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ENC Fleet Expansion 2026: पूर्वी नौसेना कमान को 2026 में मिलेंगे दो नए वॉरशिप, एक शिप है ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस

अंजदीप एक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जो समुद्र की कम गहराई वाले इलाकों में भी दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने में सक्षम है। इसे प्रोजेक्ट 15बी, यानी विशाखापत्तनम-क्लास के तहत बनाया गया है...

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📍विशाखापट्टनम | 6 Dec, 2025, 8:00 PM

ENC Fleet Expansion 2026: भारतीय नौसेना के ईस्टर्न नेवल कमांड की ताकत अगले साल और बढ़ने वाली है। ईस्टर्न नेवल कमांड को जनवरी 2026 में दो नए वारशिप मिलने जा रहे हैं। इससे कमांड की ऑपरेशनल क्षमता और समुद्री सुरक्षा दोनों और मजबूत होंगी।

ईस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग आफीसर कमान्डिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला के मुताबिक साल 2025 भारतीय नौसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस साल नौसेना ने कुल आठ नए वारशिप लॉन्च किए। इनमें से छह को पहले ही ईस्टर्न नेवल कमांड में शामिल कर लिया गया है। बाकी दो तारागिरी और अंजदीप जनवरी 2026 में आधिकारिक तौर पर बेड़े में शामिल होंगे।

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आईएनएस तारागिरि एक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है, जिसे नीलगिरि-क्लास यानी प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाया गया है। यह इस सीरीज का चौथा जहाज है और इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे लगभग 75 फीसदी स्वदेशी सामग्री से तैयार किया गया है। इसे मुंबई के मझगांव डॉक ने नौसेना के लिए बनाया है। इसमें कई तरह के आधुनिक सेंसर और वेपन सिस्टम लगे हैं। यह जहाज लंबी दूरी तक हमला कर सकता है।

आईएनएस तारागिरि एक मल्टी-मिशन प्लेटफॉर्म है। यानी यह सतह पर होने वाले खतरों, हवा से होने वाले खतरों और दुश्मन की पनडुब्बियों तीनों से निपट सकता है। इस जहाज में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, MF-STAR रडार, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम, 76एमएम गन, और एंटी-सबमरीन रॉकेट्स व टॉरपीडो लगे हैं। इसकी बनावट स्टील्थ तकनीक पर आधारित है, जिससे यह रडार पर बहुत कम दिखाई देता है। इसका निर्माण 2020 से शुरू हुआ था और 2025 में इसे नौसेना को सौंप दिया गया। इससे पहले का आईएनएस तारागिरि 1980 से 2013 तक नौसेना की सेवा में रहा था।

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वहीं, अंजदीप एक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जो समुद्र की कम गहराई वाले इलाकों में भी दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने में सक्षम है। इसे प्रोजेक्ट 15बी, यानी विशाखापत्तनम-क्लास के तहत बनाया गया है। यह इस सीरीज का तीसरा जहाज है। आईएनएस अंजदीप का निर्माण मझगांव डॉक में हुआ है। इसकी लंबाई 163 मीटर और वजन करीब 7,500 टन है। यह जहाज लगभग 55 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से समुद्र में चल सकता है और एक बार ईंधन भरकर करीब 15,000 किलोमीटर तक यात्रा कर सकता है। इसमें लगभग 300 सैनिक और अधिकारी तैनात रह सकते हैं।

इस जहाज की सबसे बड़ी ताकत इसके हथियार हैं। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 एयर डिफेंस मिसाइलें, टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट और 76एमएम की मुख्य गन लगी है। यह दुश्मन के जहाज, विमान और पनडुब्बी तीनों से एक साथ निपटने की क्षमता रखता है। इसके ऊपर लगे आधुनिक MF-STAR एईएसए रडार इसे दूर तक निगरानी की ताकत देते हैं।

आईएनएस अंजदीप का नाम करवार के पास मौजूद ऐतिहासिक अंजदीप द्वीप पर रखा गया है। इसकी डिजाइन स्टील्थ तकनीक पर आधारित है। अंजदीप अरब सागर में करवार तट से कुछ किलोमीटर दूरी पर स्थित एक छोटा और शांत द्वीप है। यह क्षेत्र भले ही गोवा प्रशासन के तहत आता है, लेकिन यहां भारतीय नौसेना का एक अहम बेस मौजूद है। इसलिए आम लोगों का प्रवेश सीमित रहता है।

अंजदीप का इतिहास भी काफी पुराना है। पुर्तगालियों ने यहां फोर्ट अंजेदिवा और एक चर्च बनाया था, जो आज भी मौजूद है। द्वीप का सामरिक महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बेहद उपयुक्त स्थान माना जाता है।

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आईएनएस अर्णाला और आईएनएस अंद्रोथ के शामिल होने से नौसेना की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता और मजबूत हुई है। हिंद महासागर क्षेत्र में जिस तरह से अंडरवॉटर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए यह क्षमता नौसेना के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है।

वहीं, आईएनएस निस्तार की तैनाती से नौसेना की अंडरवॉटर रेस्क्यू और डाइविंग ऑपरेशन करने की क्षमता बढ़ी है। दुनिया की बहुत कम नौसेनाओं के पास ऐसी विशेषज्ञ क्षमता होती है। जबकि नीलगिरि-क्लास के तीन बड़े स्टील्थ फ्रिगेट उदयगिरि, हिमगिरि और नीलगिरि ने नौसेना की ब्लू-वॉटर स्ट्राइक कैपेबिलिटी में जबरदस्त बढ़त दी है। ये तीनों जहाज अत्याधुनिक देसी सेंसर, रडार और मिसाइल सिस्टम से लैस हैं, जिससे समुद्र में दूर तक निगरानी, सुरक्षा और ऑपरेशन करना और आसान हो गया है।

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