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LAC geo-tagging: लद्दाख में सेना ने पूरी की जियो-टैगिंग, चीन के दावों को गलत बताने के लिए बड़ी तैयारी

भारतीय सेना ने इस साल एलएसी पर 24×7 निगरानी नेटवर्क को बढ़ाया जा रहा है। इसमें लॉन्ग-रेंज कैमरे, हाई-रिजॉल्यूशन सेंसर, ड्रोन और हाई-एल्टीट्यूड यूएवी, हेलीकॉप्टर आधारित विंटर सर्विलांस सॉर्टीज शामिल हैं...

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📍नई दिल्ली | 14 Nov, 2025, 1:24 PM

LAC geo-tagging: पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर जारी गतिरोध के बीच भारतीय सेना ने सर्दियों की तैयारी तेज कर दी है। यह लगातार छठवां साल है जब भारतीय सैनिक कठोर ठंड, बर्फबारी और दुर्गम इलाकों में तैनात रहेंगे। हालांकि 2024 में भारत और चीन के बीच डिसएंगेजमेंट तो जरूर हो गया था, लेकिन डी-एस्केलेशन अभी तक नहीं हुआ है। दोनों देशों के सैनिक अभी भी बड़े पैमाने पर एलएसी के दोनों तरफ तैनात हैं।

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सेना के अधिकारियों ने बताया कि इस बार की सर्दियों के लिए सेना का फोकस दो अहम बातों पर है जियो-टैगिंग का पूरा होना और सर्विलांस नेटवर्क को मजबूत करना। इन दोनों कदमों को सर्दियों में तैनाती और पेट्रोलिंग की चुनौती को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

LAC geo-tagging लगभग पूरी, प्रमुख जगहें डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज

LAC geo-tagging सूत्रों के मुताबिक, सेना ने इस साल एलएसी की कई महत्वपूर्ण जगहों, पेट्रोलिंग पॉइंट्स, चोटियों और लैंडमार्क्स का जियो-टैगिंग पूरा कर लिया है। जियो-टैगिंग के तहत हर स्थान को डिजिटल मैप में उसके सटीक लोकेशन डेटा के साथ दर्ज किया जाता है।

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स्थानीय कमांडर सर्दियों के बाद इन स्थानों का फील्ड-वेरिफिकेशन करेंगे। यह प्रक्रिया एलएसी की स्पष्ट पहचान, विवादित जगहों को समझने और भविष्य की सैन्य स्तर की बातचीत में मदद करने के लिए जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि इससे पेट्रोलिंग और निगरानी और अधिक व्यवस्थित ढंग से की जा सकेगी।

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LAC geo-tagging: सर्दियों के लिए सैनिकों की पुनःतैनाती

कठिन सर्दियों में कई ऊंचे पोस्ट बर्फ से पूरी तरह कट जाते हैं। ऐसे में सेना कुछ फॉरवर्ड पोस्ट से अस्थायी रूप से सैनिकों को नीचे के प्लाटून और कंपनी स्तर के ठिकानों पर तैनात करती है। यह प्रक्रिया इस साल भी अपनाई जाएगी।

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सूत्रों ने बताया कि कुछ यूनिट्स में छुट्टियों के प्रतिशत में भी बदलाव किया जाएगा ताकि गर्मियों के समय अधिक सैनिक उपलब्ध रहें। इसका उद्देश्य है कि बर्फ गलने के बाद ऑपरेशनल डेंसिटी बढ़ाई जा सके।

निगरानी नेटवर्क और मजबूत 

भारतीय सेना ने इस साल एलएसी पर 24×7 निगरानी नेटवर्क को बढ़ाया जा रहा है। इसमें लॉन्ग-रेंज कैमरे, हाई-रिजॉल्यूशन सेंसर, ड्रोन और हाई-एल्टीट्यूड यूएवी, हेलीकॉप्टर आधारित विंटर सर्विलांस सॉर्टीज शामिल हैं। इन सिस्टम्स का उद्देश्य एलएसी के बड़े हिस्से पर नजर रखना है, ताकि अतिरिक्त पेट्रोलिंग की जरूरत कम हो और निगरानी लगातार जारी रहे।

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि सर्दियों में भी यह निगरानी जारी रहेगी, और जब जरूरी होगा तभी सीमित संख्या में कोऑर्डिनेटेड पेट्रोलिंग की जाएगी।

एलएसी पर शांति, लेकिन भरोसे की कमी बरकरार

पिछले एक साल में एलएसी पर हालात शांत रहे हैं। 2024 में रूस के कजान शहर में हुई मोदी और शी की बातचीत के बाद देपसांग और देमचोक में डिसएंगेजमेंट पूरा हुआ और पेट्रोलिंग भी बहाल हुई। इसके बावजूद भरोसे की कमी बनी हुई है और दोनों ओर सैनिकों की तैनाती कम नहीं हुई है।

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पूर्वी लद्दाख के सेक्टर में सेना की एक डिविजन तैनात है, जिसमें से दो ब्रिगेड रिजर्व रखी गई हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय राइफल्स की यूनिट्स भी इस क्षेत्र में तैनात हैं ताकि किसी आपात स्थिति पर तेजी से कार्रवाई की जा सके।

23वें दौर की भारत-चीन सैन्य वार्ता में सहमति

LAC geo-tagging पिछले दिनों चुशूल-मोल्डो में भारत और चीन के बीच 23वें दौर की सैन्य वार्ता हुई। दोनों पक्षों ने कहा कि मौजूदा मैकेनिज्म के माध्यम से किसी भी स्थिति का समाधान किया जाएगा और सीमा पर स्थिरता बनाए रखी जाएगी।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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