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Protests in POJK: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों ने पाक को बताया ‘चुड़ैल’, कोटली से मुजफ्फराबाद तक हालात हुए बेकाबू

पीओजेके में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने यह दिखा दिया है कि यहां के लोग पाकिस्तानी शासन से बेहद नाराज हैं। राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और अत्यधिक बल प्रयोग ने जनता का सब्र तोड़ दिया है। अब वही इलाके, जिन्हें कभी भारत विरोधी गतिविधियों का गढ़ कहा जाता था, पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं...

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📍नई दिल्ली | 1 Oct, 2025, 9:32 PM

Protests in POJK: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। 30 सितंबर को कई जिलों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिनमें पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं। कोटली, दादयाल, बाग, रावलाकोट और राजधानी मुजफ्फराबाद में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। इन प्रदर्शनों के पीछे जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी की अहम भूमिका रही है।

कोटली जिले के दादयाल में अवामी एक्शन कमेटी के काफिले पहुंचे। ये काफिले रावलाकोट और मीरपुर से आए थे। प्रशासन ने इन्हें रोकने के लिए पलक ब्रिज पर कंटेनर रख दिए थे। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने सभी बाधाओं को हटाकर आगे बढ़ना जारी रखा। यह काफिला मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहा है और स्थानीय लोगों की संख्या भी इसमें लगातार बढ़ रही है।

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मुजफ्फराबाद में सबसे ज्यादा हिंसा और मौतें – Protests in POJK

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में हालात सबसे अधिक तनावपूर्ण रहे। लाल चौक इलाके में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पाकिस्तानी पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। इस घटना ने प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़का दिया।

जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी नेतृत्व ने सरकार से तुरंत मोबाइल सेवाएं बहाल करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह मांग नहीं मानी गई, तो संचार टावर गिरा दिए जाएंगे।

रावलाकोट में नारेबाजी

रावलाकोट, जिसे लंबे समय से पाकिस्तान की आईएसआई का ठिकाना माना जाता है और जहां से भारत विरोधी गतिविधियां संचालित की जाती रही हैं, अब पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध का केंद्र बन गया है। यहां बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया और नारे लगाए कि कश्मीर के संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय जनता का है।

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वहीं, बाग जिले में हिंसा और तेज रही। यहां स्थानीय लोगों और पंजाब पुलिस के जवानों के बीच झड़प हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों ने पकड़ लिया। इस घटना के बाद से पाकिस्तानी प्रशासन सकते में है, Protests in POJK अब चर्चा का विषय रहने वाला है।

 

मार्च से बिगड़ सकते हैं हालात

अवामी एक्शन कमेटी ने सभी जिलों के लोगों से 1 अक्टूबर को मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करने की अपील की थी। इस आह्वान से साफ है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।

पाकिस्तान की तुलना चुड़ैल से

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अवामी एक्शन कमेटी के शीर्ष नेता शौकत नवाज मीर ने पाकिस्तान सरकार और सेना पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद की सरकार और रावलपिंडी स्थित सेना जनता को दबा रही है। उन्होंने पाकिस्तान की तुलना एक ऐसी चुड़ैल से की है जो अपने ही लोगों को मारने पर तुली है।

मीर ने कहा कि तथाकथित “आजाद कश्मीर” असल में बिल्कुल भी आजाद नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने पहलगाम हमले से पहले हिंदुओं को “काफिर” कहा था। मीर का आरोप है कि पाकिस्तान दूसरों पर अत्याचारों का आरोप लगाता है, लेकिन खुद अपने ही नागरिकों पर अत्याचार करता है।

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मीर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में आम लोगों की आवाज को कुचला जा रहा है। स्थानीय मीडिया को चुप करा दिया गया है और जो लोग हक की बात कर रहे हैं उन्हें पुलिस और सेना द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जो पाकिस्तानी फोर्स खुद उन्हीं लोगों को मारती है, जिनका प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है, उसकी वैधता पर सवाल उठना लाजमी है।

वहीं, पीओजेके में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने यह दिखा दिया है कि यहां के लोग पाकिस्तानी शासन से बेहद नाराज हैं। राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और अत्यधिक बल प्रयोग ने जनता का सब्र तोड़ दिया है। अब वही इलाके, जिन्हें कभी भारत विरोधी गतिविधियों का गढ़ कहा जाता था, पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं।

पाकिस्तानी सेना पर जनता का गुस्सा

मुजफ्फराबाद से लेकर बाग तक, हर जगह जनता ने पाकिस्तानी फोर्स की कार्रवाई का जवाब दिया है। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल को घेर लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके संसाधनों का शोषण हो रहा है और पाकिस्तान उन्हें अधिकार देने के बजाय उनकी जिंदगी और मुश्किल बना रहा है।

Protests in POJK have escalated with violent clashes reported in Muzaffarabad, Kotli, Dadyal, Rawalakot and Bagh. In Muzaffarabad, Pakistani police opened fire on demonstrators, killing two and injuring several. Protesters in Bagh captured Punjab Police personnel, while in Rawalakot, large gatherings raised slogans against Pakistan’s exploitation of Kashmir’s resources. The Jammu & Kashmir Awami Action Committee (JKAAC) has demanded restoration of mobile services and warned of dismantling towers if ignored. JKAAC leader Shaukat Nawaz Mir accused Pakistan’s government and army of suppressing voices in so-called “Azad Kashmir.” A mass march to Muzaffarabad has been announced for October 1.

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  • News Desk

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