📍बेंगलुरु/नई दिल्ली | 9 Mar, 2026, 8:07 PM
Rafale control systems India: भारत की एयरोस्पेस और डिफेंस इंडस्ट्री के लिए एक अच्छी खबर है। फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी दसॉ एविएशन ने भारत की बेंगलुरु स्थित कंपनी हिकल टेक्नोलॉजीज के साथ एक लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इस समझौते के तहत भारतीय कंपनी अब दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स में से एक राफेल के लिए क्रिटिकल कंट्रोल सिस्टम से जुड़े हाई-प्रिसिजन प्रोडक्ट्स तैयार करेगी।
इस डील को भारत की एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भारत की भूमिका वैश्विक एयरोस्पेस सप्लाई चेन में और मजबूत होगी। (Rafale control systems India)
Rafale control systems India: राफेल के लिए तैयार होंगे हाई-प्रिसिजन कंट्रोल सिस्टम
हिकल टेक्नोलॉजीज की तरफ से जारी प्रेस रीलिज के मुताबिक नए समझौते के तहत हिकल टेक्नोलॉजीज राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए हाई-प्रिसिजन कंट्रोल सिस्टम असेंबली और अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोमैकेनिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण करेगी।
ये ऐसे कंपोनेंट होते हैं जो विमान के ऑपरेशन में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। कंट्रोल सिस्टम किसी भी फाइटर जेट का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि इसके जरिए विमान की उड़ान, नियंत्रण और कई तकनीकी प्रक्रियाएं ऑपरेट होती हैं।
दसॉ एविएशन ने कहा है कि हिकल को उन सभी इंजीनियरिंग और क्वालिटी मानकों को पूरा करना होगा जो कंपनी अपने फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए तय करती है। इन मानकों को दुनिया के सबसे कड़े एयरोस्पेस स्टैंडर्ड्स में गिना जाता है। (Rafale control systems India)
भारतीय मैन्युफैक्चरिंग के लिए बड़ी उपलब्धि
इस कॉन्ट्रैक्ट को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भारत केवल फाइनल असेंबली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अब हाई-वैल्यू इंजीनियरिंग और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग में भी सक्रिय भूमिका निभाएगा।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी फाइटर जेट के क्रिटिकल सिस्टम बनाना आसान काम नहीं होता। इसके लिए अत्यधिक सटीक इंजीनियरिंग, क्वालिटी कंट्रोल और तकनीकी क्षमता की जरूरत होती है।
हिकल टेक्नोलॉजीज को इस प्रोजेक्ट में शामिल करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भारतीय एयरोस्पेस इंडस्ट्री अब वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के रूप में उभर रही है।
दसॉ एविएशन के सीनियर एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट ब्रूनो कॉइफियर ने कहा कि हिकल टेक्नोलॉजीज ने क्वालिटी और रिलायबिलिटी के मामले में मजबूत क्षमता दिखाई है। यही वजह है कि कंपनी को राफेल जैसे एडवांस्ड फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए प्रोडक्ट्स तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
उन्होंने कहा कि दसॉ एविएशन की पहचान हमेशा उच्च गुणवत्ता और तकनीकी उत्कृष्टता के लिए रही है और हिकल की कार्यशैली इन मूल्यों के साथ मेल खाती है। (Rafale control systems India)
भारतीय कंपनी के लिए बड़ा मौका
हिकल टेक्नोलॉजीज के मैनेजिंग डायरेक्टर यशस जैवीर ने इस समझौते को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई वर्षों की इंजीनियरिंग निवेश, प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग और मजबूत क्वालिटी कल्चर का परिणाम है।
उनके अनुसार राफेल जैसे अत्याधुनिक फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए क्रिटिकल प्रोडक्ट्स बनाना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी को इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर गर्व महसूस हो रहा है। (Rafale control systems India)
भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग होगा मजबूत
यह समझौता भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को भी दर्शाता है। राफेल फाइटर जेट पहले से ही भारतीय वायुसेना की ताकत का अहम हिस्सा है। भारत ने फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट खरीदे हैं जो अब भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा भारत और फ्रांस के बीच रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में कई अन्य सहयोग भी चल रहे हैं। वहीं इस तरह के इंडस्ट्रियल कॉन्ट्रैक्ट से दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।
साथ ही, इस समझौते को भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार लंबे समय से यह कोशिश कर रही है कि भारत केवल हथियार खरीदने वाला देश न रहे, बल्कि रक्षा उपकरणों के निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभाए। (Rafale control systems India)
बता दें कि राफेल प्रोग्राम दुनिया के सबसे सक्रिय फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम्स में से एक माना जाता है। इस विमान का इस्तेमाल फ्रांस की एयर फोर्स और नेवी के अलावा भारतीय वायुसेना समेत कई अन्य देशों की वायु सेनाएं भी करती हैं। इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए भी भारत ने अप्रैल 2025 में फ्रांस के साथ 26 राफेल मरीन जेट्स का सौदा साइन किया है। इनमें 22 सिंगल-सीटर (एक सीट वाले) और 4 ट्विन-सीटर (ट्रेनर वर्जन) शामिल हैं। ये जेट्स आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर तैनात किए जाएंगे। 26 राफेल मरीन जेट्स की डिलीवरी 2029 से शुरू होने की उम्मीद है, और यह 2030 तक पूरी हो जाएगी। (Rafale control systems India)

