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Made in India Rafale Jets: वायुसेना को चाहिए 114 ‘मेक इन इंडिया’ राफेल जेट्स, रक्षा मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव, 2 लाख करोड़ रुपये की है डील

भारतीय वायुसेना ने 114 ‘मेक इन इंडिया’ राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को सौंपा। 2 लाख करोड़ से अधिक की इस डील में 60 फीसदी ज्यादा स्वदेशी सामग्री शामिल होगी। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा...

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📍नई दिल्ली | 12 Sep, 2025, 9:57 PM

Made in India Rafale Jets: भारतीय वायु सेना ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को सौंपा है। इस प्रस्ताव के तहत 114 ‘मेड इन इंडिया’ राफेल फाइटर जेट्स खरीदे जाने हैं। ये विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन (Dassault Aviation) भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों के साथ मिल कर भारत में ही बनाएगी। इस प्रस्ताव की अनुमानित लागत 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जा रहा है।

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Made in India Rafale Jets: रक्षा मंत्रालय में चर्चा शुरू

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना द्वारा तैयार किया गया स्टेटमेंट ऑफ केस (SoC) कुछ दिन पहले मंत्रालय को मिला है। अब यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के डिफेंस फाइनेंस के पास समीक्षा के लिए गया हुआ है। आगे चलकर यह प्रस्ताव डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड (DPB) के पास जाएगा और उसके बाद अंतिम फैसला डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) में लिया जाएगा।

Made in India Rafale Jets: भारत के लिए सबसे बड़ी डील

अगर यह डील मंजूर होती है, तो यह भारत सरकार का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा। इस डील के बाद भारतीय वायुसेना के पास कुल 176 राफेल फाइटर जेट हो जाएंगे। फिलहाल वायुसेना के पास 36 राफेल विमान पहले से हैं, जिन्हें गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट समझौते के तहत खरीदा गया था। वहीं, भारतीय नौसेना ने भी 26 राफेल विमान का ऑर्डर दिया है।

Made in India Rafale Jets: ऑपरेशन सिंदूर में राफाल का प्रदर्शन

यह प्रस्ताव उस समय आया है, जब हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल फाइटर जेट ने पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट (Spectra Electronic Warfare Suite) की मदद से चीनी PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइलों को पूरी तरह मात दी। इसने वायुसेना की क्षमता को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

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लगााए जाएंगे नए हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें

भारत में बनने वाले राफाल विमानों को और भी ताकतवर शक्तिशाली बनाने की योजना है। इनमें मौजूदा स्कैल्प (Scalp) एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल से भी लंबी दूरी की मिसाइलों को जोड़ा जाएगा। स्कैल्प का इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों और मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाने में भी किया गया था।

Made in India Rafale Jets: 60 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री

इस डील की सबसे खास बात यह है कि इसमें 60 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री शामिल होगी। यह भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान और घरेलू रक्षा उत्पादन को नई गति देगा। भारतीय कंपनियां इस निर्माण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

Made in India Rafale Jets: मेंटेनेंस हब भी भारत में

फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) फैसिलिटी भी लगाएगी। यह हब हैदराबाद में बनाया जाएगा, जहां राफेल जेट्स में इस्तेमाल होने वाले M-88 इंजन की मरम्मत और रखरखाव का काम किया जाएगा। दसॉ ने इसके लिए पहले से ही भारत में एक कंपनी बना ली है। माना जा रहा है कि टाटा जैसी प्रमुख भारतीय एयरोस्पेस कंपनियां इस प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगी।

भारतीय वायुसेना को इस समय लड़ाकू विमानों की तत्काल जरूरत है। मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य और पड़ोसी देशों से बढ़ते खतरे को देखते हुए वायुसेना का लक्ष्य अपनी स्क्वॉड्रन क्षमता को 42 तक बढ़ाना है। फिलहाल वायुसेना 31 स्क्वॉड्रन के साथ काम कर रही है।

180 LCA मार्क-1A तेजस विमानों के ऑर्डर

भारत पहले ही 180 LCA मार्क-1A तेजस विमानों का ऑर्डर दे चुका है। इसके अलावा, 2035 के बाद बड़ी संख्या में स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट भी शामिल करने की योजना है।

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राफेल जेट्स को भारत ने पहली बार 2016 में खरीदा था और 2020 में इन्हें औपचारिक रूप से वायुसेना में शामिल किया गया। यह विमान अपनी रफ्तार, हथियारों और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स के चलते दुनिया के बेहतरीन मल्टीरोल फाइटर जेट्स में गिने जाते हैं।

भारतीय नौसेना और वायुसेना दोनों के लिए लाभ

नई डील केवल भारतीय वायुसेना के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय नौसेना के लिए भी अहम साबित होगी। नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात होने वाले ट्विन इंजन डेक बेस्ड फाइटर (TEDBF) विमानों में भी इस डील से तैयार नई टेक्नोलॉजी का फायदा मिलेगा। भारतीय नौसेना ने पहले ही 26 राफेल M का ऑर्डर दिया है, जिन्हें INS विक्रांत और भविष्य के विमानवाहक पोत पर तैनात किया जाएगा।

क्यों चुना फ्रांस को

भारत ने राफेल प्रोजेक्ट के लिए फ्रांस को इसलिए चुना है क्योंकि फ्रांस ने अतीत में कई मौकों पर भारत का साथ दिया है। 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद जब दुनिया के कई देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे, तब फ्रांस ने न केवल प्रतिबंध लगाने से इंकार किया, बल्कि मिराज-2000 फाइटर जेट्स और मिसाइल तकनीक के लिए सहयोग जारी रखा।

आज भी फ्रांस, भारत को एडवांस INGPS सिस्टम और मिराज 2000 विमानों के लिए स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराता है। यही वजह है कि राफेल के निर्माण और रखरखाव में फ्रांस, भारत का सबसे भरोसेमंद साझेदार माना जा रहा है।

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