📍नई दिल्ली | 25 Oct, 2026, 3:33 PM
Air Marshal AK Bharti: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना की कार्रवाई और उसकी रणनीति को लेकर चर्चा में रहे एयर मार्शल (रि.) एके भारती का कहना है कि भारत की सैन्य कार्रवाई का मकसद किसी देश को संदेश देना नहीं, बल्कि अपने नागरिकों की सुरक्षा करना है। उन्होंने साफ कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के लिए पाकिस्तान में कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है। अगर भविष्य में भारत पर आतंकी हमला होता है, तो उसका जवाब दिया जाएगा।
BharatDefX के फाउंडर राजीव रंजन को दिए इंटरव्यू में Air Marshal AK Bharti ने ऑपरेशन सिंदूर की योजना, खुफिया जानकारी, सैन्य रणनीति, राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, ड्रोन और भारतीय वायु सेना की तकनीकी जरूरतों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की मौजूदा सैन्य रणनीति की क्षमता को दिखाया है। उनके मुताबिक, सेना का काम शांति के समय भी पूरी तैयारी रखना है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी चुनौती का सामना किया जा सके।
सवाल: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सबसे बड़ी चुनौती क्या थी?
एयर मार्शल एके भारती: सेना का काम शांति के समय पूरी तैयारी रखना है। जब भी जरूरत पड़े, तो आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभानी है। इसलिए मैं नहीं मानता कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ऐसा कोई हिस्सा था, जिसे हम असाधारण चुनौती कहें।
लेकिन अगर आप योजना, खुफिया जानकारी जुटाने और कार्रवाई को अंजाम देने की बात कर रहे हैं, तो किसी भी सैन्य अभियान में सबसे अहम चीज खुफिया जानकारी होती है। यह काम एक दिन में नहीं होता, बल्कि लगातार चलता रहता है।
जब तक हमारे पास सटीक खुफिया जानकारी नहीं होगी, तब तक सही लक्ष्य तय करना मुश्किल है। इसलिए जरूरी था कि हमें अपने लक्ष्यों के बारे में सही जानकारी मिले और उन पर सटीक कार्रवाई की जाए।
सवाल: क्या ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य रणनीति बदल दी है?
एयर मार्शल एके भारती: मैं नहीं मानता कि हमारी सैन्य रणनीति में कोई बदलाव हुआ है। हमारी सैन्य रणनीति पहले से ही सही थी। इसी वजह से हम अपने उद्देश्य को हासिल कर पाए। इसलिए न तो इसमें बदलाव हुआ है और न ही बदलाव लाने की जरूरत है।
हां, इस कार्रवाई से एक संदेश जरूर गया है कि अब बहुत हो चुका है। भारत आतंकवादी हमलों को अनदेखा नहीं करेगा। अगर आगे कोई आतंकी हमला होता है, तो उसका जवाब जरूर मिलेगा।
उन्होंने कहा, “एनी एक्ट्स ऑफ टेरर विल कैरी कॉन्सीक्वेंसेस।” यानी आतंकवाद की हर कार्रवाई के परिणाम होंगे। हालांकि, जवाब किस तरह दिया जाएगा, कहां दिया जाएगा और उसका स्वरूप क्या होगा, यह उस समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
सवाल: उरी, पुलवामा और बालाकोट के बाद ऑपरेशन सिंदूर का संदेश कितना अलग था?
एयर मार्शल एके भारती: हमारा उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं है। हम अपनी सुरक्षा कर रहे हैं। यह एक रक्षात्मक कार्रवाई है। हम अपने देश में रहते हैं और यहां आकर आतंकवादी हमारी जनता को निशाना बनाते हैं।
उन्होंने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों को उनके परिवारों के सामने मारना बेहद निंदनीय घटना थी। उनके मुताबिक, जिन लोगों ने इस हमले को अंजाम दिया और जिन लोगों ने इसकी योजना बनाई, उनके लिए किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई पर्याप्त नहीं हो सकती।
भारती ने कहा कि पहले आतंकवादी पाकिस्तान से भारत आते थे, हमला करते थे और फिर वापस लौट जाते थे। उन्हें लगता था कि पाकिस्तान में उन्हें सुरक्षित ठिकाना मिल जाएगा।
उन्होंने कहा, “अगर आप आतंकवादी हैं या आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, तो पाकिस्तान में आपके लिए कोई जगह सुरक्षित नहीं है। आप दूसरे देश में जाकर यह नहीं सोच सकते कि वहां आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। हम आपको देख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर आप तक पहुंच सकते हैं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की लड़ाई पाकिस्तान के आम नागरिकों से नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं या आतंकवादियों को प्रोत्साहित करते हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
सवाल: क्या ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बड़े युद्ध का खतरा था?
एयर मार्शल एके भारती: आर्म्ड फोर्सेज में किसी चुनौती का सामना करने से डरने का सवाल नहीं होता। हमारी जिम्मेदारी ही यही है कि हम हर समय तैयार रहें। हम किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत का निशाना आतंकवाद और उसे बढ़ावा देने वाले ढांचे पर था। भारत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया था कि कार्रवाई का उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ जवाब देना है, न कि संघर्ष को आगे बढ़ाना।
भारती के मुताबिक, इसके बाद पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान ने इस कार्रवाई को अपने खिलाफ लड़ाई के रूप में लिया और भारत की तरफ मिसाइलें तथा ड्रोन भेजे। ऐसी स्थिति में जवाब देना जरूरी था।
उन्होंने कहा, “सेना किसी भी कार्रवाई और किसी भी तरह के तनाव में बढ़ोतरी का सामना करने के लिए तैयार रहती है। यह हमारी रोज की ट्रेनिंग, योजना और उपकरणों की तैयारी का हिस्सा है। हम उस स्थिति के लिए तैयार थे और आज भी तैयार हैं।”
सवाल: ऑपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल कितना अहम था?
एयर मार्शल एके भारती: ऑपरेशन सिंदूर एक संयुक्त सैन्य अभियान था। इसमें भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना ने योगदान दिया। भले ही नौसेना की भूमिका सार्वजनिक रूप से उतनी दिखाई न दी हो, लेकिन उसका भी महत्वपूर्ण योगदान था। सेना और वायु सेना ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई।
उन्होंने कहा कि इस अभियान से जुड़ी सभी सैन्य गतिविधियों का ब्योरा सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस दावे से भी सहमति नहीं जताई कि पाकिस्तान को भारत की तैयारियों के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं थी।
भारती के मुताबिक, भारतीय वायु सेना की खासियत यह है कि वह कम समय में कार्रवाई कर सकती है, दूर तक पहुंच सकती है और जरूरत के मुताबिक बड़ी मारक क्षमता का इस्तेमाल कर सकती है।
उन्होंने कहा, “वायु सेना की यही क्षमता है कि हम तेजी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं, दूर तक कार्रवाई कर सकते हैं और ताकत के साथ जवाब दे सकते हैं। देश ने इस क्षमता का इस्तेमाल किया और इसके अच्छे नतीजे मिले।”
सवाल: क्या राफेल और आधुनिक हथियारों ने भारतीय वायु सेना की क्षमता बढ़ाई है?
एयर मार्शल एके भारती: आज तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। सेना को भी तकनीक के साथ आगे बढ़ना होगा। हमारा प्रयास केवल दूसरी सेनाओं की बराबरी करना नहीं, बल्कि तकनीक के मामले में आगे रहना है।
He said Balakot, सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों से सीख मिलती है। लेकिन सेना का काम केवल पिछले अभियान से मिली सीख तक सीमित नहीं है। उसे लगातार यह देखना होता है कि विरोधी देश किस तरह के हथियार और तकनीक अपना रहे हैं।
भारती ने राफेल, सुखोई-30 एमकेआई के आधुनिकीकरण, एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, मानव रहित प्रणालियों और उनके खिलाफ इस्तेमाल होने वाली तकनीकों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में काम करने का उद्देश्य भारतीय वायु सेना की क्षमता को लगातार बेहतर बनाना है।
पाकिस्तान के दावों और भारत की ओर से जारी किए गए सबूतों पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भारत ने उपलब्ध तथ्यों को दुनिया के सामने रखा है। उनके मुताबिक, पाकिस्तान अपने लोगों के सामने यह स्वीकार नहीं करना चाहेगा कि उसे नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि जो लोग तथ्यों के आधार पर स्थिति को समझना चाहते हैं, उनके सामने जानकारी मौजूद है।
सवाल: क्या भविष्य में भारत की जवाबी कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर से भी ज्यादा आक्रामक होगी?
एयर मार्शल एके भारती: हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान को यह संदेश मिल गया होगा कि आतंकवादी हमले के परिणाम होंगे। दोनों देशों को शांतिपूर्वक आगे बढ़ना चाहिए। आज की युवा पीढ़ी के अपने सपने हैं और उसे अपने देश की तरक्की पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर फिर आतंकी हमला होता है, तो भारत जवाबी कार्रवाई जरूर करेगा। लेकिन उस कार्रवाई का स्वरूप क्या होगा, इस बारे में पहले से अनुमान लगाना सही नहीं है।
भारती ने स्पष्ट किया कि हर युद्ध और सैन्य संघर्ष अलग होता है। अगली लड़ाई की तैयारी पिछली लड़ाई के तरीके को दोहराकर नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा, “अगला संघर्ष पिछली लड़ाई की कार्बन कॉपी नहीं हो सकता। हर बार परिस्थितियां और चुनौतियां अलग होती हैं। उस समय जो जरूरी होगा, देश और सेना उसी के मुताबिक कार्रवाई करेंगे। जरूरत पड़ने पर देश के पास मौजूद सभी साधनों का इस्तेमाल किया जाएगा।”
सवाल: सुखोई-30 एमकेआई ने भारतीय वायु सेना को किस तरह बदला?
एयर मार्शल एके भारती: भारतीय वायु सेना में सुखोई-30 को पहली बार 1998 में शामिल किया गया था। इसके बाद 2002 में सुखोई-30 एमकेआई आया। उस समय जो विमान उपलब्ध था, उससे संतुष्ट रहने के बजाय भारतीय वायु सेना ने उसमें अपनी जरूरत के हिसाब से कई उपकरण और प्रणालियां जोड़ीं।
उन्होंने इस प्रक्रिया में पहले के वायु सेना प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों के योगदान की सराहना की। उनके मुताबिक, सुखोई-30 एमकेआई में अलग-अलग प्रणालियों को जोड़ने की दूरदर्शी सोच ने इसे एक प्रभावशाली लड़ाकू विमान बनाया।
भारती ने कहा कि इस विमान में स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल को भी एकीकृत किया गया है। इसके अलावा, इसमें नए हथियारों और प्रणालियों को जोड़ने का काम लगातार किया जा रहा है, ताकि यह आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बना रहे।
उन्होंने कहा, “सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायु सेना की बड़ी सफलता की कहानी है। इसने हमें काफी क्षमता दी है और आज भी दे रहा है।”
सवाल: तेजस और तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में हो रही देरी पर क्या कहेंगे?
एयर मार्शल एके भारती: तेजस एक अच्छा कार्यक्रम है और आगे चलकर तेजस एमके-2 भी महत्वपूर्ण विमान होगा। हालांकि, तेजस कार्यक्रम में हुई देरी पर विचार करने की जरूरत है। यह देखना होगा कि देरी क्यों हो रही है और काम को किस तरह तेज किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अब भारत में कई ऐसी तकनीकें विकसित हो रही हैं, जो पहले उपलब्ध नहीं थीं। इनमें रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़ी प्रणालियां शामिल हैं। देश की कई कंपनियां भी इस दिशा में काम कर रही हैं।
तेजस एमके-1ए की डिलीवरी पर उन्होंने स्वीकार किया कि इसमें देरी हुई है, लेकिन कहा कि विमान जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। उनके मुताबिक, हथियारों के एकीकरण का काफी काम पूरा हो चुका है और कुछ काम बाकी है। उन्होंने इंजन को भी एक बड़ी चुनौती बताया।
भारती ने कहा, “अगर हमें केवल दिखाने के लिए विमान लाना होता, तो वह पहले ही आ गया होता। देरी इसलिए है क्योंकि हम चाहते हैं कि विमान अपनी जरूरी क्षमताओं के साथ आए।”
उन्होंने यह भी कहा कि तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती, क्योंकि हर विमान की अपनी भूमिका और क्षमता है।
सवाल: एक फाइटर पायलट और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की जिम्मेदारियों में क्या फर्क है?
एयर मार्शल एके भारती: फाइटर पायलट के रूप में विमान उड़ाने का अनुभव अलग होता है। उस समय आपकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से अपने विमान, मिशन और उससे जुड़े फैसलों तक सीमित होती है।
लेकिन जब आप वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका में आते हैं, तो आपके फैसलों का असर बहुत बड़ी संख्या में लोगों और पूरी सैन्य व्यवस्था पर पड़ता है। आपको जवानों की जरूरतों, उपकरणों, प्रशिक्षण, रणनीति और काम करने की परिस्थितियों पर भी ध्यान देना होता है।
उन्होंने कहा कि सैन्य नेतृत्व में कई बार पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होती। खासकर विरोधी की गतिविधियों के बारे में सारी जानकारी मिलना संभव नहीं है। ऐसे में अनुभव, उपलब्ध सूचनाओं और परिस्थितियों को समझकर फैसला लेना पड़ता है।
भारती ने कहा, “अच्छा लीडर वह है, जो अधूरी जानकारी होने के बावजूद सही फैसला ले सके। सेना में डरकर काम नहीं किया जा सकता। आपको निडर होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होती है।”
सवाल: आधुनिक युद्ध में फाइटर पायलट की भूमिका कैसे बदल रही है?
एयर मार्शल एके भारती: आज फाइटर पायलट केवल विमान उड़ाने वाला व्यक्ति नहीं है। वह युद्ध के मैदान में कई प्रणालियों का संचालन और उनके बीच तालमेल बनाने की जिम्मेदारी भी निभाता है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, आधुनिक हथियारों और नियंत्रण प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल से पायलट की जिम्मेदारी लगातार बढ़ रही है। विमान को उड़ाना उसकी ट्रेनिंग का हिस्सा है, लेकिन मिशन के दौरान अलग-अलग प्रणालियों को समझना और उनका सही इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है।
ड्रोन और मानव रहित विमानों के बारे में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मानव चालित और मानव रहित प्रणालियां साथ काम करेंगी। इसे ‘मैंड-अनमैंड टीमिंग’ कहा जाता है। इसमें पायलट केवल अपने विमान को नियंत्रित नहीं करेगा, बल्कि दूसरे मानव रहित प्लेटफॉर्म के साथ तालमेल बनाने में भी भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उन्हें रोकने वाली तकनीकें भी विकसित हो रही हैं। इसलिए यह देखना जरूरी है कि दोनों तकनीकों का विकास किस दिशा में होता है।
सवाल: अगले दस साल में भारतीय वायु सेना की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं क्या होंगी?
एयर मार्शल एके भारती: हमें लड़ाकू विमानों की संख्या भी बढ़ानी है, आधुनिक तकनीक भी अपनानी है और अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल भी बेहतर करना है। तीनों जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीक के मामले में भारत को पीछे नहीं रहना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, छठी पीढ़ी की तकनीक और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में अग्रणी देशों के साथ बने रहना जरूरी है।
चीन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना के पास भी जरूरी क्षमताएं हैं। लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक की तैनाती के दौरान भारतीय वायु सेना ने अपनी तैयारी और क्षमता दिखाई थी। उनके मुताबिक, मजबूत सैन्य क्षमता का उद्देश्य केवल युद्ध लड़ना नहीं, बल्कि विरोधी को संघर्ष शुरू करने से रोकना भी है।
उन्होंने अगले दशक की भारतीय वायु सेना का वर्णन करते हुए कहा, “भारतीय वायु सेना एक अत्यधिक नेटवर्क वाली, एकीकृत और एआई-सक्षम छठी पीढ़ी की एयर एंड स्पेस फोर्स होगी।”
सवाल: एनडीए ने आपको सबसे बड़ी सीख क्या दी?
एयर मार्शल एके भारती: एनडीए ने सबसे बड़ी चीज आत्मविश्वास दिया। यह विश्वास कि कोई भी काम असंभव नहीं है, बशर्ते आप उसके लिए मेहनत करें।
उन्होंने कहा कि एनडीए में प्रशिक्षण के दौरान साथ काम करना, कठिन परिस्थितियों का सामना करना और एक-दूसरे की मदद करना जीवनभर का रिश्ता बनाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेना में एनडीए के अलावा दूसरे रास्तों से आने वाले अधिकारी भी टीम भावना और सहयोग की भावना विकसित करते हैं।
युवा अधिकारियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें मेहनत करने से पीछे नहीं हटना चाहिए और अपने काम के प्रति ईमानदार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मेहनत कीजिए, खुद पर भरोसा रखिए और अपने लक्ष्य के लिए लगातार काम करते रहिए। अपने आप से ईमानदार रहिए कि आपने जितना समय काम के लिए तय किया था, क्या उतना काम वास्तव में किया? मेहनत कीजिए, अपने सपनों का पीछा कीजिए और हार मत मानिए।”
सवाल: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युवा अधिकारियों और सैनिकों का क्या योगदान रहा?
एयर मार्शल एके भारती: उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कुछ वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आए, लेकिन वास्तविक काम मैदान में तैनात युवाओं ने किया।
उन्होंने ऑपरेशन में शामिल जवानों और अधिकारियों के योगदान के लिए उनका आभार जताया। भारती के मुताबिक, किसी भी सैन्य अभियान की सफलता के पीछे उन लोगों की मेहनत होती है, जो जमीन पर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
युवाओं और जेन-ज़ी को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि देश के हित में काम करना चाहिए और आसपास मौजूद ध्यान भटकाने वाली चीजों से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमारी युवा पीढ़ी बहुत जानकार और काबिल है। हमें उस पर गर्व होना चाहिए। युवाओं से मेरी अपील है कि वे देश के लिए काम करें, देशहित को प्राथमिकता दें और एकजुट होकर भारत को आगे बढ़ाएं।” (Air Marshal AK Bharti)
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वरिष्ठ पत्रकार और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ हैं। तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले राजीव रंजन पूर्व में एनडीटीवी इंडिया में लगभग 19 सालों तक सीनियर डिफेंस एडिटर रहे। उन्होंने ‘वतन के रखवाले’ जैसे चर्चित शो तैयार किए और सीमाओं से ग्राउंड रिपोर्टिंग की। IIMC के पूर्व छात्र, अब डिजिटल प्लेटफॉर्म BharatDefX पर सामरिक मुद्दों पर काम कर रहे हैं।


