back to top
Saturday, August 30, 2025
HomeIndian ArmyYudh Abhyas 2025: युद्ध अभ्यास 2025 में यूएस आर्मी को ऑपरेशन सिंदूर...

Yudh Abhyas 2025: युद्ध अभ्यास 2025 में यूएस आर्मी को ऑपरेशन सिंदूर के सबक पढ़ाएगी भारतीय सेना, अलास्का में शोकेस हो सकता है स्ट्राइकर का एंफिबियस वर्जन!

एक्सरसाइज के दौरान अमेरिका अपने स्ट्राइकर आर्मर्ड व्हीकल के एंफिबियस वर्जन (पानी में चलने वाले मॉडल) को भी शोकेस कर सकता है...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
‘युद्ध अभ्यास’ (Yudh Abhyas 2025) भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच हर साल होने वाली एक जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज है। जिसकी शुरुआत 2004 में हुई थी। यह अभ्यास बारी-बारी से भारत और अमेरिका में हर साल आयोजित होता है। इसका मकसद दोनों देशों की सेनाओं को आतंकवाद से लड़ने और संयुक्त राष्ट्र के नियमों (चैप्टर VII) के तहत शांति स्थापना के लिए तैयार करना है...
Read Time 0.33 mintue

📍नई दिल्ली | 13 Aug, 2025, 8:52 PM

Yudh Abhyas 2025: एक तरफ जहां अमेरिका भारत पर टैरिफ और पैनल्टी दोनों लगा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ मिलिट्री डिप्लोमेसी अपना काम कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला मौका होगा जब भारत और अमेरिका की सेनाएं एक साथ किसी बड़ी मिलिट्री एक्सरसाइज में हिस्सा लेंगी। जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास (Exercise Yudh Abhyas 2025) अगले महीने अमेरिका के अलास्का में आयोजित की जा रही है, जो इस एक्सरसाइज का 21वां संस्करण होगा। इस बात की भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस एक्सरसाइज के दौरान अमेरिका अपने स्ट्राइकर आर्मर्ड व्हीकल के एंफिबियस वर्जन (पानी में चलने वाले मॉडल) को भी शोकेस कर सकता है, जिसे खास भारत के अनुरोध पर तैयार किया जा रहा है।

Yudh Abhyas 2025: क्या है ‘युद्ध अभ्यास’?

‘युद्ध अभ्यास’ (Yudh Abhyas 2025) भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच हर साल होने वाली एक जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज है। जिसकी शुरुआत 2004 में हुई थी। यह अभ्यास बारी-बारी से भारत और अमेरिका में हर साल आयोजित होता है। इसका मकसद दोनों देशों की सेनाओं को आतंकवाद से लड़ने और संयुक्त राष्ट्र के नियमों (चैप्टर VII) के तहत शांति स्थापना के लिए तैयार करना है। पिछले साल 2024 में इसका 20वां संस्करण राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ था। इस बार यह अलास्का के ठंडे और पहाड़ी इलाकों में होगा।

इस बार क्या है खास?

2025 का ‘युद्ध अभ्यास’ (Yudh Abhyas 2025) पिछले सालों की तुलना में काफी अलग होगा। रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारत की तरफ से लगभग 150 सैनिक इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे। वहीं, इस बार इस एक्सरसाइज में भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री हिस्सा नहीं लेगी, बल्कि इन्फैंट्री मद्रास रेजिमेंट करेगी, जो भारत की सबसे पुरानी और अनुभवी रेजिमेंट्स में से एक है। इसमें पैदल सेना, टैंक, आर्टिलरी और दूसरी सपोर्ट यूनिट्स शामिल होंगी।

यह भी पढ़ें:  Women in Indian Armed Forces: मोदी राज में नारी शक्ति का पराक्रम; भारतीय सेनाओं में 11 साल में तीन गुना बढ़ी महिलाओं की भागीदारी
Yudh Abhyas 2025
Yudh Abhyas 2024 (Photo: PIB)

इस अभ्यास (Yudh Abhyas 2025) में दोनों सेनाएं कई तरह की गतिविधियों में हिस्सा लेंगी। आतंकवाद रोधी अभ्यास में सैनिक यह सीखेंगे कि आतंकवादी हमलों का जवाब कैसे देना है। संयुक्त रणनीति बनाने की प्रक्रिया में दोनों सेनाएं एक साथ बैठकर युद्ध की योजना तैयार करेंगी। फील्ड ट्रेनिंग के दौरान सैनिक असली युद्ध जैसे हालात में काम करेंगे। इसके अलावा, दोनों सेनाएं एक-दूसरे से नई तकनीक और रणनीति सीखेंगी। अलास्का का ठंडा और पहाड़ी इलाका इस अभ्यास को और मुश्किल बनाता है। यहां सैनिकों को ठंडे मौसम और मुश्किल टैरेन में ट्रेनिंग करने का मौका मिलेगा। इस अभ्यास में प्राकृतिक आपदा राहत की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिसमें सैनिकों को आपदा के समय लोगों की मदद करने की प्रैक्टिस कराई जाएगी।

अलास्का के बेरिंग सागर में स्ट्राइकर!

अमेरिकी सेना इस अभ्यास (Yudh Abhyas 2025) में अपनी आधुनिक तकनीक और हथियारों को शोकेस करेगी। खास तौर पर, अमेरिका अपने आर्मर्ड व्हीकल स्ट्राइकर के एंफिबियस मॉडल को भी शोकेस करेगा। हालांकि भारत पहले इसके लैंड वर्जन के ट्रायल कर चुका है, लेकिन भारत ने इसके पानी में चलने वाले एंफिबियस वर्जन को भी देखना चाहता था, जिसे अमेरिका ने खासतौर पर तैयार किया है। सूत्रों ने उम्मीद जताई कि अलास्का में एंफिबियस वर्जन को भी शोकेस किया जा सकता है। संभवतया इसकी क्षमता का प्रदर्शन अलास्का के बेरिंग सागर में किया जा सकता है।

इस साल का यह सैन्य अभ्यास (Yudh Abhyas 2025) इसलिए भी खास है क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और अमेरिकी सेनाओं की यह पहली जॉइंट एक्सरसाइज होगी। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी आधुनिक और इंटीग्रेटेड बैटल स्ट्रेटजी का शानदार प्रदर्शन किया था। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सैनिक भारत के अनुभव से सीखने को उत्सुक हैं। अब दोनों सेनाएं आतंकवाद रोधी ऑपरेशनों, प्राकृतिक आपदा राहत और ठंडे इलाकों में ऑपरेशन की तैयारियों को अंजाम देंगे।

यह भी पढ़ें:  Ladakh: माइनस 10 डिग्री टेंपरेचर में भारतीय सेना ने दिखाया दमखम, 12,000 फीट पर खड़ा किया ब्रिज!

बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच यह अभ्यास (Yudh Abhyas 2025) ऐसे समय में हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक मुद्दों पर तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ टैरिफ को लेकर चर्चा में हैं। इसके बावजूद, यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की मजबूती को दर्शाता है।

क्या कहा था रक्षा सचिव ने

इससे पहले जुलाई में एक इंटरव्यू में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि भारत में हाल ही में किए गए स्ट्राइकर आर्मर्ड व्हीकल के ट्रायल्स में यह भारतीय सेना की एक अहम जरूरत को पूरा नहीं कर पाया। भारतीय सेना को ऐसा आर्मर्ड व्हीकल चाहिए जो पानी में भी चल सके, ताकि नदियों और पानी से भरे इलाकों में आसानी से ऑपरेशन हो सके। यह क्षमता खासकर चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और पूर्वोत्तर भारत के नदी वाले इलाकों में बेहद जरूरी है।

सिंह ने कहा था, “भारतीय सेना को इसका पानी में चलने वाला (एम्फिबियस) संस्करण चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने भविष्य में होने वाले दोनों सेनाओं के संयुक्त सैन्य अभ्यास (Yudh Abhyas 2025) में स्ट्राइकर का एम्फिबियस संस्करण दिखाने की पेशकश की है।

स्ट्राइकर की खूबियां

स्ट्राइकर (Stryker infantry combat vehicle) 8-पहियों वाला आर्मर्ड व्हीकल है, जिसे अमेरिकी कंपनी जनरल डायनेमिक्स बनाती है। यह गाड़ी 8-9 सैनिकों को ले जा सकती है और इसे इराक युद्ध में भी सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है। इसे इस सर्दी में अलास्का के तट पर डेमो के लिए तैयार किया जा रहा है।

अमेरिका ने 2023 में भारत को स्ट्राइकर M-SHORAD (Stryker armored combat vehicle) की पेशकश की थी। जो एक मोबाइल एयर डिफेंस व्हीकल वाहन है। यह विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। यह स्ट्राइकर A1 के चेसिस पर आधारित है और सेना की मैन्युवर यूनिट्स के लिए बेहद अहम है और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस को अंजाम दे सकता है।

यह भी पढ़ें:  Fire Fury Corps: हाई एल्टीट्यूड इलाकों सियाचिन और DBO की बर्फीली ऊंचाइयों में अब मिलेगी ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी; फायरफ्यूरी कॉर्प्स के सिग्नलर्स ने रचा इतिहास

इस व्हीकल की खासियत इसकी टारगेट हासिल करने की क्षमता है, जो इसके ऑनबोर्ड सिस्टम के जरिए होती है। यह सिस्टम सेना के इंटीग्रेटेड एयर और मिसाइल डिफेंस कमांड सिस्टम से जुड़ा होता है, जिससे यह ज्यादा सटीकता के साथ एरियल टारगेट्स का पता लगाने और ट्रैक करने में सक्षम है।

स्ट्राइकर M-SHORAD में हेलफायर और स्टिंगर मिसाइलें लगी होती हैं, साथ ही इसमें 30 मिमी की तोप भी होती है। जिससे यह फिक्स्ड-विंग (साधारण हवाई जहाज), रोटरी-विंग (हेलीकॉप्टर) और ड्रोन जैसे विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों का मुकाबला कर सकता है। इसे तीन या चार लोगों की टीम ऑपरेट करती है। युद्ध की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है।

भारत चाहता है देश में बने स्ट्राइकर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली वाशिंगटन यात्रा के दौरान संयुक्त बयान में स्ट्राइकर का जिक्र हुआ था। संयुक्त बयान में भारत की तरफ से P8I मरीन सर्विलांस एयरक्राफ्ट और जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम की मांग का भी उल्लेख था। लेकिन भारतीय सेना ने खासतौर पर स्ट्राइकर के ऐसे वेरिएंट की मांग की थी जो पानी में भी चल सके। साथ ही, आत्मनिर्भर भारत नीति के तहत इसे भारत में ही बनाने की शर्त रखी थी।

वहीं, अमेरिका चाहता है कि स्ट्राइकर को सीधे तैयार हालत (off-the-shelf) में दिया जाए, जबकि भारत की मांग है कि इसका निर्माण देश में ही हो ताकि घरेलू उद्योग को फायदा मिल सके। सूत्रों के अनुसार, भारत में आर्मर्ड व्हीकल्स बनाने की क्षमता पहले से मौजूद है। कहा जा रहा है कि तमिलनाडु के चेन्नई स्थित अवादी फैक्टरी में जहां टैंक बनाए जाते हैं, तो स्ट्राइकर जैसे व्हीकल भी यहां आसानी से तैयार किया जा सकते हैं।

हर स्ट्राइकर व्हीकल की कीमत करीब 5 मिलियन डॉलर (लगभग 41-42 करोड़ रुपये) या उससे अधिक होगी। अमेरिका ने भारत को इन व्हीकल्स की कई सौ यूनिट्स की पेशकश की है। वहीं अगर अलास्का में यह अपने डेमो में खरा उतरता है, तो भारत इस सौदे को मंजूरी दे सकता है।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरीhttp://harendra@rakshasamachar.com
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवादों, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। 📍 Location: New Delhi, in 🎯 Area of Expertise: Defence, Diplomacy, National Security

Most Popular

Recent Comments

Share on WhatsApp