📍नई दिल्ली | 7 Nov, 2025, 8:53 PM
Indians in Russian Army: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच भारत सरकार ने ऐसे 44 भारतीय नागरिकों की पहचान की है जो अभी भी रूस की सेना में शामिल हैं। यह जानकारी तब सामने आई जब इन युवाओं के परिजनों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और उनकी वापसी की मांग की।
सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि इन 44 भारतीयों की मौजूदगी रूस की सेनाओं में हो चुकी है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले महीने भारत दौरे पर आने वाले हैं। भारत सरकार ने पहले भी इस मुद्दे को रूस के सामने उठाया था, और रूस ने वादा किया था कि वह अब भारतीयों की भर्ती नहीं करेगा और पहले से भर्ती लोगों को वापस भेज देगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 44 भारतीयों की रूसी सेना में शामिल होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि इस मामले को रूसी अधिकारियों के सामने उठाया गया है और उन्होंने भारतीय से अपील की है कि वे ऐसे ऑफर्स के झांसे में न आएं, जिसमें बहुत ज्यादा जोखिम हैं।
Indians in Russian Army: जंतर-मंतर पर परिवारों का प्रदर्शन
सोमवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 27 परिवार एकत्रित हुए और विदेश मंत्रालय से अपने परिजनों को सुरक्षित वापस लाने की मांग की। परिवारों का कहना है कि उनके बेटे और भाई को एजेंट धोखे से रूस ले गए, जहां उन्हें अच्छे नौकरी के झांसे में युद्ध में झोंक दिया गया।
हरियाणा के हिसार जिले के रहने वाले अमन का परिवार विशेष रूप से व्यथित है, क्योंकि उसी गांव के सोनू की युद्ध में मौत हो चुकी है। सोनू को इस साल अगस्त में रूस भेजा गया था, जबकि रूस का कहना है कि उसने मार्च 2025 के बाद कोई भर्ती नहीं की। सोनू भाषा कोर्स करने रूस गया था, लेकिन बाद में उसे सेना में शामिल कर लिया गया और 6 सितंबर को यूक्रेनी ड्रोन हमले में उसकी मौत हो गई।
अमन के भाई आशीष ने कहा, “मेरे भाई को जिंदा वापस लाओ, हमें बॉडी बैग नहीं चाहिए।”
Indians in Russian Army: भारत सरकार को लिखी चिट्ठी
इन परिवारों ने 23 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर मदद मांगी। चिट्ठी में हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के 16 युवाओं की जानकारी दी गई है, जो स्टूडेंट वीजा पर रूस गए थे और फिर उन्हें जबरन सेना में शामिल कर लिया गया।
पत्र में कहा गया, “रूस पहुंचने के बाद इन युवाओं को कुछ एजेंटों ने धोखे से सेना की ट्रेनिंग के लिए भेज दिया। परिवारों का उनसे संपर्क टूट गया है और उनकी सुरक्षा को लेकर डर बढ़ता जा रहा है।”
परिवारों ने भारत सरकार से राजनयिक स्तर पर दखल देने की अपील की ताकि सभी भारतीयों को तुरंत भारत वापस लाया जा सके।
कानूनी रूप से विदेशी भर्ती की अनुमति
रूस में विदेशी नागरिकों का सेना में शामिल होना कानूनी है। वहां के कानून के अनुसार विदेशी नागरिक स्वेच्छा से कॉन्ट्रैक्ट साइन कर सकते हैं। रूस में 2023 के अंत से अब तक 100 से अधिक भारतीय इस तरह से सेना में भर्ती हो चुके हैं।
रूस में भारत के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा था कि मार्च 2025 के बाद से किसी भी भारतीय की भर्ती नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “अगर कोई विदेशी व्यक्ति स्वयं भर्ती केंद्र में जाकर कॉन्ट्रैक्ट साइन करता है, तो उसे जबरन नहीं रोका जा सकता।”
हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि ज्यादातर भारतीयों को एजेंटों ने गुमराह किया और उनसे रूसी भाषा के कोर्स या नौकरी का वादा किया गया था। बाद में उन्हें सेना में शामिल कर लिया गया।
घायल भारतीयों की दयनीय स्थिति
प्रदर्शन में मौजूद परिवारों ने बताया कि कई भारतीय सैनिक घायल होने के बाद भी युद्ध के मोर्चे पर भेजे जा रहे हैं। हरियाणा के अनूप कुमार के चचेरे भाई संदीप ने बताया, “मेरे भाई को गोली लगी है, उसे केवल प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर वापस भेज दिया गया।”
एक अन्य भारतीय सैनिक माजोती साहिल मोहम्मद हुसैन ने पिछले महीने यूक्रेनी सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने खुद को भारतीय नागरिक बताया था और कहा कि वह रूस की जेल में सजा कम करने के लिए सेना में भर्ती हुआ था। अब उसे प्रिजनर ऑफ वॉर माना जा रहा है।
भारत सरकार ने मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि की है और कीव में भारतीय मिशन ने उसके लिए कांसुलर एक्सेस की मांग की है। उसकी वापसी अब रूस और यूक्रेन के बीच कैदियों की अदला-बदली पर निर्भर करेगी।
भारत और रूस के बीच बातचीत जारी
भारत सरकार ने इस मुद्दे को रूस के साथ कई स्तरों पर उठाया है। जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉस्को में राष्ट्रपति पुतिन के साथ हुई शिखर बैठक में इस विषय पर चर्चा की थी। अब जब पुतिन दिसंबर 2025 में फिर भारत यात्रा पर आने वाले हैं, तो यह मुद्दा एक बार फिर एजेंडे में शामिल किया जा सकता है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार इन मामलों पर संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। भारतीय दूतावास रूस में इन सैनिकों की पहचान, उनके ठिकाने और संपर्क स्थापित करने में जुटा है ताकि उन्हें जल्द से जल्द स्वदेश लाया जा सके।
Indians in Russian Army रूस में फंसे भारतीयों के परिवार अब अपने प्रियजनों की खबर के लिए दिन-रात इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों को महीनों से उनसे कोई संपर्क नहीं मिला है। प्रदर्शन में शामिल एक मां ने कहा, “सरकार से बस यही गुहार है कि हमारे बच्चों को जिंदा वापस लाया जाए।”
दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद सरकार इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है। उम्मीद है कि आगामी भारत-रूस शिखर सम्मेलन में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा।


