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मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री के रेजिंग डे पर सप्त शक्ति कमांड के कमांडर बोले- ‘स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी’ पर टिकी है देश की सुरक्षा

मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट भारतीय सेना का एक अहम हिस्सा है। यह रेजिमेंट आधुनिक बख्तरबंद गाड़ियों के साथ काम करती है, जिन्हें इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (ICV) कहा जाता है...

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📍नई दिल्ली/जयपुर | 2 Apr, 2026, 8:53 PM

Mechanised Infantry Raising Day: भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट ने 2 अप्रैल को अपना 47वां रेजिंग डे पूरे सम्मान और सादगी के साथ मनाया। इस मौके पर जहां एक ओर दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, वहीं जयपुर में आयोजित एक अहम सेमिनार में आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने बदलते वैश्विक हालात पर बोलते हुए कहा कि आज के समय में “स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी” यानी रणनीतिक स्वतंत्रता अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि हर देश के लिए जरूरी जरूरत बन चुकी है।

Mechanised Infantry Raising Day: स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी है जरूरी

जयपुर मिलिट्री स्टेशन के सप्त शक्ति ऑडिटोरियम में आयोजित जनरल के सुंदरजी मेमोरियल लेक्चर में सेना की सप्त शक्ति कमांड यानी साउथ वेस्टर्न कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने साफ कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

यह कार्यक्रम मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर एंड स्कूल और सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (CLAWS) के सहयोग से आयोजित किया गया था। जिसका विषय था- “बदलती और तनावपूर्ण दुनिया में स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी की चुनौतियां।” इसका मतलब यह है कि आज के समय में कोई भी देश अपनी सुरक्षा और फैसलों में कितना स्वतंत्र रह सकता है, यह एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

जनरल ऑफिसर इन कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि आज का वैश्विक माहौल काफी अस्थिर है। बड़े देशों के बीच टकराव, आर्थिक प्रतिस्पर्धा, टेक्नोलॉजी की होड़ और अलग-अलग क्षेत्रों में संघर्ष ने हालात को और मुश्किल बना दिया है। ऐसे में किसी भी देश के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह अपने फैसले खुद ले सके और अपनी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और लंबे समय के हितों को सुरक्षित रख सके।

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उन्होंने कहा कि पहले स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी को एक कूटनीतिक सोच के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब यह सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा बन चुकी है। (Mechanised Infantry Raising Day)

बदलती दुनिया में नई चुनौतियां

आर्मी कमांडर ने अपने भाषण में यह भी बताया कि आज की दुनिया में सिर्फ सैन्य ताकत ही काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि अब टेक्नोलॉजी, साइबर स्पेस, ऊर्जा, सप्लाई चेन और स्पेस जैसे क्षेत्रों में भी मजबूत होना जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि देशों को ऐसे साझेदारी मॉडल बनाने होंगे, जिनमें सहयोग तो हो लेकिन निर्भरता न हो। यानी देश मिलकर काम करें, लेकिन अपनी स्वतंत्रता बनाए रखें। (Mechanised Infantry Raising Day)

Mechanised Infantry Raising Day

जनरल सुंदरजी की विरासत को किया याद

इस मौके पर जनरल कृष्णास्वामी सुंदरजी को भी याद किया गया, जिन्हें भारतीय सेना के सबसे दूरदर्शी नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने सेना में कई बड़े बदलाव किए थे और आधुनिक युद्ध की सोच को आगे बढ़ाया था।

कार्यक्रम में यह बताया गया कि उनकी रणनीतिक सोच आज भी भारतीय सेना की योजना और प्रशिक्षण में दिखाई देती है। उनके योगदान को याद करते हुए इस लेक्चर का आयोजन किया गया।

इस सेमिनार में कई बड़े विशेषज्ञ भी शामिल हुए। पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन के महानिदेशक वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह ने भी अपने विचार साझा किए।

उन्होंने बताया कि आज के समय में भारत को अपनी विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति को नए तरीके से ढालना होगा। उन्होंने मल्टी पोलर वर्ल्ड यानी कई ताकतों वाली दुनिया में संतुलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

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चर्चा के दौरान टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव, समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और आर्थिक मजबूती जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से बात हुई। (Mechanised Infantry Raising Day)

मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री की अहम भूमिका

मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट भारतीय सेना का एक अहम हिस्सा है। यह रेजिमेंट आधुनिक बख्तरबंद गाड़ियों के साथ काम करती है, जिन्हें इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल कहा जाता है। इन वाहनों की मदद से सैनिक तेजी से आगे बढ़ सकते हैं और दुश्मन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं।

इस रेजिमेंट की खासियत यह है कि इसमें गति और ताकत दोनों का मेल होता है। एक तरफ यह तेजी से मूव कर सकती है, वहीं दूसरी तरफ इसमें भारी फायरपावर भी होती है। यही कारण है कि आधुनिक युद्ध में इसकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ट्रेनिंग और तकनीक पर जोर

इस रेजिमेंट की ट्रेनिंग देने वाला मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर एंड स्कूल समय के साथ काफी आधुनिक हो चुका है। यहां सैनिकों को नई तकनीक और आधुनिक युद्ध के तरीकों की ट्रेनिंग दी जाती है। इस संस्थान ने अब तक कई बटालियन के सैनिकों को प्रशिक्षित किया है। इसके अलावा भारतीय सेना के अन्य हिस्सों, भारतीय तटरक्षक बल और मित्र देशों के सैनिकों को भी यहां प्रशिक्षण दिया जाता है।

यहां एक अर्बन वारफेयर ट्रेनिंग सेंटर भी तैयार किया जा रहा है, जहां शहरों में होने वाले युद्ध के लिए खास ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे सैनिकों को अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने की तैयारी मिलती है। (Mechanised Infantry Raising Day)

Mechanised Infantry Raising Day
National War Memorial

दिल्ली में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

रेजिंग डे के मौके पर दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर एक श्रद्धांजलि समारोह भी आयोजित किया गया। इसमें मेजर जनरल आर प्रेमराज और अन्य सैनिकों ने शहीदों को याद करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की।

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इस दौरान उन सैनिकों के बलिदान को याद किया गया, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपनी जान दी। समारोह में मौजूद सभी लोगों ने मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। (Mechanised Infantry Raising Day)

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  • News Desk

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