📍कीव, यूक्रेन | 19 Mar, 2026, 8:29 PM
Ukraine Air Defence Shield: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन अब अपनी सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। यूक्रेन एक ऐसा एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है, जो इजरायल के आयरन डोम की तरह काम करेगा। इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और बमों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करना है।
यूक्रेन को यह सिस्टम खुद डिजाइन करना पड़ रहा है, क्योंकि इजरायल ने अपना आयरन डोम सिस्टम साझा नहीं किया था। ऐसे में यूक्रेन ने अपनी जरूरतों के अनुसार एक नया सिस्टम बनाने का काम शुरू किया है।
Ukraine Air Defence Shield: बड़ी चुनौती- यूक्रेन का विशाल क्षेत्र
यूक्रेन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसका बड़ा क्षेत्रफल है। यूक्रेन का क्षेत्रफल इजरायल से लगभग 30 गुना बड़ा है। ऐसे में पूरे देश को कवर करने के लिए एक बहुत बड़े और मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क की जरूरत है।
यूक्रेन का कुल क्षेत्रफल लगभग 2,33,000 स्क्वायर माइल है, जिसमें से करीब 20 फीसदी हिस्सा अभी भी रूस के कब्जे में है। इस बड़े इलाके की सुरक्षा करना किसी भी देश के लिए आसान नहीं है। (Ukraine Air Defence Shield)
रूस के लगातार हमलों ने बढ़ाई जरूरत
यूक्रेन पर लगातार ड्रोन, मिसाइल और बम हमले हो रहे हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के अनुसार, सिर्फ एक हफ्ते में रूस ने 1,770 सुसाइड ड्रोन, 1,530 हवाई बम और 86 मिसाइलें दागीं।
इन लगातार हमलों के कारण यूक्रेन को अपनी एयर डिफेंस क्षमता को तेजी से बढ़ाना पड़ रहा है। रूस की रणनीति यह है कि वह एक साथ बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलें भेजकर यूक्रेन के डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड कर दे। (Ukraine Air Defence Shield)
ड्रोन आने से पहले ही नष्ट करने की तैयारी
यूक्रेन का नया एयर डिफेंस सिस्टम इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि वह खतरे को आने से पहले ही खत्म कर दे। यूक्रेन के अधिकारियों के अनुसार, यह सिस्टम केवल प्रतिक्रिया नहीं करेगा, बल्कि पहले से ही खतरे को पहचानकर उसे रोक देगा।
इस साल जनवरी में यूक्रेन ने इस मिशन के लिए पाव्लो येलिजारोव को एयर फोर्स का डिप्टी कमांडर नियुक्त किया था। उन्हें इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई है।
येलिजारोव ने कहा कि उनका लक्ष्य “एंटी-ड्रोन डोम” बनाना है, जो दुश्मन के ड्रोन को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दे। (Ukraine Air Defence Shield)
कैसे काम करेगा यह एयर डिफेंस सिस्टम
यूक्रेन के इस सिस्टम में कई तकनीकें शामिल होंगे। जैसे इसमें रडार, एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और इंटरसेप्टर ड्रोन शामिल होंगे।
रडार सिस्टम दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों का पता लगाएगा। इसके बाद मिसाइल या इंटरसेप्टर ड्रोन उन्हें हवा में ही नष्ट करने की कोशिश करेंगे। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम दुश्मन के ड्रोन के कम्युनिकेशन और नेविगेशन को बाधित करेगा। (Ukraine Air Defence Shield)
इंटरसेप्टर ड्रोन बने सबसे प्रभावी हथियार
यूक्रेन ने इंटरसेप्टर ड्रोन पर खास जोर दिया है। ये छोटे ड्रोन दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही टकराकर या हमला करके गिरा सकते हैं। यूक्रेन के अनुसार, इंटरसेप्टर ड्रोन का इस्तेमाल करने वाली मोबाइल एंटी-एयर यूनिट्स करीब 50 प्रतिशत तक दुश्मन के ड्रोन को मार गिराने में सफल हो रही हैं। यह सफलता जमीन पर लगे एंटी-एयर सिस्टम और हेलीकॉप्टर से भी ज्यादा मानी जा रही है।
पश्चिमी हथियारों पर पूरी निर्भरता नहीं
यूक्रेन इस सिस्टम को पूरी तरह पश्चिमी देशों के महंगे हथियारों पर आधारित नहीं रखना चाहता। यूक्रेन के पास पैट्रियट और आईरिस-टी जैसे सिस्टम हैं, लेकिन ये महंगे हैं और पूरे देश को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए यूक्रेन अपने घरेलू संसाधनों और तकनीक के आधार पर यह सिस्टम बना रहा है, ताकि इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके। (Ukraine Air Defence Shield)
इजरायल से प्रेरणा, लेकिन सहयोग नहीं
यूक्रेन ने इस सिस्टम के लिए इजरायल के आयरन डोम से प्रेरणा ली है। लेकिन इजरायल ने 2022 में यूक्रेन को यह सिस्टम देने से इनकार कर दिया था। इजरायल का कहना था कि अगर यह तकनीक गलत हाथों में चली गई, तो इसका दुरुपयोग हो सकता है। इजराइल ने यूक्रेन को आयरन डोम इसलिए नहीं दिया था, क्योंकि उसे डर था कि यह तकनीक ईरान के हाथ लग सकती है। हालांकि इजरायल ने यूक्रेन को एक अर्ली वार्निंग सिस्टम जरूर दिया, जिससे हमलों की पहले जानकारी मिल सके।
इसके अलावा इजरायल रूस के साथ अपने संबंधों को भी ध्यान में रखकर फैसले लेता है। इजराइल में बड़ी संख्या में रूसी मूल के लोग रहते हैं, इसलिए वह रूस के साथ संबंध खराब नहीं करना चाहता।
लेकिन अब हालात यह हैं कि इजरायल खुद यूक्रेन की ड्रोन इंटरसेप्टर तकनीक में रुचि दिखा रहा है। (Ukraine Air Defence Shield)
यूक्रेन की तकनीक में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी
यूक्रेन द्वारा बनाए गए इंटरसेप्टर ड्रोन और अन्य तकनीकों में अब कई देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के देश इस तकनीक को ध्यान से देख रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब की कंपनी सऊदी अरामको भी इन ड्रोन को खरीदने पर विचार कर रही है। हालांकि यूक्रेन की कंपनी वाइल्ड हॉर्नेट्स, जो “स्टिंग” इंटरसेप्टर ड्रोन बनाती है, ने इन खबरों से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि वह अभी अपने देश की सेना की जरूरत भी पूरी नहीं कर पा रही है। (Ukraine Air Defence Shield)
युद्ध के बीच डेवलप हो रहा सिस्टम
यूक्रेन का यह एयर डिफेंस सिस्टम ऐसे समय में तैयार किया जा रहा है, जब देश लगातार युद्ध का सामना कर रहा है। यूक्रेन के पास न तो इजरायल जैसा तैयार सिस्टम है और न ही उसके पास कोई ब्लूप्रिंट है। इसके अलावा उसकी फ्रंटलाइन करीब 1,000 किलोमीटर लंबी है। इसके बावजूद यूक्रेन अपने अनुभव और युद्ध में सीखी गई तकनीकों के आधार पर यह सिस्टम बना रहा है। (Ukraine Air Defence Shield)
ड्रोन ने बदला युद्ध का स्वरूप
इस युद्ध ने यह भी दिखाया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। ड्रोन का इस्तेमाल न केवल हमले के लिए बल्कि निगरानी और इंटरसेप्शन के लिए भी किया जा रहा है। यूक्रेन अब ड्रोन को केवल हमला करने का हथियार नहीं, बल्कि रक्षा प्रणाली का हिस्सा बना रहा है। (Ukraine Air Defence Shield)

