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हिंद महासागर में भारत को मिला जर्मनी का साथ, IFC-IOR में लायजन अफसर भेजेगा बर्लिन, पनडुब्बी को लेकर हुई बात

जर्मनी का यहां लायजन अधिकारी भेजना इस बात का संकेत है कि यूरोप भी हिंद महासागर क्षेत्र को रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानता है...

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📍नई दिल्ली | 12 Jan, 2026, 8:30 PM

India-Germany Joint Statement: भारत और जर्मनी ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के साथ अपने सहयोग को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। भारत और जर्मनी की तरफ से जारी जॉइंट स्टेटमेंट में इस बात का खुलासा हुआ है कि जर्मनी जल्द ही गुरुग्राम स्थित इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) में अपना एक लायजन अधिकारी तैनात करने जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं और दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। बता दें कि रक्षा समाचार डॉट कॉम ने ही सबसे पहले लायजन अधिकारी की तैनाती की खबर को सबसे पहले ब्रेक किया था।

सूत्रों के मुताबिक, जर्मन लायजन अधिकारी से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। उम्मीद है कि यह अधिकारी अगले कुछ महीनों में, संभवतः जून 2026 से पहले, आईएफसी-आईओआर में अपनी जिम्मेदारी संभाल लेगा। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और जर्मनी के बीच समुद्री निगरानी, सूचना साझा करने और सामूहिक सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। (India-Germany Joint Statement)

India-Germany Joint Statement: आईएफसी-आईओआर: हिंद महासागर में है बेहद अहम

भारतीय नौसेना ने दिसंबर 2018 में आईएफसी-आईओआर की स्थापना की थी। इसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली समुद्री गतिविधियों पर नजर रखना और अलग-अलग देशों के साथ रियल टाइम जानकारी साझा करना है। खासतौर पर यह केंद्र व्हाइट शिपिंग, यानी वाणिज्यिक जहाजों से जुड़ी सूचनाओं को इकट्ठा करता है, उनका विश्लेषण करता है और फिर उन्हें साझेदार देशों के साथ साझा करता है।

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आईएफसी-आईओआर आज सिर्फ एक सूचना केंद्र नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा के लिए एक सहयोगी प्लेटफॉर्म बन चुका है। फिलहाल यहां 15 देशों के इंटरनेशनल लायजन अधिकारी तैनात हैं और आने वाले समय में यह संख्या 40 तक ले जाने की योजना है। यह केंद्र 57 समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और 25 साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करता है। जर्मनी का यहां लायजन अधिकारी भेजना इस बात का संकेत है कि यूरोप भी हिंद महासागर क्षेत्र को रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानता है। (India–Germany Joint Statement)

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चांसलर फ्रेडरिक मर्ज दो दिन के भारत दौरे पर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर जर्मनी के फेडरल चांसलर फ़्रेडरिक मर्ज ने 12–13 जनवरी 2026 को भारत की आधिकारिक यात्रा की। यह उनका न सिर्फ भारत का पहला आधिकारिक दौरा है, बल्कि एशिया की भी पहली यात्रा है। चांसलर मर्ज के साथ 23 प्रमुख जर्मन सीईओ और इंडस्ट्री लीडर्स का प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर मर्ज का स्वागत अहमदाबाद में किया। दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी, पतंग उत्सव में हिस्सा लिया और इंडिया–जर्मनी सीईओ फोरम को संबोधित किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई, जिसमें रक्षा, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। (India–Germany Joint Statement)

डिफेंस और सिक्योरिटी को लेकर हुए ये फैसले

दोनों देशों के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और जर्मनी के बीच डिफेंस और सिक्योरिटी सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने नवंबर 2025 में नई दिल्ली में हुई हाई डिफेंस कमेटी की बैठक के नतीजों का स्वागत किया। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के कई फैसले लिए गए थे, जिनमें सेनाओं के बीच नियमित बातचीत, स्टाफ लेवल टॉक्स और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के आपसी दौरे शामिल हैं।

नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि भारत और जर्मनी के बीच मिलिट्री-टू-मिलिट्री सहयोग को और गहराया जाएगा। इसके तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास, ट्रेनिंग प्रोग्राम और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के नियमित आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाजों का एक-दूसरे के बंदरगाहों पर नियमित रूप से आवाजाही को भी संतोषजनक बताया।

इसके अलावा, भारत और जर्मनी के बीच ट्रैक 1.5 फॉरेन पॉलिसी और सिक्योरिटी डायलॉग शुरू किए जाने का भी नेताओं ने स्वागत किया। इससे दोनों देशों को रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने का एक नया मंच मिलेगा। (India–Germany Joint Statement)

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मिलन और तंरग शक्ति में हिस्सा लेगा जर्मनी

प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मनी के इस फैसले का स्वागत किया कि जिसके तहत वह नेवल एक्सरसाइज मिलन, फरवरी 2026 में होने वाले 9वें इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (आईओएनएस) और सितंबर 2026 में एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज तरंग शक्ति में हिस्सा लेगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने आईएफसी–आईओआर में जर्मनी द्वारा एक लायजन अधिकारी तैनात करने के फैसले को भी अहम बताया। (India–Germany Joint Statement)

यूरोड्रोन मेल यूएवी प्रोग्राम पर हुई बात

डिफेंस रिसर्च और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। डीआरडीओ और जर्मनी की ओसीसीएआर संस्था के बीच यूरोड्रोन मेल यूएवी प्रोग्राम पर चल रहा सहयोग इसका बड़ा उदाहरण है। इस प्रोग्राम के जरिए भारत को एडवांस मिलिटरी टेक्नोलॉजी तक पहुंच मिलेगी और यूरोप के साथ रणनीतिक रक्षा संबंध और मजबूत होंगे।

भारत और जर्मनी ने डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप तैयार करने के लिए एक जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। इसका मकसद रक्षा उद्योग के स्तर पर लंबे समय तक सहयोग बढ़ाना है, जिसमें टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन शामिल हैं। भारत ने जर्मनी की उस कोशिश की भी सराहना की, जिसके तहत रक्षा उपकरणों के निर्यात को जल्दी मंजूरी देने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। (India–Germany Joint Statement)

पनडुब्बी और सी-यूएएस को लेकर हुई बातचीत

भारत और जर्मनी के बीच पनडुब्बी सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है। भारतीय नौसेना की शिशुमार श्रेणी की डीज़ल–इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां जर्मनी की तकनीक से बनी हैं। अब यह सहयोग एक और बड़े स्तर पर पहुंचने वाला है।

बर्लिन और नई दिल्ली में हुए डिफेंस राउंडटेबल और सेमिनारों से दोनों देशों के उद्योगों को एक-दूसरे को समझने का बेहतर मौका मिला है। पनडुब्बियों, हेलिकॉप्टरों के लिए ऑब्स्टेकल अवॉयडेंस सिस्टम और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (सी-यूएएस) को लेकर चल रहे सहयोग को भी सराहना की। दोनों देशों ने माना कि भारत की कुशल कार्यशक्ति और कम लागत, तथा जर्मनी की एडवांस तकनीक और निवेश मिलकर रक्षा क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं।

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ट्रेनिंग और आपसी आदान-प्रदान के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने प्रगति पर संतोष जताया। पीसकीपिंग ट्रेनिंग, सेनाओं के बीच रिसिप्रोकल लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट और नई रक्षा तकनीकों पर डीआरडीओ तथा जर्मनी की बीएएआईएनबीडब्ल्यू एजेंसी के बीच ज्ञान साझा करने को लेकर समझौते की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। (India–Germany Joint Statement)

सीमा पार से होने वाले आतंकवाद की निंदा

भारत और जर्मनी ने आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई, खासकर उन आतंकी संगठनों के खिलाफ जो संयुक्त राष्ट्र 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद चाहे किसी भी रूप में हो, खासकर सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में हुई आतंकी घटना की दोनों नेताओं ने सख्त निंदा की।

दोनों देशों ने सभी देशों से अपील की कि वे आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों, उनके ढांचे और फंडिंग नेटवर्क को खत्म करने के लिए मिलकर कदम उठाएं। नेताओं ने म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के अनुमोदन का स्वागत किया और आतंकवाद से निपटने के लिए बने जॉइंट वर्किंग ग्रुप के तहत हुई प्रगति को भी महत्वपूर्ण बताया। (India–Germany Joint Statement)

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    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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