📍नई दिल्ली/अरुणाचल प्रदेश | 3 Apr, 2026, 7:54 PM
High Altitude Monorail System Indian Army: पिछले साल भारतीय सेना ने एलएसी से सटे बॉर्डर इलाके में एक ऐसा सिस्टम तैयार किया था, जिसने पहाड़ों में लॉजिस्टिक्स यानी जरूरी सामान पहुंचाने के तरीके को बदल दिया। भारतीय सेना की गजराज कोर ने समुद्र तल से 16,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर एक खास मोनोरेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैनात किया था। वहीं खास बात यह है कि सेना के इस इनोवेशन को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी जगह मिली है।
यह सिस्टम उन इलाकों में काम कर रहा है, जहां सामान्य गाड़ियां चल ही नहीं पातीं। बर्फ, खड़ी चट्टानें और बेहद खराब मौसम के बीच यह लगातार काम कर रहा है और सैनिकों तक जरूरी सामान पहुंचा रहा है।
High Altitude Monorail System Indian Army: चार महीने से लगातार चल रहा है सिस्टम
इस मोनोरेल सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पिछले चार महीनों से बिना रुके काम कर रहा है। दिन हो या रात, तेज बर्फबारी हो या शून्य से नीचे तापमान यह सिस्टम हर हाल में चलता रहा है।
ऊंचाई वाले इलाकों में अक्सर मौसम अचानक खराब हो जाता है, जिससे हेलीकॉप्टर उड़ नहीं पाते और सड़क रास्ते बंद हो जाते हैं। ऐसे में यह मोनोरेल सिस्टम लगातार सप्लाई बनाए रखने में मदद कर रहा है। इससे सैनिकों को समय पर राशन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान मिल रहा है। (High Altitude Monorail System Indian Army)
रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ नाम
इस मोनो रेल सिस्टम को उसकी खास उपलब्धि के लिए आधिकारिक तौर पर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। इतनी ऊंचाई पर इस तरह का सिस्टम बनाना और उसे लगातार चलाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
आसान नहीं था तैयार करना
इस सिस्टम को तैयार करना आसान नहीं था। इसे भारतीय सेना की इंजीनियर टीम ने बेहद कठिन परिस्थितियों में बनाया। जहां ऑक्सीजन कम होती है और ठंड बहुत ज्यादा होती है, वहां काम करना खुद एक बड़ी चुनौती होती है।
इसके बावजूद इंजीनियरों ने कम समय में इसे तैयार कर दिया। यह पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन पर आधारित है, यानी इसमें किसी विदेशी तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया। यही वजह है कि इसे आत्मनिर्भर भारत का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है। (High Altitude Monorail System Indian Army)
कैसे काम करता है यह मोनोरेल सिस्टम
यह मोनोरेल एक ट्रैक पर चलने वाला सिस्टम है, जो पहाड़ों के बीच एक तय ट्रैक पर चलता है। इसके जरिए एक बार में काफी मात्रा में सामान भेजा जा सकता है। इसमें राशन, गोला-बारूद, ईंधन और मेडिकल सप्लाई जैसी चीजें आसानी से पहुंचाई जा रही हैं।
यह सिस्टम खड़ी ढलानों और बर्फीले रास्तों पर भी बिना रुकावट काम करता है। जहां पहले सैनिकों को भारी सामान खुद उठाकर ले जाना पड़ता था या खच्चरों का सहारा लेना पड़ता था, वहां अब यह काम मशीन के जरिए हो रहा है।
सैनिकों के लिए बड़ी राहत
पहले ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों को सप्लाई पहुंचाना बहुत मुश्किल काम होता था। कई बार खराब मौसम की वजह से दिनों तक सप्लाई रुक जाती थी। इससे सैनिकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
अब इस मोनोरेल सिस्टम के आने से यह समस्या काफी हद तक कम हो गई है। सप्लाई लगातार बनी रहती है और सैनिकों को जरूरी चीजों के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता। इससे उनका ध्यान अपने ऑपरेशन पर ज्यादा रहता है।
घायल सैनिकों को निकालने में भी मदद
यह सिस्टम सिर्फ सामान पहुंचाने तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थान तक लाने के लिए भी किया जा सकता है। ऐसे इलाकों में जहां हेलीकॉप्टर उतर नहीं पाते, वहां यह एक अहम विकल्प बन जाता है। इससे आपात स्थिति में जल्दी मदद पहुंचाना संभव हो पाता है और समय की बचत होती है। (High Altitude Monorail System Indian Army)
सीमा के पास बढ़ी ऑपरेशनल क्षमता
यह मोनोरेल सिस्टम ऐसे क्षेत्र में लगाया गया है, जो रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां मौसम और भू-भाग की वजह से अक्सर सप्लाई लाइन प्रभावित होती थी।
अब इस सिस्टम के जरिए अग्रिम चौकियों तक बिना रुकावट सामान पहुंचाया जा रहा है। इससे सैनिकों की ऑपरेशनल क्षमता मजबूत हुई है और वे बेहतर तरीके से अपने काम को अंजाम दे पा रहे हैं। (High Altitude Monorail System Indian Army)



