📍नई दिल्ली | 22 Mar, 2026, 7:19 PM
Global Terrorism Index 2026: दुनिया भर में आतंकवाद की स्थिति को लेकर जारी हुई ग्लोबल ग्लोबल टेरेरिज्म इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान अब दुनिया का सबसे ज्यादा आतंक प्रभावित देश बन गया है, जबकि भारत में आतंकवादी घटनाओं में साफ तौर पर कमी आई है। यह रिपोर्ट इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस ने जारी की है, जिसमें साल 2025 के आंकड़ों के आधार पर दुनिया के 160 से ज्यादा देशों का विश्लेषण किया गया है।
Global Terrorism Index 2026: पाकिस्तान में लगातार बिगड़ते हालात
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में साल 2025 के दौरान आतंकवाद से जुड़े हमलों और मौतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल वहां 1,100 से ज्यादा लोगों की मौत आतंकवादी घटनाओं में हुई, जबकि 1,000 से ज्यादा हमले हुए। यानी हालात धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं और अब पाकिस्तान इस सूची में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
पहले यह स्थान अफ्रीकी देश बुर्किना फासो के पास था, लेकिन इस बार पाकिस्तान ने उसे पीछे पछाड़ दिया है। यह दिखाता है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद का खतरा अभी भी बहुत गंभीर है। (Global Terrorism Index 2026)
टीटीपी बना सबसे बड़ा खतरा
पाकिस्तान में आतंकवाद बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी का फिर से मजबूत होना है। यह संगठन पिछले कुछ सालों में काफी सक्रिय हुआ है और उसने अपने हमलों की संख्या और क्षमता दोनों बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे खतरनाक चार आतंकी संगठनों में टीटीपी भी शामिल है, और खास बात यह है कि इन चारों में सिर्फ टीटीपी ही ऐसा संगठन है, जिसकी हिंसक गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है।
अफगानिस्तान से है कनेक्शन
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद क्षेत्रीय समीकरण बदल गए। अफगानिस्तान में नई सरकार बनने के बाद टीटीपी को सीमा पार सुरक्षित ठिकाने और समर्थन मिलने लगा। इससे उसकी ताकत और बढ़ गई। पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा लंबे समय से अस्थिर रही है, लेकिन अब यह और ज्यादा संवेदनशील हो गई है। कई बार दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि पाकिस्तान को अफगानिस्तान के अंदर एयरस्ट्राइक तक करनी पड़ी। (Global Terrorism Index 2026)
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान बने हिंसा के केंद्र
अगर पाकिस्तान के अंदर की स्थिति को देखें, तो ज्यादातर आतंकवादी घटनाएं खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हो रही हैं। इन दोनों इलाकों में न सिर्फ हमलों की संख्या ज्यादा है, बल्कि मौतों का आंकड़ा भी यहीं सबसे अधिक है।
बलूचिस्तान में हाल ही में एक बड़ी घटना हुई थी, जिसमें एक ट्रेन को हाईजैक कर लिया गया और सैकड़ों लोगों को बंधक बना लिया गया। इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि वहां आतंकवादी संगठन कितनी ताकत हासिल कर चुके हैं।
वैश्विक स्तर पर कुछ सुधार, लेकिन खतरा बरकरार
अगर पूरी दुनिया की बात करें, तो रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। दुनिया भर में आतंकवाद से होने वाली मौतों में करीब 28 फीसदी की कमी आई है। हमलों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है और कई देशों में स्थिति बेहतर हुई है। करीब 80 से ज्यादा देशों में हालात सुधरे हैं, जबकि बहुत कम देशों में स्थिति खराब हुई है।
लेकिन इसके बावजूद रिपोर्ट में चेतावनी भी दी गई है कि दुनिया में बढ़ते नए संघर्ष, जैसे मध्य पूर्व की स्थिति, भविष्य में आतंकवाद को फिर से बढ़ा सकते हैं। (Global Terrorism Index 2026)
भारत के लिए राहत भरी खबर
इस रिपोर्ट में भारत के लिए भी अच्छी खबर है। भारत इस सूची में 13वें स्थान पर है, जो पिछले साल से थोड़ा नीचे जरूर है, लेकिन इसके बावजूद देश में आतंकवादी घटनाओं में कमी आई है। सबसे अहम बात यह है कि भारत में आतंकवादी हमलों की संख्या में 43 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही आतंकवाद से होने वाली मौतों में भी कमी आई है, जो देश में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत होने का बड़ा संकेत है। (Global Terrorism Index 2026)
भारत में सुधार के पीछे क्या वजह
भारत में आतंकवाद में कमी के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे पहला कारण है सीमा पर सख्त निगरानी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था है। इसके अलावा खुफिया एजेंसियों का बेहतर तालमेल और समय पर कार्रवाई भी इसमें अहम भूमिका निभा रही है। सुरक्षा बलों ने अपनी रणनीति में भी बदलाव किया है और अब तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। इन सभी प्रयासों का असर यह हुआ है कि पिछले कुछ सालों में आतंकवाद की घटनाओं में लगातार कमी आई है।
रिपोर्ट में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक आतंकवादी मौतों में इसका हिस्सा बहुत कम है। दुनिया की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा भारत में रहता है, लेकिन आतंकवाद से होने वाली मौतों में इसका हिस्सा सिर्फ करीब 2 फीसदी है। यह इस बात का संकेत है कि इतने बड़े देश में भी आतंकवाद को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है।
हालांकि रिपोर्ट में सुधार के संकेत हैं, लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। दुनिया के कई हिस्सों में राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सीमा विवाद बढ़ रहे हैं। ये सभी कारक आतंकवाद को बढ़ावा दे सकते हैं। खासतौर पर दक्षिण एशिया में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की स्थिति भारत के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है। अगर क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है, तो उसका असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ सकता है। (Global Terrorism Index 2026)

