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AMCA प्रोजेक्ट से बाहर कर क्या सरकार तोड़ रही HAL का दबदबा, कैसे एक नियम ने बदली 5th जेनरेशन फाइटर की कहानी

अब तक न तो रक्षा मंत्रालय, न ही डीआरडीओ या एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) की तरफ से एचएएल के बाहर होने का कोई औपचारिक एलान किया है...

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📍नई दिल्ली | 4 Feb, 2026, 4:57 PM

HAL AMCA disqualification: बुधवार का दिन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के लिए आसान नहीं रहा। ट्रेडिंग सेशन के दौरान एचएएल के शेयर करीब 8 फीसदी तक टूट गए और दिन के निचले स्तर 4100.15 रुपये तक पहुंच गए। यह गिरावट उस वक्त देखने को मिली, जब बाजार में यह खबर तेजी से फैली कि एचएएल को भारत के सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा प्रोजेक्ट पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट एएमसीए की रेस से बाहर कर दिया गया है।

शेयर बाजार खुलते ही एचएएल का स्टॉक 4220 रुपये पर ओपन हुआ था, जो पिछले बंद भाव 4470 रुपये से काफी नीचे था। शुरुआती कुछ मिनटों में ही बिकवाली का दबाव बढ़ गया और शेयर फिसलते-फिसलते दिन के लो तक पहुंच गया। निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि एएमसीए प्रोजेक्ट से बाहर होने की खबरें ही इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह हैं। (HAL AMCA disqualification)

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम बात यह भी है कि अब तक न तो रक्षा मंत्रालय, न ही डीआरडीओ या एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) की तरफ से एचएएल के बाहर होने का कोई औपचारिक एलान किया गया है। खुद एचएएल ने भी साफ कहा है कि उसे इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। (HAL AMCA disqualification)

HAL AMCA disqualification: क्या है एचएएल का आधिकारिक स्टैंड?

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए प्रोग्राम को लेकर मीडिया में चल रही खबरों पर एचएएल ने अपनी बात रखी है। कंपनी का कहना है कि उसे इस संबंध में अभी तक कोई भी आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में मौजूदा समय में इन मीडिया रिपोर्ट्स पर कोई टिप्पणी करना संभव नहीं है। एचएएल ने यह भी कहा है कि जैसे ही कोई आधिकारिक जानकारी मिलेगी, वह सभी संबंधित पक्षों को पूरी तरह अवगत कराएगी।

एचएएल ने दोहराया है कि उसके पास इस समय मजबूत और पक्का ऑर्डर बुक मौजूद है, जिससे कंपनी की आय को लेकर स्पष्टता बनी हुई है। इसके साथ ही एचएएल का प्रोडक्शन और एक्जीक्यूशन प्लान 2032 तक मजबूत स्थिति में है।

कंपनी एक साथ कई रणनीतिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। इनमें इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर (आईएमआरएच), एलसीए मार्क-2 और कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (कैट्स) जैसे अहम प्रोग्राम शामिल हैं। ये सभी प्रोजेक्ट एचएएल की तकनीकी क्षमता को और मजबूत करेंगे और लंबे समय में कंपनी के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। इन प्रोग्राम्स के 2032 के बाद प्रोडक्शन में आने की उम्मीद है। (HAL AMCA disqualification)

इसके अलावा, एचएएल सिविल एविएशन सेक्टर में भी अपने काम का दायरा बढ़ा रही है। ध्रुव एनजी, हिंदुस्तान 228 और एसजे-100 जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए कंपनी भविष्य में अपनी आय बढ़ाने और स्थायी विकास सुनिश्चित करने पर काम कर रही है।

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एचएएल का कहना है कि कंपनी की आर्थिक स्थिति मजबूत है और वह लगातार बेहतर प्रदर्शन के जरिए हर साल स्थिर और टिकाऊ ग्रोथ हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। (HAL AMCA disqualification)

आखिर एएमसीए है क्या, जिसे लेकर इतना बड़ा हंगामा?

एएमसीए यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भारत का फिफ्थ-जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है। यह वही प्लेटफॉर्म है, जिसे भविष्य में भारतीय वायुसेना की एयर डॉमिनेंस की रीढ़ माना जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट को एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी लीड कर रही है, जो डीआरडीओ के तहत काम करती है। एएमसीए को पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें स्टेल्थ शेपिंग, इंटरनल वेपन बे, एडवांस्ड एवियोनिक्स, सेंसर फ्यूजन और सुपरक्रूज जैसी क्षमताएं होंगी।

सरल शब्दों में कहें तो यह प्रोजेक्ट भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करने वाला है, जो खुद का फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर बना सकते हैं। (HAL AMCA disqualification)

एचएएल से सबको क्यों थी उम्मीद?

एचएएल दशकों से भारत की सबसे बड़ी और सबसे भरोसेमंद एयरोस्पेस कंपनी मानी जाती रही है। तेजस एलसीए, सुखोई-30 एमकेआई, ध्रुव हेलीकॉप्टर, प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर जैसे प्लेटफॉर्म एचएएल ही बना रही है।

ऐसे में आम धारणा यही थी कि एएमसीए जैसे बड़े और टेक्निकली तौर पर अहम प्रोजेक्ट में एचएएल की भूमिका सबसे अहम होगी। यही वजह है कि जब एचएएल के बाहर होने की खबरें सामने आईं, तो बाजार और डिफेंस सर्कल दोनों चौंक गए। (HAL AMCA disqualification)

एएमसीए की बिडिंग प्रोसेस कैसे शुरू हुई?

एएमसीए के लिए सरकार ने इस बार एक नया रास्ता चुना। पहले जहां ऐसे बड़े एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट लगभग पूरी तरह एचएएल के भरोसे रहते थे, वहीं इस बार प्राइवेट सेक्टर को भी बराबरी का मौका दिया गया।

इसके तहत एडीए ने साल 2025 में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया। इसका मकसद यह था कि प्रोटोटाइप डेवलपमेंट के लिए ऐसी कंपनियां या कंसोर्टियम चुने जाएं, जो तकनीकी रूप से सक्षम हों, आर्थिक रूप से मजबूत हों और समय पर डिलीवरी कर सकें।

इस प्रक्रिया में कुल 7 कंसोर्टियम मैदान में उतरे, जिनमें सरकारी और निजी दोनों तरह की कंपनियां शामिल थीं। (HAL AMCA disqualification)

वह एक शर्त, जिसने रोक दी एचएएल की राह

इस पूरी कहानी का सबसे अहम हिस्सा है ईओआई में रखी गई एक खास शर्त। इस शर्त के मुताबिक, किसी भी कंपनी का ऑर्डर बुक उसकी सालाना टर्नओवर से तीन गुना से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

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अगर किसी कंपनी का पेंडिंग ऑर्डर इस सीमा से ज्यादा निकलता है, तो उस पैरामीटर में उसे जीरो मार्क्स दिए जाते हैं। यह नियम पहले से दस्तावेज में लिखा हुआ था, लेकिन इसका असर अब जाकर सबके सामने आया।

इन सभी बिड्स का मूल्यांकन केवल नाम या पुराने अनुभव के आधार पर नहीं किया गया, बल्कि इसके लिए एक विस्तृत और सख्त इवैल्यूएशन फ्रेमवर्क अपनाया गया। कंपनियों को उनकी टेक्निकल कैपेबिलिटी, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी, एयरोस्पेस प्रोजेक्ट्स का अनुभव और सबसे अहम, ऑर्डर बुक बनाम टर्नओवर रेशियो जैसे मानकों पर परखा गया। (HAL AMCA disqualification)

एचएएल इस शर्त पर क्यों फेल हुई?

एचएएल की वित्तीय स्थिति मजबूत है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन समस्या यहीं से शुरू होती है। एचएएल की सालाना टर्नओवर करीब 30,000 करोड़ रुपये के आसपास है, जबकि उसकी कुल ऑर्डर बुक 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जाती है। इसका मतलब यह हुआ कि एचएएल के पास उसकी कमाई के मुकाबले लगभग आठ गुना ज्यादा काम पहले से ही लाइन में लगा है।

ईओआई की शर्तों के हिसाब से यह अनुपात तय सीमा से काफी ज्यादा था। नतीजा यह हुआ कि एचएएल को इस अहम फाइनेंशियल पैरामीटर में पूरे अंक नहीं मिल पाए, और कुल स्कोर में वह शॉर्टलिस्ट होने से चूक गई।

इस ईओआई के जवाब में कुल सात कंसोर्टियम सामने आए, जिनमें हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टूब्रो, अदानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स और ब्रह्मोस एयरोस्पेस जैसे बड़े नाम शामिल थे। (HAL AMCA disqualification)

सरकार ने ऐसा नियम क्यों रखा?

यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। सरकार और एडीए की सोच साफ मानी जा रही है। एएमसीए जैसे क्रिटिकल प्रोजेक्ट में देरी की कोई गुंजाइश नहीं है। एचएएल के पास पहले से तेजस मार्क-1ए, प्रचंड, सुखोई अपग्रेड, टीईडीबीएफ यानी ट्विन इंजन टेक बेस्ड फाइटर और कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। इन सबकी डिलीवरी टाइमलाइन पहले ही खिंची हुई है। सरकार नहीं चाहती थी कि ज्यादा वर्कलोड के कारण एएमसीए भी उसी रास्ते पर चला जाए।

इसलिए ऐसी कंपनी को प्राथमिकता दी गई, जिसके पास बैलेंस्ड वर्कलोड हो और जो नए प्रोजेक्ट को पूरी फोकस के साथ आगे बढ़ा सके। (HAL AMCA disqualification)

क्या तेजस की देरी ने भी भूमिका निभाई?

आधिकारिक तौर पर ऐसा कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन डिफेंस सर्कल में यह चर्चा जरूर है कि तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी में हुई देरी, इंजन सप्लाई से जुड़ी समस्याएं और प्रोडक्शन स्लो होने जैसी बातें बैकग्राउंड में असर डाल सकती हैं।

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हालांकि यह साफ है कि मुख्य वजह वही ऑर्डर बुक बनाम टर्नओवर वाला नियम रहा, न कि कोई अचानक लिया गया फैसला। (HAL AMCA disqualification)

एचएएल पूरी तरह बाहर हुई या नहीं?

यहां एक जरूरी क्लैरिटी समझनी होगी। एचएएल को पूरी तरह एएमसीए से बाहर नहीं किया गया है। अभी बात सिर्फ प्रोटोटाइप डेवलपमेंट फेज की है, जिसकी लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा मानी जा रही है।

भविष्य में जब प्रोटोटाइप्स के बाद, 2034-2035 से एएमसीए का फुल सीरियल प्रोडक्शन शुरू होगा, तब एचएएल की भूमिका फिर से सामने आ सकती है। एचएएल पहले से एएमसीए के डिजाइन और स्ट्रक्चर से जुड़े कुछ कामों में शामिल रही है। (HAL AMCA disqualification)

प्राइवेट सेक्टर की एंट्री से क्या बदलेगा?

एएमसीए प्रोजेक्ट में प्राइवेट सेक्टर की बड़ी एंट्री सरकार की उस नीति को दिखाती है, जिसमें डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को एचएएल के मोनोपॉली से बाहर निकालकर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना है। इससे एक तरफ जहां स्पीड और इनोवेशन बढ़ने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ यह भी सच है कि भारत में फाइटर जेट बनाने का सबसे ज्यादा अनुभव अभी भी एचएएल के पास ही है। यही वजह है कि कुछ एक्सपर्ट्स इस फैसले को रिस्की भी मान रहे हैं। (HAL AMCA disqualification)

एएमसीए की आगे की टाइमलाइन क्या है?

सूत्रों के मुताबिक एएमसीए के लिए तीन कंसोर्टियम को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स एक स्वतंत्र दावेदार के तौर पर सामने आई, जबकि लार्सन एंड टूब्रो ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ मिलकर जगह बनाई। तीसरा शॉर्टलिस्टेड समूह कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स के नेतृत्व में बना कंसोर्टियम था, जिसमें बीईएमएल और दाता पैटर्न्स शामिल थे।

मौजूदा योजना के मुताबिक, शॉर्टलिस्ट किए गए कंसोर्टियम को जल्द ही अप्रैल 2026 तक आरएफपी जारी किया जाएगा। इसके बाद फाइनल सेलेक्शन फाइनल सेलेक्शन जून-जुलाई 2026 में होगा और पांच प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे।

पहला प्रोटोटाइप 2028-29 के आसपास रोल-आउट हो सकता है, जबकि पहली उड़ान 2029 में देखने को मिल सकती है। इंडक्शन का लक्ष्य 2035 के आसपास रखा गया है। (HAL AMCA disqualification)

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  • AMCA प्रोजेक्ट से बाहर कर क्या सरकार तोड़ रही HAL का दबदबा, कैसे एक नियम ने बदली 5th जेनरेशन फाइटर की कहानी

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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