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Nepal crisis: क्या नेपाल हिंसा के पीछे है अमेरिका-आईएसआई का हाथ, बांग्लादेश के छात्र आंदोलन से क्या है कनेक्शन?

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी एक प्रेस रिलीज जारी कर पुष्टि की है कि हाल के विरोध-प्रदर्शनों में बाहरी ताकतों का हाथ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, काठमांडू के दरबार स्क्वायर में सीआईए फंडिंग के जरिए आईएसआई, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े लोगों की गुप्त बैठक हुई थी...

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📍नई दिल्ली | 9 Sep, 2025, 2:24 PM

Nepal crisis: काठमांडू और नेपाल के कई हिस्सों में हाल ही में भड़की हिंसा ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। सोशल मीडिया बैन के बाद फैले विरोध-प्रदर्शन में 19 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिसके बाद नेपाल सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े। हालात अभी भी बेकाबू हैं औऱ वहां सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। इन विरोध-प्रदर्शनों के चलते केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। कई राजनीतिक दलों के कई सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ऐसे हालात का फायदा आतंकी संगठन और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस उठा सकती है। सूत्रों का कहना है कि जैसे बांग्लादेश में छात्र आंदोलन हुआ वैसा ही कुछ नेपाल में देखने को मिल रहा है।

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Nepal crisis: अमेरिका, आईएसआई का हाथ? बांग्लादेश से कनेक्शन

नेपाल में भारी हिंसा हो रही है। युवा, खासकर जेन जेड, सोशल मीडिया बैन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। 3 सितंबर को सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप जैसे 26 प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया, जिसे युवाओं ने अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया। प्रदर्शनकारियों ने संसद पर कब्जा करने की कोशिश की, पीएम केपी शर्मा ओली के घर पर आग लगाई। खुफिया सूत्रों का कहना है कि अमेरिका की सीआईए ने ‘रंग क्रांति’ की साजिश रची। नेपाल भारत-चीन के बीच है, अमेरिका वहां अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। हाल ही में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन से शेख हसीना की सरकार गिरी। उसके पीछे भी अमेरिकी की डीप स्टेट का हाथ था। 2024 में बांग्लादेश में कोटा सिस्टम के खिलाफ छात्रों ने विरोध किया था। इससे हसीना सरकार गिरी। दोनों जगह युवा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से संगठित हुए। वहीं, इससे पहले श्रीलंका 2022 में भी ऐसा हो चुका है।

एजेंसियों का कहना है कि नेपाल अब पाकिस्तान के नए प्रॉक्सी वॉरफ्रंट में बदल सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान, धार्मिक और सांस्कृतिक रास्तों का इस्तेमाल कर भारत के हितों को कमजोर करने की कोशिश में है।

भारतीय एजेंसियों का मानना है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन ने भी पाकिस्तान की रणनीति को ताकत दी है। शेख हसीना के जाने और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े मोहम्मद यूनुस के सलाहकार बनने के बाद आईएसआई को खुली छूट मिल रही है। यही वजह है कि नेपाल और बांग्लादेश में इस्लामिक नेटवर्क तेजी से फैल रहे हैं।

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Nepal crisis: रज्जाक मस्जिद का विवाद

मुख्य चिंता का केंद्र है सुनसरी जिले के बिराटनगर के पास इनरावा में बन रही रज्जाक मस्जिद। यह मस्जिद बांग्लादेश की एक एनजीओ, अलहाज शमसुल हक फाउंडेशन के जरिए बनाई जा रही है। जुलाई 2025 में इस मस्जिद की नींव रखी गई थी। भारतीय एजेंसियों का मानना है कि इस धार्मिक ढांचे की आड़ में आईएसआई गुप्त ठिकाने तैयार कर सकती है, जिसका इस्तेमाल जासूसी, कट्टरपंथ और आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाएगा।

Nepal crisis: धार्मिक ढांचों का इस्तेमाल

खुफिया सूत्रों के अनुसार आईएसआई पहले भी अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे इलाकों में मस्जिदों, मदरसों और सांस्कृतिक केंद्रों को अपनी गुप्त गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर चुकी है। ये जगहें देखने में धार्मिक लगती हैं, लेकिन वास्तव में वहां से जासूसी, फंडिंग और वैचारिक ब्रेनवॉशिंग जैसे काम होते हैं। अब वही रणनीति नेपाल में अपनाई जा रही है।

Nepal crisis: जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिश

भारत के विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नेपाल जैसे हिंदू-बहुल देश में जानबूझकर कट्टरपंथी तत्वों को बसाने की कोशिश हो रही है। इसे “डेमोग्राफिक इंजीनियरिंग” बताया जा रहा है, जिसके जरिए नेपाल की धार्मिक संरचना को बदला जा रहा है और भारत की सीमाओं को अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है।

Nepal Crisis and ISI Terror Plot Against India

Nepal crisis: नेपाल रूट से भारत में घुसपैठ की साजिश

भारत की सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से कहती रही हैं कि नेपाल का 1,751 किलोमीटर लंबा खुला बॉर्डर आतंकियों और तस्करों के लिए आसान रास्ता है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे आतंकी संगठन नेपाल की ढिलाई का फायदा उठाकर भारत में घुसपैठ की कोशिश करते रहे हैं। हाल ही में नेपाल के राष्ट्रपति के सलाहकार सुनील बहादुर ठाकपा ने भी एक सेमिनार में इसी खतरे की तरफ इशारा किया।

भारत की सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी मिली है कि पाकिस्तान की आईएसआई ने नेपाल के जरिए भारत में आतंकियों को भेजने की नई रणनीति बनाई है। चूंकि भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा बेहद सख्त है, इसलिए आईएसआई अब नेपाल रूट पर ध्यान केंद्रित कर रही है। नेपाल और भारत के बीच 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जिसे आतंकियों, ड्रग माफिया और हथियार तस्करों ने पहले भी इस्तेमाल किया है।

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Nepal Crisis and ISI Terror Plot Against India
KP Sharma Oli Resigned

Nepal crisis: खालिस्तान और जैश ए मोहम्मद के आतंकियों की एंट्री

खुफिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हाल ही में जैश-ए-मोहम्मद आतंकियों ने नेपाल से भारत में घुसपैठ की कोशिश की। इसके अलावा आईएसआई खालिस्तान समर्थक तत्वों को भी इसी रास्ते से भेजने की तैयारी में है। पंजाब सीमा से घुसपैठ में लगातार नाकाम रहने के बाद पाकिस्तान अब नेपाल सीमा का सहारा ले रहा है।

Nepal crisis: बिहार और यूपी में लैंडिंग प्वाइंट

नेपाल रूट से आने वाले आतंकियों और तस्करों का लैंडिंग प्वाइंट अक्सर बिहार और उत्तर प्रदेश होता है। इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी यासीन भटकल जैसे लोगों ने भी इस सीमा का इस्तेमाल हथियार और गोला-बारूद लाने और भारत से बाहर भागने के लिए किया था। दरभंगा जैसे शहर इन आतंकियों के लिए ऑपरेशनल बेस बन चुके थे।

Nepal crisis: नेपाल सरकार की चेतावनी

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी एक प्रेस रिलीज जारी कर पुष्टि की है कि हाल के विरोध-प्रदर्शनों में बाहरी ताकतों का हाथ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, काठमांडू के दरबार स्क्वायर में सीआईए फंडिंग के जरिए आईएसआई, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े लोगों की गुप्त बैठक हुई थी। इसी बैठक में नेपाल में अस्थिरता फैलाने और भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना बनी।

नेपाल सरकार ने साफ किया है कि उसकी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा और वह अपने भूभाग का इस्तेमाल विदेशी खुफिया एजेंसियों या आतंकी संगठनों को नहीं करने देगी।

पाकिस्तान-तुर्की और इस्लामिक नेटवर्क का खेल

विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल अब आईएसआई और तुर्की समर्थित इस्लामिक नेटवर्क के निशाने पर है। तुर्की से जुड़े संगठनों के जरिए नेपाल में मदरसा और मस्जिद बनाने की कोशिशें तेज हुई हैं। रिपोर्ट्स में सामने आया कि कुछ विदेशी संगठन नेपाल में अनाथ बच्चों और गरीब परिवारों के बच्चों को धार्मिक शिक्षा के नाम पर कट्टरपंथी शिक्षा दे रहे हैं। इसके लिए तुर्की और खाड़ी देशों से करोड़ों रुपए की फंडिंग हो रही है।

हाल ही में सुनसरी जिले के इनरावा में बांग्लादेश स्थित अल्हाज शमसुल हक फाउंडेशन ने मस्जिद की नींव रखी। इस मस्जिद को दावत-ए-इस्लाम का केंद्र बताया जा रहा है। यह गतिविधियां नेपाल की पारंपरिक धार्मिक सहिष्णुता के लिए खतरे की घंटी हैं।

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भारत के लिए बढ़ता खतरा

नेपाल में इस्लामिक संगठनों की गतिविधियां सीधे भारत की सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पहले से ही कई आतंकी नेटवर्क सक्रिय हैं। अगर नेपाल में आईएसआई और इस्लामिक संगठनों की जड़ें गहरी हो गईं, तो भारत में आतंकियों की घुसपैठ और आसान हो जाएगी।

2008 के कुख्यात IC-814 हाईजैक के पटकथा भी काठमांडू में ही लिखी गई थी। भारतीय खुफिया एजेंसियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि नेपाल में आतंकी नेटवर्क बनने की स्थिति में भारत को नई चुनौती झेलनी पड़ सकती है।

आईएसआई का नया जासूसी नेटवर्क

फरवरी 2025 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नेपाली नागरिक अंसारुल मियां अंसारी को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि वह 2008 से आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा था। उसके पास से गुप्त सेना दस्तावेज, लैपटॉप, प्रिंटर और संवेदनशील डेटा बरामद हुआ। वह पाकिस्तान के हैंडलरों से व्हाट्सएप और कॉल के जरिए निर्देश लेता था।

अंसारी नेपाल से भारत आकर यहां तैनात नेटवर्क के जरिए गोपनीय जानकारी पाकिस्तान तक भेजता था। उसके नेटवर्क में झारखंड निवासी अखलाक आजम और दिल्ली स्थित कुछ स्थानीय सहयोगी भी शामिल थे। यह नेटवर्क वेस्ट एशिया, नेपाल और भारत के बीच फैला हुआ था।

सीमा पर कड़ी चौकसी

भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने हालात को देखते हुए चौकसी बढ़ा दी है। बारीकी से चेकिंग की जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। नेपाल पुलिस और भारतीय एजेंसियां भी समय-समय पर संयुक्त गश्त करती हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही नेपाल सीमा पर सुरक्षा और कड़ी कर दी गई थी। खुफिया इनपुट्स मिलने के बाद कई बार तलाशी अभियान चलाए गए।

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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