HomeIndian Armyपाकिस्तान की तरफ से 791 ड्रोन इंट्रूजन्स के बाद सेना ने बदली...

पाकिस्तान की तरफ से 791 ड्रोन इंट्रूजन्स के बाद सेना ने बदली रणनीति, बनाएगी एयर कमांड सेंटर, हजारों ड्रोन होंगे तैनात

भारतीय सेना ने सीमा से 35 किलोमीटर अंदर तक और 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक ड्रोन निगरानी का जिम्मा अपने हाथ में ले लिया है। इस दायरे में होने वाली करीब 97 फीसदी ड्रोन और एंटी-ड्रोन गतिविधियों को सेना खुद संभालेगी...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 27 Jan, 2026, 11:18 AM

Indian Army drone monitoring: बॉर्डर इलाकों में ड्रोन के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से लगातार पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं में पाकिस्तान की तरफ से भेजे गए ड्रोनों की लगातार स्पॉटिंग हो रही है। जिसके बाद देश की सीमाओं से 35 किलोमीटर अंदर तक और तीन किलोमीटर ऊंचाई तक उड़ने वाले सभी ड्रोन और संदिग्ध हवाई गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी सीधे भारतीय सेना ने संभाल ली है।

सेना का यह कदम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिले अनुभवों के बाद उठाया गया है। खुद 13 जनवरी को सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने साफ किया कि पाकिस्तान को डीजीएमओ स्तर पर चेतावनी दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में जम्मू क्षेत्र में पांच ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं सामने आई हैं। एक अन्य मामले में ड्रोन के जरिए हथियार भी गिराए गए, जिनमें पिस्तौल और ग्रेनेड शामिल थे। सेना ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया। (Indian Army drone monitoring)

Indian Army drone monitoring: ऑपरेशन सिंदूर से मिली बड़ी सीख

मई 2025 में शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारतीय सेना और वायुसेना के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए हथियारबंद ड्रोनों का इस्तेमाल किया था। इन ड्रोन हमलों में तुर्की और चीन में बने ड्रोन शामिल थे। ड्रोन से सीमा के पास सैन्य ठिकानों, लॉजिस्टिक एरिया और एयर बेस की रेकी की गई और कुछ मामलों में हथियार गिराने की कोशिश भी हुई।

इसी दौरान चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर ड्रोन तैनात कर भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखी। इससे यह साफ हो गया कि भारत को अब ड्रोन खतरे को हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। (Indian Army drone monitoring)

ड्रोन गतिविधियों में बढ़ोतरी

जनवरी 2026 की शुरुआत से ही जम्मू-कश्मीर से लगी सीमा पर ड्रोन गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अब तक पाकिस्तान की ओर से इंटरनेशनल बॉर्डर और लाइन ऑफ कंट्रोल के अलग-अलग सेक्टरों में कम से कम 10 से 12 ड्रोन भेजे जा चुके हैं। ये ड्रोन साइज में छोटे हैं और मुख्य रूप से निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ये कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और अक्सर इनकी लाइट्स ऑन रहती हैं, जिससे सेना को इनकी मौजूदगी का पता चल जाता है।

यह भी पढ़ें:  L-70 FCR Drone Detector: भारतीय सेना की 50 साल पुरानी ये एतिहासिक गन बनेगी और दमदार, अब 'सूंघ-सूंघ' कर माइक्रो और स्वॉर्म ड्रोनों का करेगी विनाश

वहीं, 9 जनवरी से 15-16 जनवरी के बीच सांबा, पूंछ और राजौरी जैसे इलाकों में कई बार ड्रोन देखे गए। 11 जनवरी को सांबा, राजौरी और पूंछ सेक्टर में कम से कम पांच ड्रोन मूवमेंट दर्ज की गईं थीं। इसके बाद सेना ने तुरंत फायरिंग की और सर्च ऑपरेशन शुरू किए। 13 जनवरी को राजौरी के केरी सेक्टर में एक साथ पांच पाकिस्तानी ड्रोन नजर आए, जिन पर जवाबी कार्रवाई की गई। 15 जनवरी को पूंछ और सांबा के रामगढ़ सेक्टर में ड्रोन दिखे, जिसके बाद एंटी-ड्रोन सिस्टम को सक्रिय किया गया। (Indian Army drone monitoring)

गणतंत्र दिवस से ठीक पहले, 25 और 26 जनवरी की रात को कठुआ जिले में इंटरनेशनल बॉर्डर के पास कम से कम चार ड्रोन देखे जाने की खबरें सामने आईं। स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्ट्स में इनका जिक्र हुआ, हालांकि उस समय तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर रहीं। (Indian Army drone monitoring)

साल 2025 में 791 ड्रोन इंट्रूजन्स दर्ज

अगर पूरे 2025 और 2026 के ट्रेंड को देखा जाए तो ऑपरेशन सिंदूर के बाद पश्चिमी सीमा पर ड्रोन घुसपैठ के मामले तेजी से बढ़े हैं। साल 2025 में पश्चिमी सीमा, खासकर पंजाब और राजस्थान के इलाकों में 791 ड्रोन इंट्रूजन्स दर्ज किए गए। कुल मिलाकर 801 से ज्यादा कोशिशों को नाकाम किया गया। जनवरी 2026 में, खासतौर पर गणतंत्र दिवस से पहले, इस तरह की गतिविधियों में फिर से बढ़ोतरी देखी गई।

सेना का मानना है कि इन ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से निगरानी, हथियार या नशीले पदार्थ गिराने और भारतीय पोजीशन्स की जांच करने के लिए किया जा रहा है। सेना प्रमुख ने कहा है कि ये भले ही छोटे और सीमित क्षमता वाले ड्रोन हों, लेकिन किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। (Indian Army drone monitoring)

यह भी पढ़ें:  VIP Culture in Punjab: रिटायर्ड जनरल की कार को हूटर बजाती एस्कॉर्ट गाड़ी ने मारी टक्कर, पंजाब पुलिस ने मांगी माफी

35×3 किलोमीटर का नया सुरक्षा घेरा

इन चुनौतियों के जवाब में भारतीय सेना ने सीमा से 35 किलोमीटर अंदर तक और 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक ड्रोन निगरानी का जिम्मा अपने हाथ में ले लिया है। इस दायरे में होने वाली करीब 97 फीसदी ड्रोन और एंटी-ड्रोन गतिविधियों को सेना खुद संभालेगी।

इसके लिए चीन और पाकिस्तान सीमा के पास एयर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाए जा रहे हैं। इन सेंटरों से न सिर्फ ड्रोन की निगरानी होगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर सेना अपने ड्रोन लॉन्च कर सकेगी और दुश्मन के ड्रोन को मार गिराने की कार्रवाई भी यहीं से की जाएगी। (Indian Army drone monitoring)

हजारों ड्रोन तैनात करने की तैयारी

भारतीय सेना अब ड्रोन युद्ध के दौर को ध्यान में रखते हुए अपनी क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक, पश्चिमी मोर्चे यानी पाकिस्तान से लगी सीमा पर करीब 10 हजार ड्रोन ऑपरेट करने की क्षमता विकसित की जा रही है। वहीं चीन के साथ लगी 3,488 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर 20 हजार से ज्यादा ड्रोन तैनात करने की योजना है। इन ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, टारगेट पहचान, हमले और एंटी-ड्रोन ऑपरेशन में किया जाएगा। हर इलाके में तैनात कोर कमांडर, वहां के एयर फोर्स कमांडर और इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेंगे। (Indian Army drone monitoring)

रॉकेट फोर्स यूनिट तैनात

ड्रोन के साथ-साथ सेना ने अपनी जमीनी मारक ताकत भी काफी मजबूत की है। हाल के वर्षों में दो नई रॉकेट फोर्स यूनिट्स तैनात की गई हैं और आर्टिलरी की मारक क्षमता को पहले के 150 किलोमीटर से बढ़ाकर अब एक हजार किलोमीटर तक कर दिया गया है। इसके अलावा दो रुद्र ब्रिगेड, जिन्हें कंबाइंड आर्म्ड ब्रिगेड कहा जाता है, बनाई गई हैं और 21 भैरव बटालियन भी खड़ी की गई हैं। ये सभी कदम चीन द्वारा पूर्वी लद्दाख में रॉकेट रेजिमेंट की तैनाती और पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फतह-1 और फतह-2 रॉकेट के इस्तेमाल से मिली चुनौतियों को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं। (Indian Army drone monitoring)

यह भी पढ़ें:  मिलिट्री ड्रोन बनाने के लिए कड़े होंगे नियम, चीनी पार्ट्स पर लगेगा पूरा ब्रेक, नया सिक्योरिटी फ्रेमवर्क तैयार

भैरव बटालियन आधुनिक युद्ध के लिए तैयार

नई भैरव बटालियन को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। इन बटालियनों को सीमा के पास तैनात किया जाएगा और इनके पास आर्मड ड्रोन, निगरानी ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन होंगे। इन बटालियनों का काम सीमा के पास टैक्टिकल रोल निभाना है। वहीं, स्पेशल फोर्सेस को दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन के लिए रखा जाएगा। यानी अब हर यूनिट की भूमिका साफ-साफ तय की जा रही है। (Indian Army drone monitoring)

2020 के गलवान से लेकर अब तक

भारत-चीन रिश्तों में 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारी गिरावट आई थी। इसके बाद एलएसी पर तनाव लंबे समय तक बना रहा। हालांकि अक्टूबर 2024 में डेमचोक और डेपसांग जैसे आखिरी विवादित इलाकों से डिसएंगेजमेंट पूरा होने के बाद हालात कुछ हद तक नियंत्रित हुए हैं। लेकिन इसके बावजूद चीन ने ड्रोन और रॉकेट फोर्स की तैनाती कम नहीं की। इसी को देखते हुए भारत भी अब अपनी सैन्य रणनीति को और मजबूत बना रहा है। (Indian Army drone monitoring)

 

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular