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AI Summit 2026 में भारतीय सेना ने दिखाई टेक्नोलॉजी की ताकत, शोकेस किए खास 12 ड्यूल-यूज एआई सिस्टम्स

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📍नई दिल्ली | 16 Feb, 2026, 8:22 PM

AI Summit 2026: नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 में इस बार भारतीय सेना का स्टॉल खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह समिट देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते प्रभाव और उसके भविष्य पर केंद्रित है। 30 से ज्यादा देशों की भागीदारी, सैकड़ों प्रदर्शकों और अलग-अलग थीम पवेलियन के बीच सेना ने यह साफ संदेश दिया है कि वह तेजी से डेटा-सेंट्रिक और एआई-एनेबल्ड फोर्स बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

भारतीय सेना ने यहां 12 स्वदेशी एआई एप्लीकेशन पेश की हैं। खास बात यह है कि ये सिस्टम केवल डिफेंस जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के काम भी आ सकते हैं। इसे ही ड्यूल-यूज टेक्नोलॉजी कहा जाता है, यानी एक ही तकनीक का इस्तेमाल सेना और सिविल सेक्टर दोनों में किया जा सकता है।

AI Summit 2026: ट्रेनिंग से लेकर परीक्षा तक: एआई एग्जामिनर

सेना ने “एआई एग्जामिनर” नाम का एक ऑटोमेटेड इवैल्यूएशन सिस्टम बनाया है। यह किसी भी लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम में जोड़ा जा सकता है। यह खुद सवाल तैयार कर सकता है, जवाबों का विश्लेषण करता है, अंक देता है और ट्रेनीज को फीडबैक भी देता है। सेना में इसका इस्तेमाल सैनिकों की ट्रेनिंग, भाषा कौशल और रणनीतिक अभ्यास के मूल्यांकन में हो सकता है। स्कूल, कॉलेज और ऑनलाइन कोर्स प्लेटफॉर्म भी इसे अपना सकते हैं, जिससे शिक्षकों का समय बचेगा और छात्रों को तुरंत परिणाम मिलेगा।

सैम-यूएन: मिशन प्लानिंग में करेगा मदद

“सैम-यूएन” यानी सिचुएशनल अवेयरनेस मॉड्यूल फॉर यूएन ऑपरेशन्स एक वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है। यह जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस, स्ट्रक्चर्ड रिपोर्टिंग और एआई एनालिटिक्स को जोड़कर रियल-टाइम स्थिति की जानकारी देता है। सेना इसे मिशन प्लानिंग और मॉनिटरिंग में इस्तेमाल कर सकती है। वहीं, डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर और स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम भी इससे बाढ़, ट्रैफिक या आपदा की स्थिति को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।

एकम: सुरक्षित एआई प्लेटफॉर्म

एकम- एक एयर-गैप्ड क्लाउड प्लेटफॉर्म है, यानी यह इंटरनेट से अलग सुरक्षित वातावरण में काम करता है। इसमें एआई चैट, डॉक्यूमेंट और प्रेजेंटेशन तैयार करना, मल्टीलिंग्वल ट्रांसलेशन, समराइजेशन जैसी सुविधाएं हैं। सेना के लिए यह सुरक्षित कम्युनिकेशन और डेटा सॉवरेंटी की सुविधा देता है। सरकारी दफ्तर और कॉर्पोरेट सेक्टर भी इसे अपना सकते हैं, जहां डेटा सुरक्षा सबसे अहम होता है।

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प्रक्षेपण: मौसम और आपदा की भविष्यवाणी

“प्रक्षेपण” एक एआई-ड्रिवन मिलिटरी क्लाइमेटोलॉजी और डिजास्टर प्रिडिक्शन सिस्टम है। यह लैंडस्लाइड, बाढ़ और हिमस्खलन की संभावना 3 से 7 दिन पहले बता सकता है। सीमा क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए यह बेहद उपयोगी है। साथ ही, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानर और सीमावर्ती गांवों को भी इससे समय रहते चेतावनी मिल सकती है।

सुरक्षा के लिए फेस रिकग्निशन: एक्सफेस

एक्सफेस- एक एआई बेस्ड फेशियल रिकग्निशन सिस्टम है। यह फोटो और वीडियो के जरिए पहचान और सत्यापन करता है। सेना इसे इंस्टॉलेशन सुरक्षा और निगरानी में इस्तेमाल कर सकती है। एयरपोर्ट सुरक्षा, कानून प्रवर्तन एजेंसियां और लापता लोगों की पहचान में भी यह मददगार हो सकता है।

नभ दृष्टि: मोबाइल से रियल-टाइम रिपोर्टिंग

“नभ दृष्टि” एक मोबाइल-इनेबल्ड टेलीमेट्री सिस्टम है। यह लोकेशन डेटा, तस्वीरें और समय की जानकारी कैप्चर कर एआई बैकएंड के जरिए प्रोसेस करता है। इससे ऑपरेशनल क्षेत्रों में तेज रिपोर्टिंग और कॉर्डिनेशन संभव है। आम नागरिक भी आपदा की स्थिति में इससे रिपोर्ट भेज सकते हैं।

ड्राइवर की थकान का चलेगा पता

लंबी दूरी की ड्राइविंग के दौरान नींद या थकान से हादसे होते हैं। सेना का “ड्राइवर फटीग डिटेक्शन” डिवाइस रियल-टाइम में ड्राइवर की आंखों और चेहरे के भावों को पहचान कर अलर्ट देता है। सेना के वाहनों के अलावा ट्रक और बस ड्राइवरों के लिए भी यह उपयोगी साबित हो सकता है।

एआई-इन-अ-बॉक्स

यह एक पोर्टेबल एज कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है, जो इंटरनेट के बिना भी एआई मॉडल चला सकता है। दूरदराज या क्लासिफाइड इलाकों में सेना के लिए यह उपयोगी है। ग्रामीण अस्पताल, औद्योगिक स्थल और आपदा प्रभावित क्षेत्र भी इसका लाभ उठा सकते हैं।

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व्हीकल ट्रैकिंग और लॉजिस्टिक्स

एआई आधारित व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम जीपीएस टेलीमेट्री और एनालिटिक्स के जरिए फ्लीट मॉनिटरिंग करता है। सेना में कन्वॉय मॉनिटरिंग और सप्लाई चेन प्रबंधन में यह मदद करता है। कमर्शियल लॉजिस्टिक्स कंपनियां भी इससे ईंधन बचत और बेहतर रूट प्लानिंग कर सकती हैं।

डीपफेक डिटेक्शन और साइबर सुरक्षा

आज के दौर में फर्जी वीडियो और साइबर हमले बड़ी चुनौती हैं। सेना ने डीपफेक वीडियो डिटेक्शन सिस्टम और मशीन लर्निंग आधारित वेब एप्लिकेशन फायरवॉल भी पेश किया है। ये सिस्टम सिंथेटिक मीडिया पहचान सकते हैं और एसक्यूएल इंजेक्शन या एक्सएसएस जैसे साइबर हमलों को रोक सकते हैं। बैंकिंग, हेल्थकेयर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी इनका उपयोग कर सकते हैं।

मोबाइल सिक्योरिटी सिस्टम

प्रोएक्टिव मोबाइल सिक्योरिटी सिस्टम मोबाइल डिवाइस में असामान्य गतिविधि और मालवेयर को पहचानता है। इससे ऑपरेशनल कम्युनिकेशन सुरक्षित रहता है। इंस्टीट्यूशनल साइबर सिक्युरिटी स्ट्रक्चर में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारत एआई समिट 2026 के लिए भारतीय सेना ने जिस तरह से तैयारी की है, वह दिखाती है कि सेना डिफेंस और सिविल दोनों क्षेत्रों में एआई का जिम्मेदार और आत्मनिर्भर मॉडल तैयार कर रहाी है। इन स्वदेशी सिस्टम्स के जरिए सेना न केवल अपनी तैयारी मजबूत कर रही है, बल्कि सिविल प्रोटेक्शन, डिजास्टर रेजिलिएंस और डिजिटल सिक्योरिटी को भी नया बूस्ट मिल रहा है।

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