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Pakistan Nankana Sahib: ननकाना साहिब यात्रा पर गए हिंदुओं को पाकिस्तान ने लौटाया, बोला- सिर्फ सिखों को मिलेगी एंट्री

करीब 2,100 भारतीय श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी गई थी, जिनमें से लगभग 1,900 लोग वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान में दाखिल हुए। लेकिन जैसे ही ये जत्था पाकिस्तानी इमिग्रेशन काउंटर पर पहुंचा, अधिकारियों ने 12 श्रद्धालुओं को रोक लिया...

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📍नई दिल्ली/अमृतसर | 5 Nov, 2025, 5:45 PM

Pakistan Nankana Sahib: गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव पर पाकिस्तान का दोहरा रवैया सामने आया है। पाकिस्तान ने 12 हिंदू श्रद्धालुओं को सीमा से ही वापस लौटा दिया। ये सभी श्रद्धालु सिख जत्थे के साथ ननकाना साहिब गुरुद्वारे में माथा टेकने जा रहे थे। भारतीय श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया है कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद थे, फिर भी पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें सीमा पार नहीं करने दी।

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यह घटना उस समय हुई जब भारत-पाकिस्तान के बीच कुछ महीनों पहले हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। इस जत्थे को भारत सरकार ने विशेष अनुमति दी थी ताकि श्रद्धालु गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व पर पाकिस्तान जाकर दर्शन कर सकें। यह पहला जत्था था जिसे ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान भेजा गया।

Pakistan Nankana Sahib: सिर्फ सिखों को मिली इजाजत

मिली जानकारी के अनुसार, करीब 2,100 भारतीय श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी गई थी, जिनमें से लगभग 1,900 लोग वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान में दाखिल हुए। लेकिन जैसे ही ये जत्था पाकिस्तानी इमिग्रेशन काउंटर पर पहुंचा, अधिकारियों ने 12 श्रद्धालुओं को रोक लिया। इनमें सभी हिंदू थे और वे दिल्ली और लखनऊ से आए थे।

दिल्ली के निवासी अमर चंद अपने परिवार के साथ यात्रा पर थे, उन्होंने बताया, “हम सिख जत्थे के साथ दर्शन के लिए जा रहे थे। हमारे पास सभी कागजात थे, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा– ‘आप हिंदू हैं, इस जत्थे में क्या कर रहे हैं?’ फिर हमें वापस भेज दिया गया।”

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श्रद्धालुओं का कहना है कि न केवल उन्हें यात्रा से रोका गया बल्कि उन्होंने जो बस किराया दिया था, उसका पैसा भी नहीं लौटाया गया। एक भारतीय खुफिया अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान का यह कदम पूरी तरह से “अभूतपूर्व” है और भविष्य में ऐसा करतारपुर कॉरिडोर के श्रद्धालुओं के साथ भी हो सकता है।

Pakistan Nankana Sahib
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पाकिस्तान का यह रवैया गलत

भारत सरकार ने पाकिस्तान के इस व्यवहार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सरकारी सूत्रों ने कहा, “जब कोई देश विदेशी श्रद्धालुओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाता, तो इस तरह की यात्राएं व्यर्थ हो जाती हैं।” अधिकारियों ने कहा कि जिन लोगों को लौटाया गया, वे सामान्य नागरिक और श्रद्धालु थे, न कि किसी राजनीतिक दल से जुड़े लोग।

सूत्रों ने बताया, “इन लोगों को बिना किसी वजह के परेशान किया गया और अपमानित किया गया। यह मानवीय संवेदनशीलता के खिलाफ है और दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संबंधों की भावना को कमजोर करता है।”

ननकाना साहिब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित वह पवित्र स्थान है जहां सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। हर साल भारत से हजारों श्रद्धालु वहां जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान का रवैया लगातार खराब हो रहा है।

भारत की बार-बार की अपील के बावजूद पाकिस्तान करतारपुर कॉरिडोर से जाने वाले हर भारतीय श्रद्धालु से 20 अमेरिकी डॉलर की फीस वसूलता है। स्थानीय श्रद्धालुओं से यह शुल्क नहीं लिया जाता। इस नीति की भारत ने कई बार निंदा की है।

2018 में भी भारत ने अपने राजनयिक अधिकारियों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर कड़ा विरोध जताया था। उस समय भारत के दूतावास के अधिकारियों को गुरुद्वारा ननकाना साहिब और सच्चा सौदा में प्रवेश नहीं दिया गया था, जबकि उन्हें पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से अनुमति मिली हुई थी।

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भारत ने कई बार पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि वह धार्मिक यात्राओं के नाम पर राजनीतिक और सांप्रदायिक एजेंडा चलाने की कोशिश करता है। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान अक्सर सिख यात्राओं के दौरान प्रो-खालिस्तान बैनर लगाता है और भारत विरोधी नारेबाजी को बढ़ावा देता है।

इस बार भी पाकिस्तान का यह फैसला जानबूझकर हिंदू समुदाय को अपमानित करने और भारत के भीतर सांप्रदायिक असहमति पैदा करने का प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान इस तरह की घटनाओं से धार्मिक एकता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, जबकि दोनों देशों के लोग धार्मिक स्थलों को शांति और सम्मान का प्रतीक मानते हैं।

भारत-पाक संबंधों में बढ़ा तनाव

यह घटना ऐसे समय हुई है जब भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संपर्क पहले से ही सीमित हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ बयान दिए हैं। वहीं, भारत ने आतंकवाद और सीमा पार हिंसा को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान का यह व्यवहार “न केवल अस्वीकार्य है बल्कि यह द्विपक्षीय संबंधों की भावना के खिलाफ है।” भारत ने मांग की है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

स्पष्टीकरण: जिन 14 लोगों को पाकिस्तान में प्रवेश नहीं करने दिया गया, वे सभी पाकिस्तानी मूल के हिंदू थे। पाकिस्तान ने भारत से गए हिंदू तीर्थयात्रियों को ननकाना साहिब जाने की अनुमति दी है, लेकिन पाकिस्तानी मूल के हिंदुओं, जिन्होंने अब भारतीय पासपोर्ट ले लिया है, उन्हें सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी गई।

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With agency inputs.

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