📍नई दिल्ली | 22 Oct, 2026, 8:41 PM
Defence Companies Blacklisted: रक्षा मंत्रालय ने 19 अक्टूबर को रक्षा कारोबार में प्रतिबंधित कंपनियों की नई लिस्ट जारी की है। इसमें कुल 22 कंपनियों के नाम शामिल हैं। हालांकि, लिस्ट में किसी नई कंपनी को नहीं जोड़ा गया है। सभी कंपनियां पहले से ही अलग-अलग श्रेणियों में प्रतिबंधित हैं। खास बात यह है कि डिफेंस सेक्टर में कथित रिश्वतखोरी के मामले में एसएमपीपी लिमिटेड के सीईओ और दो अन्य लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद कंपनी का नाम इस सूची में शामिल नहीं है।
रक्षा मंत्रालय के विजिलेंस डिवीजन की ओर से जारी इस सूची के मुताबिक इन कंपनियों पर रक्षा खरीद से जुड़े कारोबारी लेन-देन पर पूरी तरह या आंशिक रूप से रोक लगाई गई है। सूची में छह कंपनियां पूरी तरह प्रतिबंधित हैं, जबकि 15 कंपनियां सस्पेंडेड या होल्ड श्रेणी में हैं। एक कंपनी पर सीमित प्रतिबंध लागू है।
Defence Companies Blacklisted: रक्षा मंत्रालय की लिस्ट में तीन श्रेणियां
रक्षा मंत्रालय ने इस लिस्ट में डिबार यानी पूरी तरह प्रतिबंधित कैटेगरी में शामिल कंपनियों के साथ रक्षा मंत्रालय के कारोबारी लेन-देन पर रोक होती है। सस्पेंडेड या होल्ड कैटेगरी में रखी गई कंपनियों की स्थिति उनके खिलाफ जारी आदेशों और संबंधित शर्तों के अनुसार तय होती है। वहीं, रेस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में किसी कंपनी पर सीमित दायरे में प्रतिबंध लागू हो सकता है।
मंत्रालय की सूची में छह डिबार कंपनियों में सिंगापुर टेक्नोलॉजीज काइनेटिक्स लिमिटेड, इजरायल मिलिट्री इंडस्ट्रीज, रूस की कॉरपोरेशन डिफेंस, लुधियाना की आरके मशीन टूल्स, ज्यूरिख की राइनमेटाल एयर डिफेंस और नई दिल्ली की टीएस किसान एंड कंपनी शामिल हैं। इन कंपनियों पर 1 अप्रैल 2025 का संयुक्त आदेश लागू है। (Defence Companies Blacklisted)
सस्पेंडेड और होल्ड कैटेगरी में 15 कंपनियां
सूची में 15 कंपनियों को सस्पेंडेड या होल्ड कैटेगरी में रखा गया है। इनमें मॉरीशस की इन्फोटेक डिजाइन सिस्टम, आईडीएस ट्यूनीशिया, मोहाली की आईडीएस इन्फोटेक, चंडीगढ़ की एयरोमैट्रिक्स, शांक्स ओशियनियरिंग, इंटर स्पाइरो इंडिया और एक्सपर्ट्स सिस्टम्स शामिल हैं।
इसके अलावा यूनीटेक एंटरप्राइजेज, केल्विन इंजीनियरिंग, एटलस ग्रुप की कंपनियां, ऑफसेट इंडिया सॉल्यूशंस और उससे जुड़ी कंपनियां, स्विट्जरलैंड की पिलाटस एयरक्राफ्ट, वेक्ट्रा एडवांस्ड इंजीनियरिंग, अडिगियर इंटरनेशनल और माइक्रोकॉम इंडिया के नाम भी इस कैटेगरी में हैं। वेक्ट्रा एडवांस्ड इंजीनियरिंग का नाम अब वर्ट इक्विपमेंट के रूप में भी दर्ज है।
सूची में कुछ कंपनियों के खिलाफ 2006 से लागू आदेशों का उल्लेख है, जबकि अन्य मामलों में बाद के साल में कार्रवाई की गई है। इनमें 2014, 2018, 2019, 2023 और 2025 के आदेश भी शामिल हैं।
सीमित प्रतिबंध वाली कैटेगरी में चेक रिपब्लिक की टाट्रा ट्रक्स का नाम भी शामिल है। (Defence Companies Blacklisted)
गिरफ्तारी के बाद भी एसएमपीपी सूची से बाहर
हाल ही में 500 करोड़ रुपये के डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट में रिश्वत देने की आरोपी एसएमपीपी लिमिटेड का नाम इस लिस्ट में नहीं है। रिश्वतखोरी के इस मामले में कंपनी के सीईओ और दो अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। एसएमपीपी के खिलाफ सीबीआई की भ्रष्टाचार जांच के बाद भारतीय सेना के साथ उसके करीब 10 कॉन्ट्रैक्ट जांच के दायरे में आ गए हैं। इन सौदों की कुल कीमत 2,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें गोला-बारूद, लॉइटरिंग म्यूनिशन, खुफिया जानकारी जुटाने वाले ड्रोन और सुरक्षा उपकरणों की सप्लाई शामिल है।
इस मामले में कंपनी का नाम एफआईआर में शामिल होने के बाद रक्षा मंत्रालय ने उसके साथ कारोबारी लेनदेन पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू की है।
नियमों के तहत कंपनी को सेना की मौजूदा खरीद प्रक्रियाओं से भी बाहर किया जा सकता है। इसमें वे सौदे भी शामिल हो सकते हैं, जिनमें कंपनी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बाद चुनी जा चुकी है। नए टेंडर और रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (आरएफआई) जारी करने पर भी रोक लग सकती है।
वहीं, जिन कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन डिलीवरी पूरी नहीं हुई है, उनके भविष्य पर अलग-अलग मामलों के आधार पर फैसला लिया जा सकता है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय में एक समिति गठित की जा सकती है। नियमों के मुताबिक, संबंधित विभाग के सचिव यह तय कर सकते हैं कि ऐसे कॉन्ट्रैक्ट जारी रखे जाएं या बंद कर दिए जाएं।
हालांकि, जिन उपकरणों की सप्लाई पहले ही हो चुकी है, उनकी सर्विसिंग और स्पेयर पार्ट्स की खरीद जारी रह सकती है, ताकि वे सेना के इस्तेमाल के लिए तैयार रहें। इनमें जेट इंजन से चलने वाले कामिकाजे ड्रोन भी शामिल हैं।
बता दें कि एसएमपीपी पहले भी विवादों में रही है। साल 2019 में कंपनी की बुलेटप्रूफ जैकेट सप्लाई को लेकर सवाल उठे थे। सेना के ट्रायल में पश्चिमी देशों के कंपोनेंट इस्तेमाल किए गए थे, लेकिन जब सप्लाई की गई तो बड़ी मात्रा में चीनी कंपोनेंट लगाए जाने का आरोप लगा था। (Defence Companies Blacklisted)
एसएआरआर फ्रेट्स का मामला भी लिस्ट में शामिल
लिस्ट में एसएआरआर फ्रेट्स कॉरपोरेशन और उससे जुड़ी कंपनियों के बारे में भी एक महत्वपूर्ण नोट दिया गया है। इनके साथ कारोबार 19 फरवरी 2021 के एक आदेश के तहत स्थगित किया गया था। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने मई 2021 में इस आदेश पर रोक लगा दी थी। वहीं, अदालत ने अगस्त 2026 में इस रोक को बढ़ाकर 6 नवंबर 2026 तक कर दिया था। (Defence Companies Blacklisted)
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Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.


