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Indian Army Year Ender 2025: ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना का बड़ा कदम, 90 फीसदी गोला-बारूद स्वदेशी, लंबी जंग के लिए है तैयार

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📍नई दिल्ली | 31 Dec, 2025, 4:20 PM

Indian Army Year Ender 2025: भारतीय सेना आज सिर्फ नए हथियारों पर ही ध्यान नहीं दे रही, बल्कि इस बात पर भी पूरी तरह फोकस कर रही है कि अगर कोई जंग लंबी चले तो तैयारियों में कोई दिक्कत न आए। इसी पहल पर आगे बढ़ते हुए सेना ने गोला-बारूद के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है। अब भारतीय सेना के इस्तेमाल होने वाले गोला-बारूद का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा देश में ही तैयार हो रहा है। यह बदलाव भारत की सैन्य तैयारी के लिए एक बड़ा और जरूरी कदम माना जा रहा है।

Indian Army Year Ender 2025: बदलते युद्ध हालात ने बढ़ाई चिंता

डिफेंस सूत्र बताते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चर्चा की जा रही थी कि अगर भारत-पाकिस्तान जंग लंबी छिड़ी तो कितने दिन का गोला-बारूद रिजर्व में है। हालांकि ये बातें बेफिजूल थीं लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह साफ कर दिया है कि मौजूदा माहौल में रहे युद्ध लंबे समय तक खिंच सकते हैं और इनमें गोला-बारूद की खपत बेहद तेजी से होती है। भारत की सीमाएं पाकिस्तान और चीन जैसे देशों से जुड़ी हैं, जहां तनाव लंबे समय से बना हुआ है। ऐसे हालात में सेना को पहले से यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि किसी भी स्थिति में गोला-बारूद की सप्लाई बाधित न हो।

Indian Army Year Ender 2025: गोला-बारूद की सप्लाई क्यों है सबसे अहम

सूत्रों के मुताबिक, युद्ध के दौरान गोला-बारूद, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक्स किसी भी सेना की रीढ़ होते हैं। अगर गोला-बारूद की सप्लाई रुक जाए, तो सबसे आधुनिक हथियार भी बेकार हैं। यही वजह है कि भारतीय सेना ने इसे अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है।

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Indian Army Year Ender 2025: पहले विदेशों पर थी निर्भरता

डिफेंस सूत्रों का कहना है कि कुछ साल पहले तक भारतीय सेना को गोला-बारूद के लिए काफी हद तक विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई अहम एम्यूनिशन वैरिएंट्स आयात किए जाते थे। लेकिन हाल के सालों में ग्लोबल सप्लाई चेन में आई दिक्कतों ने यह साफ कर दिया कि संकट के समय बाहरी सप्लाई पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।

स्वदेशीकरण को किया तेज

सूत्रों के अनुसार, इसी अनुभव से सीख लेते हुए सेना ने गोला-बारूद के स्वदेशीकरण को तेज किया। भारतीय सेना अपने अलग-अलग हथियार सिस्टम्स के लिए करीब 200 तरह के गोला-बारूद इस्तेमाल करती है। अब इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा वैरिएंट्स देश में ही बनाए जा रहे हैं। इसमें छोटे हथियारों की गोलियों से लेकर आर्टिलरी शेल, रॉकेट और अन्य जरूरी एम्यूनिशन शामिल हैं।

Indian Army Year Ender 2025: खरीद प्रक्रिया में किए गए बड़े बदलाव

डिफेंस सूत्र बताते हैं कि यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके लिए खरीद प्रक्रिया में कई अहम सुधार किए गए। नियमों को सरल बनाया गया और निजी कंपनियों को भी रक्षा उत्पादन में भागीदारी का मौका दिया गया। पहले जहां कुछ सरकारी कंपनियां ही गोला-बारूद बनाती थीं, अब सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी कंपनियां भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

Indian Army Year Ender 2025: मेक-इन-इंडिया के तहत बड़े ऑर्डर

सूत्रों के मुताबिक, पिछले चार से पांच सालों में सेना ने मेक-इन-इंडिया पहल के तहत बड़े पैमाने पर ऑर्डर दिए हैं। करीब 16,000 करोड़ रुपये का एक ऑर्डर बास्केट तैयार किया गया है, ताकि घरेलू कंपनियां लंबे समय के लिए उत्पादन की योजना बना सकें। इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों में लगभग 26,000 करोड़ रुपये के गोला-बारूद सप्लाई ऑर्डर भारतीय निर्माताओं को दिए गए हैं।

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Indian Army Year Ender 2025: सप्लाई सिस्टम हुआ ज्यादा मजबूत

डिफेंस सूत्रों का कहना है कि इन प्रयासों का एक बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब कई तरह के गोला-बारूद के लिए एक से ज्यादा घरेलू सप्लायर मौजूद हैं। पहले किसी एक फैक्ट्री या एक देश पर निर्भरता रहती थी, लेकिन अब विकल्प बढ़ गए हैं। इससे सप्लाई में रुकावट का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।

Indian Army Year Ender 2025: दुनिया के युद्धों से ली गई सीख

सूत्रों के अनुसार, हाल के वर्षों में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हुए युद्धों ने यह साबित कर दिया है कि लंबी जंग में गोला-बारूद की खपत अनुमान से कहीं ज्यादा होती है। जिन देशों के पास घरेलू उत्पादन की मजबूत व्यवस्था होती है, वे लंबे समय तक दबाव झेलने में सक्षम रहते हैं। भारतीय सेना ने इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बदली है।

Indian Army Year Ender 2025: अब अगला फोकस किन चीजों पर

डिफेंस सूत्र बताते हैं कि अब सेना का अगला फोकस इस सिस्टम को और मजबूत करने पर है। कच्चे माल की घरेलू सप्लाई, जैसे प्रोपेलेंट और फ्यूज, पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही फैक्ट्रियों के आधुनिकीकरण, नई मशीनों और सख्त क्वॉलिटी कंट्रोल सिस्टम पर भी काम किया जा रहा है।

Indian Army Year Ender 2025: क्वॉलिटी को लेकर भी कोई समझौता नहीं

सूत्रों के मुताबिक, सेना यह सुनिश्चित करना चाहती है कि गोला-बारूद सिर्फ देश में बने ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी वैश्विक मानकों के बराबर या उनसे बेहतर हो। इसके लिए लगातार टेस्टिंग और वैलिडेशन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

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Indian Army Year Ender 2025: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी सतर्कता

डिफेंस सूत्रों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की ऑपरेशनल रेडीनेस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सीमाओं पर सतर्कता बढ़ाई गई है और किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयारियां तेज की गई हैं। ऐसे माहौल में गोला-बारूद की घरेलू उपलब्धता से सेना के आत्मविश्वास को बड़ा सहारा मिला है।

Indian Army Year Ender 2025: सेना के साथ-साथ देश को भी फायदा

सूत्रों के अनुसार, गोला-बारूद में आत्मनिर्भरता का यह सफर सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है। इससे देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और तकनीकी क्षमता को भी फायदा हो रहा है। कई छोटे और मध्यम उद्योग अब रक्षा उत्पादन से जुड़े हैं, जिससे नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं और भारत की पहचान एक भरोसेमंद रक्षा निर्माता के रूप में मजबूत हो रही है।

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  • News Desk

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