📍नई दिल्ली | 21 Aug, 2025, 12:06 PM
General Level Mechanism: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत का सिलसिला पिछले कई सालों से जारी है। 19 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों चीन के विदेश मंत्री वांग यी और भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के बीच 24वीं वार्ता हुई। इस दौरान दोनों देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखने, व्यापार बढ़ाने और आपसी विश्वास को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। लेकिन इस बार 24वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के बाद जो सहमति सामने आई है, वह पहले से अलग और महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में पहली बार भारत और चीन ने पूर्वी और मध्य सेक्टर में भी “जनरल लेवल मैकेनिज्म” (General Level Mechanism) बनाने का फैसला लिया है। लेकिन यह मैकेनिज्म क्या है? यह पहले से मौजूद SHMC और WMCC से कैसे अलग है? आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।
क्या है General Level Mechanism
दरअसल यह मैकेनिज्म (General Level Mechanism) सैन्य स्तर पर होने वाली कोर कमांडर स्तर की बैठकें हैं। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद जब एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी, तब पहली बार कोर कमांडर स्तर पर बैठकों का सिलसिला शुरू किया गया। इसका मकसद यह था कि दोनों देशों की सेनाओं के सीनियर अफसर सीधे बातचीत कर सकें और किसी भी विवाद या गतिरोध को बातचीत से सुलझाने का रास्ता निकाल सकें। 2020 में गलवान के बाद दोनों देशों ने फैसला किया कि छोटे स्तर के अधिकारियों की बजाय कोर कमांडर स्तर पर बातचीत होगी ताकि बड़े विवादों को जल्दी सुलझाया जा सके। भारतीय सेना की 14वीं कोर, जो पूर्वी लद्दाख की जिम्मेदारी देखती है, इस मैकेनिज्म का हिस्सा रही है।
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— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 20, 2025
अब यह व्यवस्था सिर्फ पश्चिमी सेक्टर यानी लद्दाख तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के इलाकों में भी लागू होगी। इसका मतलब यह है कि भविष्य में अगर किसी भी तरह की टकराव की स्थिति पूर्वी या मध्य सेक्टर में पैदा होती है, तो उसे भी कोर कमांडर स्तर पर सुलझाने की कोशिश होगी।
कहां-कहां है तनाव और क्या है मौजूदा स्थिति
भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर विवाद तीन प्रमुख इलाकों पश्चिमी, मध्य, और पूर्वी में फैला है। इन इलाकों में दोनों देशों की अलग-अलग दावेदारी और एलएसी की अस्पष्ट के चलते बार-बार तनाव पैदा होता है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का आधार एलएसी है, जो दोनों देशों के बीच एक अस्थायी सीमा रेखा है। इस रेखा की कोई औपचारिक परिभाषा नहीं है, और दोनों देश इसे अलग-अलग नजरिए से देखते हैं। इसी के चलते दोनों देशों के सैनिकों की गश्त के दौरान टकराव आम है। एलएसी को तीन क्षेत्रों में बांटा गया है, पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख और अक्साई चिन), मध्य क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड), और पूर्वी क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश)।
पश्चिमी क्षेत्र, यानी लद्दाख और अक्साई चिन, इस विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। भारत का दावा है कि 1865 में बनाई गई जॉनसन लाइन के अनुसार अक्साई चिन लद्दाख का हिस्सा है। यह इलाका करीब 38,000 वर्ग किलोमीटर का है और भारत इसे अपना मानता है। दूसरी ओर, चीन 1899 की मैकार्टनी-मैकडोनाल्ड लाइन को मानता है, जिसके अनुसार अक्साई चिन उसके शिनजियांग प्रांत का हिस्सा है। हकीकत यह है कि 1950 के दशक से अक्साई चिन पर चीन का नियंत्रण है। उसने यहां G219 राजमार्ग बनाया, जो उसके शिनजियांग और तिब्बत क्षेत्र को जोड़ता है।
मध्य क्षेत्र, यानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सीमा विवाद अपेक्षाकृत कम है। यह एलएसी का सबसे छोटा हिस्सा है, जहां बाराहोती और नेलांग घाटी को लेकर विवाद है। इन इलाकों पर भारत का नियंत्रण है, लेकिन दोनों देशों की सेनाएं समय-समय पर गश्त करती हैं। इस क्षेत्र में तनाव लद्दाख या अरुणाचल की तुलना में कम हैं। फिर भी, छोटे-मोटे विवादों को सुलझाने के लिए स्थानीय स्तर पर बातचीत होती रहती है।
पूर्वी क्षेत्र, यानी अरुणाचल प्रदेश की बात करें, तो यहां लद्दाख के बाद सबसे ज्यादा तनाव है। भारत 1914 की शिमला संधि में बनी मैकमोहन लाइन को मान्यता देता है, जिसके अनुसार अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है। यह क्षेत्र करीब 90,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है और भारत इसे अपना पूर्ण राज्य मानता है। लेकिन चीन इस रेखा को “साम्राज्यवादी” बताकर खारिज करता है और अरुणाचल को “दक्षिण तिब्बत” के रूप में दावा करता है। यहां दोनों देशों की सेनाएं गश्त करती हैं, और कई बार टकराव की स्थिति बनती है। अरुणाचल में भारत ने सैन्य और बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है, जबकि चीन ने भी अपनी तरफ सैन्य ठिकानों और सड़कों का जाल बिछाया है।

क्या है SHMC?
भारत-चीन सीमा विवाद को सुलझाने के लिए पहले से दो सिस्टम काम कर रहे हैं। पहला है SHMC यानी सीनियर हाईएस्ट मिलिट्री कमांडर लेवल मीटिंग, जिसे साधारण भाषा में कोर कमांडर स्तर की बैठक कहा जाता है। यह व्यवस्था 2020 में गलवान झड़प के बाद शुरू हुई थी। 2020 से पहले एलएसी पर विवाद सुलझाने के लिए कर्नल या ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी बातचीत करते थे। लेकिन गलवान के बाद यह साफ हो गया कि बड़े विवादों को सुलझाने के लिए उच्च स्तर की बातचीत जरूरी है। इसलिए SHMC बनाया गया, जिसमें कोर कमांडर शामिल होते हैं। नया जनरल लेवल मैकेनिज्म SHMC का ही विस्तार है, लेकिन अब इसे पूरे LAC पर लागू किया जाएगा, न कि सिर्फ पूर्वी लद्दाख में।
WMCC के बारे में जानें?
वहीं, WMCC यानी मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन ऑन इंडिया-चाइना बॉर्डर अफेयर्स। यह एक डिप्लोमैटिक-मिलिट्री स्ट्रक्चर है, जिसमें दोनों देशों के विदेश मंत्रालय और सेना के अधिकारी शामिल होते हैं। WMCC की शुरुआत 2012 में हुई थी और इसका मकसद सीमा प्रबंधन के लिए नियमित संवाद बनाए रखना है। 1960 में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश हुईं, लेकिन बातचीत नाकाम रही। 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चीन यात्रा के बाद जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाया गया। 1993 और 1996 में एलएसी पर शांति बनाए रखने के लिए समझौते हुए। 2003 में स्पेशल रिप्रजेंटेटिव सिस्टम शुरू हुआ, और 2005 में सीमा विवाद के हल के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों पर दस्तखत हुए। 2012 में WMCC बनाया गया, जो डिप्लोमैटिक लेवल पर बॉर्ड मैनेजमेंट का काम करता है। WMCC में सीमा से जुड़े बड़े नीतिगत फैसले लिए जाते हैं, जैसे कि तनाव कम करने की रणनीति बनाना या सीमा पर व्यापार और सहयोग बढ़ाने के तरीके तलाशना।
24वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता में WMCC के तहत दो नए समूह बनाने का फैसला हुआ। पहला है एक्सपर्ट ग्रुप, जो सीमा पर परिसीमन यानी बॉर्डर डिलिमिटेशन की संभावनाओं पर काम करेगा। दूसरा है वर्किंग ग्रुप, जो बॉर्डर मैनेजमेंट को और प्रभावी बनाने के लिए रणनीतियां तैयार करेगा। ये दोनों समूह WMCC के तहत काम करेंगे और डिप्लोमैटिक लेवल पर सीमा विवाद को सुलझाने में मदद करेंगे।
क्या SHMC का विस्तार है General Level Mechanism
हालांकि यह बात सही कि इतने मैकेनिज्म होने के बावजूद अभी तक एलएसी का कोई अंतिम परिसीमन या सीमा निर्धारण नहीं हुआ है। लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और चीन के बीच यह नया जनरल लेवल मैकेनिज्म (General Level Mechanism) एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है। सही मायने में कहा जाए तो जनरल लेवल मैकेनिज्म (General Level Mechanism) दरअसल SHMC का ही विस्तार है, जो मिलिट्री लेवल पर काम करता है, और अब इसे पूर्वी और मध्य सेक्टर तक विस्तारित किया जा रहा है। यह न सिर्फ सैन्य अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत को बढ़ाएगा, बल्कि इससे तनावपूर्ण स्थितियों का समाधान तेजी से निकाला जा सकेगा। जबकि WMCC डिप्लोमैटिक लेवल स्तर पर सीमा विवाद को सुलझाने का काम करता है। दोनों सिस्टम एक-दूसरे के पूरक हैं और मिलकर सीमा पर तनाव कम करने में मदद करेंगे।
बता दें कि सिक्किम में भारतीय सेना की जिम्मेदारी 33 कोर के पास है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में 3 कोर और 4 कोर तैनात हैं। इन दोनों सेक्टरों में जनरल-लेवल मैकेनिज्म का उद्देश्य यह है कि अगर सीमा पर कोई विवाद पैदा होता है और वह जूनियर अफसरों की बातचीत से हल नहीं हो पाता, तो उसे कोर कमांडर स्तर की बातचीत में सुलझाने की कोशिश की जाए। पूर्वी लद्दाख के अनुभवों से यह साफ हुआ है कि सीनियर मिलिट्री कमांडर स्तर की वार्ताओं ने ही गतिरोध कम करने का रास्ता बनाया। यही वजह है कि भारत और चीन दोनों के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स ने जनरल लेवल मैकेनिज्म को लेकर सहमति जताई।
वार्ता में बनी और भी सहमतियां
19 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में हुई स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव स्तर की इस बैठक में दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन और सीमा विवाद को लेकर कुल दस बिंदुओं पर सहमति जताई। जिसमें तीन पारंपरिक व्यापारिक बाजारों को फिर से खोलने का फैसला हुआ। ये बाजार हैं रेनक्विंगगांग-चांगगु, पुलान-गुंजी और जिउबा-नामग्या। ये ट्रेडिंग पॉइंट्स एलएसी के पास हैं और इनके खुलने से दोनों देशों के बीच व्यापार और आपसी संपर्क बढ़ेगा। साथ ही, दोनों देशों ने सीधी उड़ान सेवाएं शुरू करने और पर्यटकों, कारोबारियों और मीडिया के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर सहमति जताई। वहीं, खास बात यह रही कि विशेष प्रतिनिधि वार्ता में दोनों देशों ने 2026 में चीन में 25वें दौर की वार्ता आयोजित करने पर भी सहमति जताई।
सीमा पार नदियों पर सहयोग भी एक अहम मुद्दा रहा। भारत ने यार्लंग त्सांगपो यानी ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन द्वारा बनाए जा रहे विशाल बांध को लेकर चिंता जताई। इस बांध का असर भारत के निचले तटवर्ती राज्यों पर पड़ सकता है। चीन ने आपात स्थिति में हाइड्रोलॉजिकल डाटा साझा करने का वादा किया, जो मानवीय आधार पर लिया गया फैसला है। दोनों देशों ने इस मुद्दे पर पहले से मौजूद एक्सपर्ट लेवल सिस्टम को और मजबूत करने का फैसला किया।
वहीं, आतंकवाद का मुद्दा भी इस बैठक में उठा। भारत ने सीमा पार आतंकवाद सहित हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का एक मूल उद्देश्य आतंकवाद से लड़ना है। भारत ने चीन से इस दिशा में और सहयोग की उम्मीद जताई।