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Varuna HA: भारतीय सेना ने शोकेस किया देश का पहला दो लोगों को ले जाने वाला हाई-एल्टीट्यूड टैक्टिकल एरियल व्हीकल, हेलिकॉप्टरों का बनेगा विकल्प

यह प्लेटफॉर्म वीटीओएल (वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग) क्षमता के साथ आता है और इसमें कंपनी की खास सेल्फ-लर्निंग कमांड एंड कंट्रोल नेविगेशन सिस्टम तकनीक लगी है...

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📍नई दिल्ली | 16 Dec, 2025, 2:57 PM

Varuna HA: भारतीय सेना के लिए ऊंचाई वाले और दुर्गम इलाकों में आवाजाही हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना स्वदेशी रूप से विकसित वरुणा एचवीटीओएल (हाइब्रिड वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग) प्लेटफॉर्म पर फोकस कर रही है। यह प्लेटफॉर्म बेहद कम जगह से उड़ान भरने और उतरने की क्षमता रखता है, जिससे वह उन इलाकों तक पहुंच सकता है जहां सामान्य हेलिकॉप्टर नहीं उड़ सकते।

54वें विजय दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने नई दिल्ली स्थित आर्मी हाउस में विजय दिवस ‘एट होम’ कार्यक्रम का आयोजन किया था। यह आयोजन 1971 के युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत की स्मृति में किया जाता है। इस मौके पर भारतीय सेना ने स्वदेशी तकनीकों, इनोवेशन को शोकेस किया। इनमें वरुणा एचवीटीओएल को प्रमुख तौर पर शोकेस किया गया था।

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वरुणा एचवीटीओएल को पुणे स्थित सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने डेवलप किया है। यह प्लेटफॉर्म iDEX और ADITI जैसी सरकारी इनोवेशन पहलों के तहत तैयार किया गया है। पहले इसका नेवी वर्जन भारतीय नौसेना में जहाज से जहाज तक सामान ले जाने के लिए शामिल किया गया था। अब इसका हाई-एल्टीट्यूड यानी ऊंचाई के लिए अनुकूलित संस्करण भारतीय सेना की जरूरतों के मुताबिक डेवलप किया जा रहा है। यह देश का पहला दो लोगों को ले जाने वाला हाई-एल्टीट्यूड टैक्टिकल एरियल व्हीकल है।

यह प्लेटफॉर्म वीटीओएल (वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग) क्षमता के साथ आता है और इसमें कंपनी की खास सेल्फ-लर्निंग कमांड एंड कंट्रोल नेविगेशन सिस्टम तकनीक लगी है। इसकी मदद से वरुणा एचए अपने आप यहां तक कि चलती हुई जगहों से भी उड़ान भर सकता है और लैंडिंग कर सकता है।

वरुणा एचए को इस तरह डिजाइन किया गया है कि समय, खर्च और इंसानी जान का जोखिम कम हो। यह ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में भारी सामान उठाने में सक्षम है और जरूरत पड़ने पर हेलिकॉप्टर जैसे पारंपरिक प्लेटफॉर्म का विकल्प बन सकता है।

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यह प्लेटफॉर्म कम ऊंचाई पर छोटी और मध्यम दूरी की तेज ट्रांसपोर्ट जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों में रसद, मेडिकल सप्लाई या जरूरी सामान पहुंचाने में यह बेहद कारगर साबित हो सकता है।

SDE Varuna HA- India’s High-Altitude Two-Man VTOL
SDE Varuna HA- India’s High-Altitude Two-Man VTOL

सेना के उत्तरी और पूर्वी कमानों ने इस प्लेटफॉर्म में गहरी रुचि दिखाई है। इसका मुख्य कारण यह है कि लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे क्षेत्रों में कई फॉरवर्ड पोस्ट ऐसे हैं जहां मौसम, टर्बुलेंस और पतली हवा के चलते हेलिकॉप्टरों से सप्लाई पहुंचाना मुश्किल होता है। ऐसे में वरुणा एचवीटीओएल जैसे प्लेटफॉर्म सैनिकों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प बन सकते हैं।

यह टैक्टिकल एरियल व्हीकल दो सैनिकों को एक साथ ले जाने या लगभग 150 से 200 किलोग्राम तक का सामान ढोने में सक्षम है। इसमें गोला-बारूद, राशन, मेडिकल सप्लाई और यहां तक कि घायल सैनिक को निकालकर सुरक्षित स्थान तक लाने की क्षमता भी शामिल है। इसकी उड़ान सीमा 25 किलोमीटर से अधिक और उड़ान समय एक घंटे से ज्यादा बताया गया है, जो ऊंचाई वाले इलाकों के लिए महत्वपूर्ण है।

वरुणा एचवीटीओएल को खास तौर पर ऊंचाई और ठंडे मौसम के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें बड़े रोटर, डी-आइसिंग सिस्टम, मजबूत लैंडिंग गियर और ठंड में काम करने वाला इंजन शामिल किए जाने की योजना है। कंपनी के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म माइनस 20 से 30 डिग्री तापमान में भी काम करने में सक्षम होगा।

इस प्लेटफॉर्म की एक बड़ी खासियत इसका सेफ्टी सिस्टम है। इसमें बैलिस्टिक पैराशूट, क्वाड-रिडंडेंट कंट्रोल सिस्टम और एयरबैग जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जिससे आपात स्थिति में जोखिम कम हो जाता है। यह विशेष रूप से ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन के दौरान अहम साबित हो सकता है।

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सेना के अधिकारियों का मानना है कि वरुणा एचवीटीओएल जैसे प्लेटफॉर्म से खतरनाक “फ्री-ड्रॉप” सप्लाई मिशनों की जरूरत कम हो सकती है। अभी कई जगहों पर हेलिकॉप्टरों को ऊंचाई पर उड़ते हुए सामान गिराना पड़ता है, जो पायलटों के लिए जोखिम भरा होता है। एक वरुणा डिटैचमेंट एक दिन में कई फॉरवर्ड पोस्ट तक सप्लाई पहुंचा सकता है।

सैन्य उपयोग के अलावा यह प्लेटफॉर्म डिजास्टर रिस्पॉन्स, ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस, इमरजेंसी मेडिकल सर्विस, लॉ-एन्फोर्समेंट और दूरदराज़ इलाकों में कनेक्टिविटी जैसे नागरिक कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह वरुणा एचवीटीओएल का इस्तेमाल ड्यूल-यूज प्लेटफॉर्म के तौर पर भी किया जा सकता है।

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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