📍नई दिल्ली | 23 Oct, 2026, 10:03 PM
Indian Army Land Warfare Doctrine 2026: भारतीय सेना ने बदलते युद्ध के तौर-तरीकों को ध्यान में रखते हुए नई लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन 2026 जारी की है। नए डॉक्ट्रिन में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सटीक हमले, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सिक्योर कम्युनिकेशन और अलग-अलग सैन्य क्षेत्रों के बीच तालमेल पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को ऐसे युद्धों के लिए तैयार करना है, जिनमें तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। साथ ही, इसमें सैनिकों के नेतृत्व, सैन्य रसद और आत्मनिर्भरता को भी अहम स्थान दिया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में सेना के कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन इस डॉक्ट्रिन को जारी किया। इसमें रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान-अमेरिका संघर्ष और मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक को शामिल किया गया है।
Indian Army Land Warfare Doctrine 2026: क्या होती है लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन?
लैंड वॉरफेयर Docktrin सेना की एक कॉम्प्रिहेंसिव मिलिट्री गाइड होती है। इसमें बताया जाता है कि बदलते सुरक्षा माहौल में सेना को युद्ध की तैयारी कैसे करनी चाहिए, सैन्य अभियानों की योजना किस तरह बनानी चाहिए और अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी ताकत का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए।
डॉक्ट्रिन में दुश्मन की क्षमताओं, युद्ध क्षेत्र की परिस्थितियों, तकनीक, सैनिकों की भूमिका और सैन्य संसाधनों के इस्तेमाल जैसे विषय शामिल होते हैं।
भारतीय सेना की पिछली लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन दिसंबर 2018 में जारी की गई थी। इससे पहले अप्रैल 2017 में तीनों सेनाओं की जॉइंट संयुक्त डॉक्ट्रिन जारी की गई थी। लेकिन पिछले कुछ सालों जैसे बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर और सीमा पर सैन्य हालात में हुए बदलावों ने नई रणनीतिक समीक्षा की जरूरत पैदा की है।

20 से 30 सालों को ध्यान में रखकर तैयार हो रणनीति
नया डॉक्ट्रिन सेना के Commanders Conference के अंतिम दिन जारी किया गया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के शीर्ष अधिकारियों से कहा कि उन्हें अगले 20 से 30 सालों को ध्यान में रखकर सैन्य रणनीति तैयार करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने तत्काल और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए भी तैयार रहने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि रणनीति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें बदलते हालात के मुताबिक जरूरी बदलाव किए जा सकें। उनके मुताबिक, हवाई, समुद्री, अंतरिक्ष और साइबर युद्ध का महत्व बढ़ने के बावजूद जमीन पर लड़ने वाली सेनाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
नए डॉक्ट्रिन में एक तरफ जहां आधुनिक तकनीक को अपनाने पर जोर है, तो दूसरी तरफ सैनिकों की भूमिका, नेतृत्व और जमीन पर सैन्य कार्रवाई की जरूरत को भी प्रमुख जगह दी गई है। (Indian Army Land Warfare Doctrine 2026)
ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक शामिल
मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना के लिए आधुनिक युद्ध का एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा।
ऑपरेशन के शुरुआती हमलों में नौ आतंकी ठिकानों में से सात को निशाना बनाने की जिम्मेदारी सेना को दी गई थी। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना की आर्टिलरी ने एम-777 से XCaliber प्रिसिजन-गाइडेड गोला-बारूद और वॉरमेट लॉइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल किया था।
प्रिसिजन-गाइडेड गोला-बारूद ने तय टारगेट पर सटीकता के साथ हमला किया था। इससे टारगेट के आसपास जानमाल होने वाले नुकसान को कम करने और सीमित समय में सैन्य उद्देश्य हासिल करने में मदद मिली थी।
ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना की एयर डिफेंस यूनिट्स ने पाकिस्तानी ड्रोन और अन्य हवाई खतरों का मुकाबला करने में भी भूमिका निभाई।
इस अनुभव ने दिखाया कि आधुनिक युद्ध में केवल सैनिकों और पारंपरिक हथियारों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं है। दुश्मन की निगरानी करना, समय पर खतरे की पहचान करना, सटीक हथियारों का इस्तेमाल करना और अलग-अलग मिलिट्री युनिट्स के बीच तालमेल बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। (Indian Army Land Warfare Doctrine 2026)
ड्रोन और एआई बनेंगे सैन्य तैयारी का हिस्सा
नई डॉक्ट्रिन में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष जोर दिया गया है। आधुनिक युद्धों में ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने, टारगेट की पहचान और हमले के लिए किया जा रहा है।
भारतीय सेना भी ड्रोन ऑपरेशन को ज्यादा कॉम्प्रिहेंसिव बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए ऐसा ट्रेनिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें ड्रोन चलाना केवल कुछ विशेषज्ञ सैनिकों तक सीमित न रहे, बल्कि सेना के अलग-अलग हिस्सों में इसे एक अतिरिक्त स्किल के तौर पर विकसित किया जाए।
सेना ड्रोन ऑपरेशन को लेकर नई ट्रेनिंग फिलॉसफी पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य सैनिकों को ड्रोन के इस्तेमाल, निगरानी और उनसे मिलने वाली जानकारी के आधार पर कार्रवाई करने में सक्षम बनाना है।
इसके साथ ही अधिकारियों के लिए एआई स्किल डेवलपमेंट का तीन-स्तरीय कार्यक्रम भी तैयार किया जा रहा है। इसमें अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उपयोगिता और सैन्य कामकाज में इसके इस्तेमाल की जानकारी देने पर जोर है।
एआई और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण करने, संभावित खतरों को समझने और निर्णय लेने में मदद के लिए किया जा सकता है। (Indian Army Land Warfare Doctrine 2026)
मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस पर फोकस
नए डॉक्ट्रिन में Multi-Domain Operations को भी शामिल किया गया है। पारंपरिक मिलिट्री ऑपरेशंस में जमीन, हवा और समुद्र पर होने वाली कार्रवाई को शामिल किया जाता है। लेकिन आधुनिक युद्ध में साइबर नेटवर्क, स्पेस बेस्ड सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और अनमैन्ड सिस्टम भी ऑपरेशन के लिए जरूरी होते हैं।
मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस में इन सभी क्षेत्रों से मिलने वाली क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, निगरानी सिस्टम से मिली जानकारी के आधार पर जमीन पर तैनात सैनिक किसी खतरे की पहचान कर सकते हैं, जबकि दूसरे सैन्य साधन उस जानकारी के आधार पर कार्रवाई में मदद कर सकते हैं।
भारतीय सेना इसके लिए पांच साल का मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस ट्रेनिंग रोडमैप तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य अलग-अलग मिलिट्री युनिट्स के बीच तालमेल बढ़ाना और कमांडरों को बदलते हालात में तुरंत फैसले लेने के लिए तैयार करना है।
यह पहल तीनों सेनाओं के बीच जॉइंटनेस बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा भी है। भारत में इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड बनाने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है। इन कमांड्स का उद्देश्य जरूरत के मुताबिक सेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं को इंटीग्रेट ऑपरेशनल लीडरशिप के तहत लाना है। (Indian Army Land Warfare Doctrine 2026)

सेना की नई यूनिट्स में ड्रोन और सटीक हमलों पर जोर
भारतीय सेना अपनी मौजूदा फॉर्मेशंस में भी बदलाव कर रही है, ताकि ड्रोन, निगरानी और सटीक हमले की क्षमताएं अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों के ज्यादा करीब पहुंच सकें।
इस बदलाव के तहत आर्मर्ड यूनिट्स के लिए शौर्य स्क्वॉड्रन, इन्फैंट्री बटालियनों में अश्नि प्लाटून और आर्टिलरी के लिए शक्तिबाण रेजिमेंट तथा दिव्यास्त्र बैटरियों जैसी फॉर्मेशंस पर काम किया जा रहा है।
इन पहलों का उद्देश्य सैनिकों को युद्ध क्षेत्र की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना और खतरे की पहचान से लेकर कार्रवाई तक लगने वाले समय को कम करना है।
टैंक और आर्मर्ड व्हीकल्स के साथ काम करने वाली यूनिट्स के लिए ड्रोन निगरानी उपयोगी हो सकती है, जबकि इन्फैंट्री के लिए छोटे ड्रोन दुश्मन की गतिविधियों को समझने में मदद कर सकते हैं। आर्टिलरी में टारगेट की सटीक जानकारी से गोला-बारूद के इस्तेमाल को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। (Indian Army Land Warfare Doctrine 2026)
रूस-यूक्रेन युद्ध ने बदली सैन्य सोच
रूस-यूक्रेन युद्ध ने दिखाया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और लगातार निगरानी की कितनी बड़ी भूमिका है। युद्ध क्षेत्र में सैनिकों और सैन्य उपकरणों की गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता बढ़ने से छिपकर आगे बढ़ना और संचार बनाए रखना अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
नए डॉक्ट्रिन में इन अनुभवों के साथ ईरान-अमेरिका संघर्ष से मिले सबक को भी ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा, लद्दाख में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लंबे समय से जारी सैन्य गतिरोध ने भारतीय सेना की तैयारी को प्रभावित किया है।
भारत को उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखकर अपनी क्षमताओं का विकास करना पड़ता है। चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग भी भारत की सैन्य योजना के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।
इसी वजह से नई डॉक्ट्रिन में केवल पारंपरिक जमीनी युद्ध की तैयारी नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माहौल में काम करने की क्षमता पर भी जोर दिया गया है। (Indian Army Land Warfare Doctrine 2026)
सिक्योर कम्युनिकेशन और मजबूत लॉजिस्टिक्स की भूमिका
आधुनिक युद्ध में दुश्मन के कम्युनिकेशन नेटवर्क को बाधित करने और अपने कम्युनिकेशन सिस्टम को प्रभावित होने से बचाने की कोशिश की जाती है। ऐसे माहौल में सुरक्षित और भरोसेमंद कम्युनिकेशन सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण होता है।
नई डॉक्ट्रिन में विवादित या बाधित तकनीकी वातावरण में भी प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता पर जोर दिया गया है। इसमें सैनिकों और कमांडरों को ऐसे हालात परिस्थितियों के लिए तैयार रहना होगा, जहां कम्युनिकेशन सिस्टम या डिजिटल सिस्टम सामान्य रूप से काम न कर रहे हों।
इसके साथ ही सैन्य रसद यानी लॉजिस्टिक्स को मजबूत बनाए रखने पर भी ध्यान दिया गया है। इसमें सैनिकों तक हथियार, गोला-बारूद, ईंधन, भोजन, चिकित्सा सहायता और अन्य जरूरी सामान पहुंचाना शामिल है।
लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियान में लॉजिस्टिक्स का मजबूत होना जरूरी है। कठिन भौगोलिक इलाकोंमें तैनात सैनिकों के लिए समय पर सप्लाई और कम्युनिकेशन बाधित होने पर भी काम जारी रखना विशेष महत्व रखता है। (Indian Army Land Warfare Doctrine 2026)
आत्मनिर्भर भारत और होल नेशन अप्रोच
नए लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन में आत्मनिर्भरता और पूरे देश के स्तर पर कॉर्डिनेशन को भी महत्वपूर्ण जगह दी गई है। इसमें स्वदेशी रक्षा तकनीक, राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे और सेना के बाहर मौजूद संस्थानों के साथ तालमेल की जरूरत पर जोर है।
आत्मनिर्भरता का उद्देश्य रक्षा उपकरणों और तकनीक के लिए विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम करना तथा देश के भीतर डिजाइन, विकास और उत्पादन की क्षमता बढ़ाना है। नई डॉक्ट्रिन में राष्ट्रीय संसाधनों और सैन्य जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है। (Indian Army Land Warfare Doctrine 2026)
डिफेंस फोर्सेज विजन 2047 से जुड़ी डॉक्ट्रिन
नया डॉक्ट्रिन डिफेंस फोर्सेज विजन 2047 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को तकनीक का इस्तेमाल करने वाली, हालात के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम और अलग-अलग तरह के संघर्षों के लिए तैयार फोर्स के रूप में तैयार करना है।
इसमें आधुनिक हथियारों और तकनीक के साथ ह्यूमन लीडरशिप को भी महत्वपूर्ण माना गया है। सेना के कमांडरों को खतरे, इलाके और मिशन की जरूरत के अनुसार ऑपरेशनल तरीके बदलने की स्वतंत्रता देने पर जोर है। (Indian Army Land Warfare Doctrine 2026)
Author
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Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.


