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Modi Xi Putin SCO: ट्रंप ने दिया रूस, भारत और चीन को मल्टीपोलर दुनिया बनाने का मौका, क्या फिर से जिंदा हो गया है RIC?

भारत-चीन सीमा विवाद के बीच रूस कैसे सबसे अहम मध्यस्थ बनकर उभरा? जानिए 2020 के गलवान संघर्ष से लेकर 2025 के SCO शिखर सम्मेलन तक की पूरी कहानी, जहां मॉस्को ने कूटनीति से दोनों देशों को बातचीत की मेज तक पहुंचाया...

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📍नई दिल्ली | 2 Sep, 2025, 2:51 PM

Modi Xi Putin SCO: तियानजिन में एससीओ समिट के दौरान पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की फोटो वायरल हुई। इस फोटो में दुनिया की तीन महाशक्तियां एक साथ नजर आ रही हैं। वहीं इन तस्वीरों के अलग-अलग मायने भी निकाले जा रहे हैं। इस तस्वीर को न्यू ग्लोबल ऑर्डर से जोड़ कर देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ न लगाते तो, तीनों का इस तरह साथ आना मुश्किल था। वहीं इस तस्वीर को आरआईसी यानी रूस, इंडिया और चीन स्ट्रक्चर से जोड़ कर देखा जा रहा है, जिसकी प्रस्तावना खुद रूस ने ही लिखी थी।

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Modi Xi Putin SCO: ट्रंप ने भारत को किया मजबूर

ट्रंप ने जब से व्हाइट हाउस में वापसी की है, उन्होंने भारत पर 50% तक भारी टैरिफ लगा दिए हैं। इस वजह से भारत की स्टील, ऑटोमोबाइल और दवा जैसी इंडस्ट्रीज को लगड़ा झटका लगा है। ट्रंप के सलाहकारों ने सार्वजनिक तौर पर मोदी सरकार की नीतियों को “अनफेयर” और “लूट” तक कह दिया। ट्रंप ने खुद कहा, “इंडिया हमें बहुत बड़ा चूना लगा रहा है, अब हमें सख्त जवाब देना होगा।”

भारत ने ट्रंप के इन कदमों का जवाब ट्रेड वार से नहीं दिया, बल्कि दरवाजा बातचीत के लिए खुला रखा। संदेश साफ था कि दशकों से बने भारत-अमेरिका रिश्तों को एक राष्ट्रपति की आक्रामक नीतियों के कारण खराब नहीं किया जाएगा।

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लेकिन ट्रंप सरकार की टैरिफ और लगातार हो रही बयानबाजी ने भारत को नई रणनीतिक सोच अपनाने पर मजबूर किया। भारत अब मल्टीपोलर और मल्टीलेटरल व्यवस्था का पक्षधर बनकर उभर रहा है, जिसमें वह रूस और चीन के साथ मिलकर वैश्विक संतुलन की दिशा तय करने की कोशिश कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे शीत युद्ध के बाद भारत-अमेरिका संबंध सामान्य हुए थे, वैसे ही आज की परिस्थितियां भी रणनीतिक प्राथमिकताओं के हिसाब से भारत को नए रास्ते चुनने पर मजबूर कर रही हैं। भारत और चीन के नजदीक आने की बड़ी वजह भी ट्रंप की विनाशकारी नीतियां हैं, जो न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि एससीओ का यह फोटो अमेरिका को लंबे समय तक परेशान करेगा। ट्रंप को इसके लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए, क्योंकि उनकी टैरिफ नीति ही नए ग्लोबल ऑर्डर की शुरुआत का मोड़ साबित हो रही है।

Modi Xi Putin SCO: भारत-रूस-चीन (RIC) की अहमियत

भारत, रूस और चीन का पुराना आरआईसी स्ट्रक्चर और एससीओ अब ऐसे मंच बनते दिख रहे हैं, जहां भारत खुद को अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों के मुकाबले एक स्वतंत्र ताकत के रूप में पेश कर रहा है। जुलाई में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “बहुध्रुवीय दुनिया हमारी सबसे बड़ी ताकत है और हमें देखना होगा कि ब्रिक्स आने वाले समय में इसका मार्गदर्शन कैसे कर सकता है।” वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी भारत का समर्थन करते हुए कहा था, “हम एकतरफा संरक्षणवाद का विरोध करने में एकजुट खड़े हैं।”

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Modi Xi Putin SCO: RIC को जिंदा करने की कोशिश

रूस की मध्यस्थता को समझने के लिए RIC यानी रूस-भारत-चीन त्रिकोण की पृष्ठभूमि जानना जरूरी है। इस विचार को 1998 में रूस के प्रधानमंत्री रहे येवगेनी प्रिमाकोव ने पेश किया था। उनका मानना था कि यह त्रिपक्षीय सहयोग अमेरिकी प्रभुत्व का संतुलन बना सकता है। तब से मास्को इस मंच को मजबूत करने की कोशिश करता आ रहा है।

2025 के हालात में भी रूस फिर से उसी आरआईसी को जिंदा करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने भारत के साथ रिश्तों में तनाव पैदा किया है। व्यापार पर 50% तक के शुल्क ने नई दिल्ली को परेशान किया और वॉशिंगटन ने बार-बार भारत की डिफेंस पॉलिसी की आलोचना की।

इसी माहौल में रूस ने भारत को साधने का प्रयास तेज किया है। मास्को जानता है कि अगर भारत उसके साथ बना रहता है, तो पश्चिमी देशों का दबाव कम किया जा सकता है। यही वजह है कि पुतिन और लावरोव बार-बार आरआईसी को पुनर्जीवित करने की बात करते हैं।

2020-2021 के बाद आरआईसी काफी हद तक निष्क्रिय हो गया। कोविड महामारी और भारत-चीन तनाव ने इसे कमजोर किया। लेकिन 2024-2025 में इसे पुनर्जीवित करने की कोशिशें शुरू हुईं। मई 2025 में रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने अपनी भारत यात्रा के दौरान आरआईसी को बहाल करने की अपील की। चीन ने इसका समर्थन किया, लेकिन भारत ने सावधानी बरती।

रूस का दांव और “ग्रेटर यूरेशिया”

दरअसल मास्को लंबे समय से चाहता है कि भारत और चीन के बीच स्थिरता बनी रहे ताकि वह अपने ‘ग्रेटर यूरेशिया’ विजन को आगे बढ़ा सके। इस विजन को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2015 में सामने रखा था। इसके तहत रूस चाहता है कि एशिया-यूरोप के बड़े देश और क्षेत्रीय संगठन एक साझा धुरी पर काम करें। भारत, चीन और रूस इस धुरी के सबसे अहम हिस्से हैं।

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजन कुमार का मानना है कि रूस द्वारा रूस-भारत-चीन (RIC) प्रारूप को दोबारा शुरू करने की कोशिश “रूस की केवल इच्छाशक्ति हो सकती है, जो मौजूदा वास्तविक दुनिया और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में संभव नहीं दिखती।” हालांकि, उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की इस चेतावनी से सहमति जताई कि पश्चिमी देश भारत-चीन संबंधों को “फूट डालो और राज करो” की नीति के जरिए कमजोर करना चाहते हैं।

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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