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Explainer Nimisha Priya: कौन हैं निमिषा प्रिया और क्यों हो रही है उनकी फांसी की सजा पर चर्चा? क्या ‘ब्लड मनी’ से बचेगी उनकी जान?

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📍नई दिल्ली | 31 Dec, 2024, 12:27 PM

Explainer Nimisha Priya: भारत ने मंगलवार को कहा कि वह यमन में मौत की सजा का सामना कर रही केरल की नर्स निमिषा प्रिया के मामले में सभी संभावित विकल्पों को तलाशने में हरसंभव मदद कर रहा है। निमिषा प्रिया पर एक यमनी नागरिक की हत्या का आरोप है और उन्हें इस मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, “हम यमन में निमिषा प्रिया को दी गई सजा से अवगत हैं। हमें जानकारी है कि प्रिया का परिवार इस मामले में प्रासंगिक विकल्पों की तलाश कर रहा है। हालांकि, उनकी जिंदगी एक अप्रत्याशित मोड़ लेगी, यह किसी ने सोचा नहीं था। निमिषा का नाम एक हत्या के मामले में आया, जिसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। आईए जानते हैं कौन हैं निमिषा प्रिया?

Explainer Nimisha Priya: Who is Nimisha Priya and Can 'Blood Money' Save Her?

Explainer Nimisha Priya: कौन हैं निमिषा प्रिया

दरअसल निमिषा प्रिया एक भारतीय नर्स हैं, जो केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोड की रहने वाली हैं। अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बेहतर जीवन जीने के सपने के साथ, वह 2008 में यमन चली गईं। भारत में नर्सों के लिए खाड़ी देशों में काम करना बेहतर वेतन और करियर ग्रोथ के लिए एक बड़ा मौका होता है। वहां उन्होंने हेल्थ सेक्टर में काम किया और वहां एक अच्छे करियर की शुरुआत की। निमिषा का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था; उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे, और उनके पति व बेटी 2014 में आर्थिक तंगी के चलते भारत लौट आए।

यमन में काम करने के दौरान, निमिषा ने कई अस्पतालों में नौकरी दी और 2015 में अपना खुद का क्लिनिक खोलने की योजना बनाई। इसके लिए उन्हें एक यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की मदद लेनी पड़ी, क्योंकि यमन के कानून के अनुसार केवल वहां के नागरिक ही क्लिनिक खोल सकते हैं।

यमन में शुरू किया खुद का क्लिनिक

2015 में, तलाल महदी ने निमिषा के साथ मिलकर क्लिनिक शुरू किया। हालांकि, इस साझेदारी में सब कुछ ठीक नहीं रहा और यह साझेदारी जल्द ही कड़वाहट में बदल गई। निमिषा के परिवार के अनुसार, निमिषा के परिवार का आरोप है कि महदी ने दस्तावेजों में हेरफेर कर क्लिनिक का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और निमिषा को उनका हिस्सा देने से इनकार कर दिया। उसने यह भी दावा किया कि निमिषा उसकी पत्नी हैं, और इसके लिए उसने निमिषा की शादी की तस्वीरों का गलत इस्तेमाल भी किया। तलाल ने निमिषा का पासपोर्ट भी जब्त कर लिया, जिससे वह यमन छोड़कर भारत नहीं आ सकीं।

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निमिषा की शिकायत पर पुलिस ने दिखाई बेरुखी

2017 में, दोनों के बीच कड़वाहट औऱ बढ़ गई। तलाल ने न केवल निमिषा के पैसे और गहने हड़प लिए, बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया। निमिषा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन यमन की पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। इसके उलट, उन्हें छह दिन तक जेल में रखा गया। जेल से लौटने के बाद, तलाल का उत्पीड़न और बढ़ गया।

पासपोर्ट पाने के लिए तलाल को खिलाई बेहोशी की दवा

तलाल से अपना पासपोर्ट वापस पाने की कोशिश में, निमिषा ने कथित तौर पर उसे बेहोशी की दवा दी। दुर्भाग्यवश, दवा की अधिक मात्रा के कारण तलाल की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद, निमिषा यमन से भागने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 2018 में उन्हें हत्या का दोषी ठहराया गया और 2020 में सना की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। निमिषा ने इसे आत्मरक्षा का कदम बताया, क्योंकि महदी ने उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया था और वह उन्हें लगातार परेशान कर रहा था। वहीं, महदी के परिवार ने निमिषा पर हत्या का आरोप लगाया। यमन पुलिस ने निमिषा को गिरफ्तार कर लिया, और उन्हें 2018 में हत्या का दोषी ठहराया गया।

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मौत की सजा और “ब्लड मनी”

2020 में, सना की अदालत ने निमिषा प्रिया को फांसी की सजा सुनाई। उनके परिवार और वकीलों ने अपील की, लेकिन नवंबर 2023 में यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने उनकी अपील खारिज कर दी। लेकिन “ब्लड मनी” (खून बहाने का मुआवजा) के जरिए माफी की संभावना खुली रखी। यमन की शरिया कानून व्यवस्था के तहत, यदि पीड़ित का परिवार मुआवजा स्वीकार कर ले, तो आरोपी की सजा माफ की जा सकती है।

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ब्लड मनी: अंतिम उम्मीद

यमन में ब्लड मनी एक प्राचीन प्रथा है, जिसे अरबी में “दीया” कहा जाता है। जहां आरोपी मृतक के परिवार को आर्थिक मुआवजा देकर माफी मांग सकता है। निमिषा का परिवार और समर्थक अब महदी के परिवार को ब्लड मनी के जरिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। मामले से जुड़े एक वकील का कहना है कि यदि महदी का परिवार ब्लड मनी स्वीकार कर लेता है, तो निमिषा की फांसी टल सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में समय और बड़ा धनराशि जुटाना एक बड़ी चुनौती है। निमिषा के परिवार ने ब्लड मनी के रूप में मुआवजा देने की पेशकश की है। इसके लिए उन्होंने करीब 70 लाख रुपये जुटाने की कोशिश शुरू की है।

भारत सरकार से मदद की गुहार

भारत सरकार इस मामले में सक्रिय है। विदेश मंत्रालय ने यमन सरकार के साथ संपर्क किया है। साथ ही, यमन स्थित भारतीय दूतावास निमिषा को कानूनी मदद उपलब्ध करा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने कहा, “सरकार इस मामले में हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। भारत सरकार ने निमिषा के मामले को गंभीरता से लिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार इस मामले में सभी संभव मदद कर रही है। यमन में भारतीय दूतावास निमिषा की कानूनी सहायता और अन्य विकल्पों पर काम कर रहा है।”

निमिषा के परिवार ने भी भारतीय नागरिकों और सरकार से मदद की अपील की है। उनकी मां ने कहा, “तलाल ने मेरी बेटी को झूठे कागजातों और बंदूक के दम पर प्रताड़ित किया। अगर उसे न्याय नहीं मिला, तो उसकी जान चली जाएगी।”

निमिषा की मां का कहना है कि उनकी बेटी ने अपनी जान बचाने के लिए यह कदम उठाया। वह कहती हैं, “महदी ने हमारी बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने हमारे परिवार को तोड़ने की कोशिश की और हमारी बेटी को बंदी बना रखा था।”

परिवार का दावा है कि निमिषा ने यमन पुलिस से शिकायत भी की थी, लेकिन महदी के प्रभाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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सोशल मीडिया पर अभियान

जब निमिषा प्रिया की कहानी भारत में आई, तो यह मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया। कई लोगों ने उनकी फांसी की सजा को लेकर सवाल उठाए। मानवाधिकार संगठनों और उनके परिवार ने उनकी रिहाई के लिए आवाज उठाई। सोशल मीडिया पर #SaveNimishaPriya नामक अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें लोगों से मुआवजे के लिए धन जुटाने की अपील की जा रही है। कई मानवाधिकार संगठनों ने भी निमिषा को माफी दिए जाने की मांग की है। केरल में कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से अपील की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे। लोगों का मानना है कि निमिषा के साथ न्याय होना चाहिए और उन्हें एक और मौका मिलना चाहिए।

क्या होगा आगे?

क्या निमिषा प्रिया अपनी फांसी की सजा से बच पाएंगी? यह सवाल आज भी अनुत्तरित है। निमिषा की सजा को लेकर अंतिम फैसला यमन सरकार और खालिद के परिवार की सहमति पर निर्भर करेगा। भारत सरकार और सामाजिक संगठन लगातार इस मामले पर नजर रख रहे हैं। निमिषा प्रिया का मामला सिर्फ एक कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर भी सवाल खड़ा करता है। यह घटना उन महिलाओं के लिए भी एक उदाहरण है, जो विदेशों में काम करते हुए मुश्किल परिस्थितियों का सामना करती हैं।

Explainer Nimisha Priya is currently a topic of discussion due to her sentencing to death. The article aims to shed light on who Nimisha Priya is and why she is facing capital punishment. Will her life be spared from ‘Blood Money’?

Author

  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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