📍नई दिल्ली / इस्लामाबाद | 8 Nov, 2025, 3:10 PM
Pakistan Commander of Defence Forces: पाकिस्तान ने अपने सैन्य ढांचे में बड़ा सुधार करने की योजना बनाई है, जिसमें एक नया पद कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेस (सीडीएफ) बनाया जाएगा। यह पद भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की तरह होगा, जिसका मकसद तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल और इंटीग्रेटेड कमान बनाना है।
यह प्रस्ताव 27वें संविधान संशोधन के तहत संसद में पेश किया जाएगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह बदलाव “आधुनिक युद्ध की जरूरतों और हाल के भारत-पाक संघर्ष से मिले सबक” के आधार पर किया जा रहा है।
Pakistan Commander of Defence Forces: भारत से प्रेरित पाकिस्तान का नया सैन्य मॉडल
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस्लामाबाद ने यह तय किया कि उसकी तीनों सेनाओं को इंटीग्रेटेड कमांड के तहत काम करने की जरूरत है। यह वही रणनीतिक सोच है, जिसने भारत को 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद बनाने के लिए प्रेरित किया था। पाकिस्तान के अखबार द न्यूज के अनुसार, नया कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेस पद उसी तर्ज पर तैयार किया जा रहा है।
Pakistan Commander of Defence Forces: पाकिस्तान के संविधान में बड़ा बदलाव
यह नया पद पाकिस्तान के संविधान के आर्टिकल 243 में संशोधन करके लाया जाएगा। अभी तक यह अनुच्छेद कहता है कि सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति के पास है और नियंत्रण संघीय सरकार के हाथों में। लेकिन अब इस कमान स्ट्रक्चर को बदलने की योजना है ताकि सीडीएफ को केंद्रीय भूमिका मिल सके।
Pakistan Commander of Defence Forces: रक्षा मंत्री ने की पुष्टि
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मीडिया से बात करते हुए पुष्टि की कि सरकार आर्टिकल 243 में बदलाव पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, “रक्षा जरूरतें बदल गई हैं। इसीलिए कानून में संशोधन की जरूरत महसूस की जा रही है। यह पूरा काम आपसी सलाह-मशवरे से किया जाएगा।” इस बयान के बाद यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान अब अपनी सशस्त्र सेनाओं के ढांचे में एक नया शीर्ष पद जोड़ने जा रहा है, जो तीनों सेनाओं को एक छतरी के नीचे लाएगा।
संसद में आएगा 27वां संशोधन
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने घोषणा की कि सरकार जल्द ही 27वें संविधान संशोधन को संसद में पेश करेगी। हालांकि अभी इस संशोधन का आधिकारिक ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके प्रमुख बिंदुओं में आर्टिकल 243 में बदलाव का प्रस्ताव शामिल है। मौजूदा आर्टिकल 243 के अनुसार, “संघीय सरकार सशस्त्र बलों की कमान और नियंत्रण रखेगी, और राष्ट्रपति देश की सर्वोच्च कमान के पद पर होंगे।”
नए संशोधन के जरिये यह तय किया जा सकता है कि कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेस इस कमान स्ट्रक्चर में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे, जिससे तीनों सेनाओं के बीच तुरंत फैसले और ऑपरेशनल कॉर्डिनेशन बनाया जा सके।
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हाथों में और पावर
रिपोर्टों में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार द्वारा लाया जा रहा यह बदलाव फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की भूमिका को और मजबूत करेगा। पाकिस्तान में पहले भी यह चर्चा रही है कि सेना प्रमुख ही देश की असली शक्ति केंद्र है, लेकिन अब संवैधानिक संशोधन के जरिये इस भूमिका को कानूनी रूप से वैध बनाने की कोशिश हो रही है।
सेना और सरकार के बीच नई साझी कमान
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान के नए प्रस्ताव में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जैसे मॉडल की झलक दिखती है। भारत ने इसे 2019 में अपनाया था। इस पद के जरिये पाकिस्तान की तीनों सेनाएं एकीकृत तरीके से काम करेंगी, ताकि संकट की स्थिति में तेजी से सैन्य कार्रवाई हो सके।
सूत्रों के मुताबिक, इस नई प्रणाली के तहत सीडीएफ सीधे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों को रिपोर्ट करेगा, लेकिन व्यवहारिक रूप से उसकी शक्ति फील्ड मार्शल के हाथों में ही रहेगी।
अगर यह संशोधन पारित होता है, तो यह पाकिस्तान की सैन्य-संविधान व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा। इससे सेना को संविधान में एक औपचारिक स्थान मिलेगा और नागरिक सरकार की भूमिका सीमित हो सकती है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
पाकिस्तान में संविधान विशेषज्ञों और विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रणाली को कमजोर कर सकता है और सेना की शक्ति को संवैधानिक दर्जा देकर सिविल-मिलिट्री संतुलन को असंतुलित करेगा।
पख्तून नेता मोहन डावर ने इसे “18वें संशोधन को पलटने की कोशिश” बताया है। 18वें संशोधन ने प्रांतों को प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दिए थे, जिससे सेना का नियंत्रण सीमित हो गया था।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि पंजाब, सिंध और के-पी के राजनीतिक समीकरण इस संशोधन को किस तरह देखते हैं, यह भी अहम होगा। 18वें संशोधन के बाद प्रांतों को जो आर्थिक शक्ति मिली थी, उससे मिलिट्री को राष्ट्रीय संसाधन पर सीमित पहुंच होने की शिकायत रही है। अब जो बदलाव सुझाए जा रहे हैं, उनमें एनएफसी से जुड़ी शक्तियों में फेरबदल भी शामिल बताया जा रहा है ताकि रक्षा निवेश और परियोजनाओं पर केंद्रीय नियंत्रण कायम किया जा सके।
27वें संशोधन के प्रमुख बिंदु
हालांकि आधिकारिक मसौदा अभी सामने नहीं आया, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया में लीक हुए कुछ अंश बताते हैं कि प्रस्तावित संशोधन में ये बातें शामिल हो सकती हैं। इनमें कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेस का नया पद, जो तीनों सेनाओं की एकीकृत कमान संभालेगा। सेना प्रमुख को फील्ड मार्शल के रूप में पांच साल का निश्चित कार्यकाल दिया जा सकता है। इसके अलावा सेना और खुफिया एजेंसियों की नियुक्ति का अधिकार फील्ड मार्शल को दिए जा सकते हैं। साथ ही आर्टिकल 243 में संशोधन करके सशस्त्र बलों के नियंत्रण की परिभाषा भी बदली जा सकती है।
पाकिस्तान के लिए बदलता शक्ति समीकरण
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि 27वां संशोधन पाकिस्तान की पावर स्ट्रक्चर को स्थायी रूप से बदल सकता है। अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो पाकिस्तान का सैन्य ढांचा एक नए केंद्रीकृत मॉडल में बदल जाएगा, जहां फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को “कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेस” और वास्तविक शक्ति की भूमिका मिलेगी।
इसके अलावा, चर्चा यह भी है कि प्रस्तावित बदलावों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जैसे पदों और जॉइंट कमान स्ट्रक्चर को नया स्वरूप दिया जा सकता है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि ज्वाइंट चीफ्स की भूमिका बदल सकती है और नए उप-सेना प्रमुख या समांतर पद बन सकते हैं जो सीधे फील्ड मार्शल या कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेस के अधीन होंगे।
भारत के सीडीएस मॉडल से समानता
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान का नया सीडीएफ पद भारत के सीडीएस मॉडल से काफी मिलता-जुलता है। दोनों देशों में इसका मुख्य उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच जॉइंटनेस और इंटीग्रेटेड कमांड स्ट्रक्चर को मजबूत करना है।
भारत में सीडीएस को 2019 में कारगिल युद्ध और अन्य अनुभवों से सबक लेकर बनाया गया था। पाकिस्तान ने अब 2025 के संघर्ष के बाद यही रास्ता अपनाने का फैसला किया है। पाकिस्तान में यह पद मौजूदा चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी (सीजेसीएससी) की जगह ले सकता है। यह नया पद तीनों सेनाओं का टॉप कॉर्डिनेटर होगा, जैसा भारत में सीडीएस करते हैं।
लेकिन फर्क भी हैं
भारत में सीडीएस चार-सितारा जनरल होता है, जो रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स का सचिव होता है। सीडीएस रक्षा नीति, प्रशिक्षण और संसाधन आवंटन से जुड़े मुद्दों पर प्राथमिकता तय करता है, लेकिन तीनों सेनाओं की ऑपरेशनल कमांड अभी भी उनके-अपने प्रमुखों के पास रहती है।
इसके विपरीत, पाकिस्तान में प्रस्तावित सीडीएफ को संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत कानूनी अधिकार दिए जा सकते हैं, जिससे वह सीधे तीनों सेनाओं की कमान संभाल सकेगा। यह बदलाव सेना प्रमुख को अभूतपूर्व शक्ति देगा और नागरिक सरकार की निगरानी कम कर सकता है।



