कॉन्क्लेव ने एक बार फिर यह दिखाया कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहा है।
भारत लगातार ऐसे मंच तैयार कर रहा है जहां अलग-अलग देश मिलकर काम कर सकें। हाल ही में आयोजित मिलन एक्सरसाइज और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के बाद यह कॉन्क्लेव भी उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। (Goa Maritime Conclave 2026)
क्यों अहम है यह कॉन्क्लेव
आज दुनिया में समुद्र का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा- तीनों के लिए समुद्र बेहद जरूरी है। ऐसे में अगर समुद्र सुरक्षित नहीं रहेगा, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। इसी वजह से गोवा मैरिटाइम कॉन्क्लेव 2026 जैसे मंच बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं, जहां देश मिलकर समाधान तलाशते हैं। (Goa Maritime Conclave 2026)


