📍नई दिल्ली | 19 Jan, 2026, 10:33 AM
Su-57 fighter jet India: भारतीय वायु सेना के लिए पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट सु-57 को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल अभी रूसी टीम की उस रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसमें यह बताया जाएगा कि अगर भारत में सु-57 स्टील्थ फाइटर जेट का निर्माण किया जाता है, तो उस पर कुल कितना खर्च आएगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह रिपोर्ट जनवरी में ही मिलने की उम्मीद है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे का रास्ता तय होगा। रिपोर्ट में सिर्फ विमान की कीमत ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े कई अहम पहलुओं का आकलन किया जाएगा। इसमें एडवांस टेक्नोलॉजी, मैनपावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन विकसित करने की लागत भी शामिल होगी। (Su-57 fighter jet India)
Su-57 fighter jet India: सु-57 क्या है और भारत के लिए क्यों अहम है
सु-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है। इसे सुखोई डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। यह विमान स्टील्थ डिजाइन, सुपरक्रूज क्षमता, एडवांस एवियोनिक्स और मॉडर्न हथियारों से लैस माना जाता है। इसका एक्सपोर्ट वर्जन सु-57ई है, जिसे भारत को ऑफर किया गया है।
भारतीय वायु सेना इस समय फाइटर स्क्वाड्रनों की कमी से जूझ रही है। जरूरत करीब 42 स्क्वाड्रन की है, जबकि मौजूदा संख्या 31 ही है। दूसरी तरफ भारत का अपना स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) अभी डेवलपमेंट फेज में है और इसके अगले दशक में ही शामिल होने की उम्मीद है। यानी करीब 8 से 10 साल का एक बड़ा गैप है, जिसे भरना वायु सेना के लिए चुनौती बना हुआ है। (Su-57 fighter jet India)
रूसी टीम की रिपोर्ट का इंतजार
सूत्रों के मुताबिक, सुखोई डिजाइन ब्यूरो समेत रूस की कई रक्षा एजेंसियों की एक टीम ने कुछ महीने पहले एचएएल फैसिलिटीज की स्टडी की थी। शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में सु-57 के निर्माण के लिए एचएएल के पास पहले से ही करीब 50 फीसदी इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।
यह इसलिए संभव हो पाया है, क्योंकि एचएएल पिछले कई दशकों से सु-30एमकेआई फाइटर जेट का निर्माण कर रही है। दिसंबर 2000 में भारत और रूस के बीच सु-30एमकेआई के लाइसेंस प्रोडक्शन का समझौता हुआ था। इसके बाद से एचएएल इस विमान के निर्माण, रखरखाव और अपग्रेड कर रहा है। (Su-57 fighter jet India)
एचएएल की क्या हैं मौजूदा क्षमताएं
एचएएल की नासिक डिवीजन में सु-30एमकेआई की फाइनल असेंबली लाइन मौजूद है। ओडिशा के कोरापुट में एएल-31एफपी टर्बोफैन इंजन का लाइसेंस प्रोडक्शन और ओवरहॉल होता है। वहीं केरल के कासरगोड स्थित स्ट्रैटेजिक इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में एवियोनिक्स से जुड़े कई अहम इक्विपमेंट्स बनाए जाते हैं।
इसी वजह से रूसी टीम का मानना है कि अगर सु-57 का निर्माण भारत में होता है, तो एचएएल को बिल्कुल जीरो से शुरुआत नहीं करनी पड़ेगी। हालांकि पांचवीं पीढ़ी का विमान होने के कारण इसमें कई नई टेक्नोलॉजी, खास मटीरियल और स्किल्ड मैनपावर की जरूरत होगी, जिसकी लागत काफी ज्यादा हो सकती है। (Su-57 fighter jet India)
सरकार का रुख अभी साफ नहीं
इस पूरे मामले में सरकार ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह तय नहीं किया गया है कि एएमसीए के आने से पहले भारत किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट को खरीदेगा या नहीं।
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने कहा था कि भारत के पास अपने पांचवीं पीढ़ी के विमान के आने तक करीब 8 से 10 साल का गैप है। इस गैप को कैसे भरा जाए, इस पर अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि अभी किसी एक प्लेटफॉर्म का नाम लेना जल्दबाजी होगी। (Su-57 fighter jet India)
सु-57 वर्सेस एफ-35
अगर भारत विदेशी पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट लेने का फैसला करता है, तो फिलहाल दो बड़े विकल्प सामने हैं। पहला रूसी सु-57ई और दूसरा अमेरिकी एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट। दोनों विमानों को एयरो इंडिया 2025 में बेंगलुरु में दिखाया गया था।
सु-57 की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम कीमत है। जानकारों के मुताबिक, इसकी प्रति यूनिट लागत अमेरिकी एफ-35 से काफी कम है। इसके अलावा रूस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और लोकल प्रोडक्शन के लिए भी तैयार है।
दूसरी ओर एफ-35 एक प्रवून प्लेटफॉर्म है, जिसे कई देश इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अमेरिका आमतौर पर सोर्स कोड और कोर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने में हिचकिचाता है, जो भारत के लिए चिंता की बाात है। (Su-57 fighter jet India)
रूस का AMCA को लेकर ऑफर
अक्टूबर 2025 में रूस के भारत में राजदूत डेनिस अलीपोव ने संकेत दिया था कि मॉस्को, भारत के एएमसीए प्रोग्राम को सपोर्ट करने के लिए तैयार है। इसके तहत सु-57 के लोकल प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी शेयरिंग की बात सामने आई थी।
हालांकि दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर क्या बातचीत हुई, इस पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। (Su-57 fighter jet India)
पहले भी दोनों साथ रहे हैं FGFA पर साथ
यह पहली बार नहीं है जब भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर साथ आए हों। इससे पहले एफजीएफए प्रोग्राम यानी फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट के तहत दोनों देशों ने मिलकर काम करने की कोशिश की थी। लेकिन लागत, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और समयसीमा जैसे मुद्दों के चलते 2018 में भारत उस प्रोजेक्ट से बाहर हो गया था।
इसी अनुभव की वजह से इस बार सरकार बेहद सतर्क नजर आ रही है। कोई भी फैसला लेने से पहले लागत, ऑपरेशनल जरूरत और स्वदेशी कार्यक्रम पर असर जैसे सभी पहलुओं को तौला जा रहा है।
फिलहाल सबकी नजर रूसी टीम की आने वाली रिपोर्ट पर टिकी है। यह रिपोर्ट साफ करेगी कि सु-57 का भारत में निर्माण करना आर्थिक और तकनीकी रूप से कितना व्यावहारिक है। इसके बाद ही सरकार और वायु सेना कोई ठोस फैसला ले पाएंगे। (Su-57 fighter jet India)


