HomeDRDOपनडुब्बियों में लगने वाले DRDO के स्वदेशी AIP सिस्टम को मिली बड़ी...

पनडुब्बियों में लगने वाले DRDO के स्वदेशी AIP सिस्टम को मिली बड़ी सफलता! INS खंडेरी पर इंस्टॉलेशन की तैयारी

डीआरडीओ की एनएमआरएल ने इस स्वदेशी सिस्टम को विकसित किया है। यह फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल सेल यानी पीएएफसी तकनीक पर आधारित है...

WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 24 Oct, 2026, 7:51 PM

India Indigenous AIP System: भारतीय नौसेना की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के लिए डेवलप किए जा रहे स्वदेशी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सिस्टम ने एक अहम पड़ाव हासिल किया है। डीआरडीओ की नेवल मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एनएमआरएल) के बनाए इस सिस्टम के एनर्जी मॉड्यूल पर सेटिंग टू वर्क फेज-2 (एसटीडब्ल्यू-2) का काम शुरू हुआ है। यह कार्यक्रम गुजरात के हजीरा स्थित लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के एएम नाइक हेवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया गया।

India Indigenous AIP System: लंबे समय तक पानी में रह सकेगी सबमरीन

AIP यानी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन ऐसी तकनीक है, जो डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को बाहरी हवा पर निर्भरता कम करते हुए लंबे समय तक पानी के अंदर रहने में मदद करती है। सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरियां चार्ज करने के लिए समय-समय पर समुद्र की सतह के करीब आना या स्नॉर्कल की मदद से हवा लेनी पड़ती है। इस दौरान उनके पकड़े जाने का जोखिम बढ़ जाता है।

एआईपी सिस्टम से पनडुब्बी लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती है और अपनी मौजूदगी छिपाए रख सकती है। भारतीय नौसेना के लिए यह तकनीक खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पनडुब्बियों का एक प्रमुख काम दुश्मन के जहाजों की निगरानी करना और समुद्री क्षेत्र में बिना अपनी स्थिति उजागर किए ऑपरेशन करना है।

डीआरडीओ की एनएमआरएल ने इस स्वदेशी सिस्टम को विकसित किया है। यह फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल सेल यानी पीएएफसी तकनीक पर आधारित है। इसमें फ्यूल सेल के जरिए रासायनिक ऊर्जा को बिजली में बदला जाता है, जिसका इस्तेमाल पनडुब्बी की जरूरतों के लिए किया जा सकता है।

एसटीडब्ल्यू-2 गतिविधि क्यों है अहम?

24 अक्टूबर को शुरू हुई एसटीडब्ल्यू-2 एक्टिविटी एनर्जी मॉड्यूल को चालू करने और उसके सिस्टम की कार्यक्षमता जांचने की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य मॉड्यूल को अगले चरण के परीक्षणों के लिए तैयार करना है।

Read also:  Navy will meet 6 new P-8I aircraft, India-USA can be as early as 25 thousand crore deals

डीआरडीओ के अनुसार, अगले चरण में एनर्जी मॉड्यूल को बिजली उत्पादन के लिए एक्टिव किया जाएगा। इसके बाद भारतीय नौसेना के तय मानकों और प्रक्रियाओं के अनुसार इसकी कड़ी जांच की जाएगी। इन परीक्षणों में सिस्टम की कार्यक्षमता और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा।

रक्षा सचिव और डीआरडीओ प्रमुख राजेश कुमार सिंह ने स्वदेशी एआईपी कार्यक्रम में शामिल वैज्ञानिकों और औद्योगिक साझेदारों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस कार्यक्रम में भारतीय नौसेना के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। राजेश कुमार सिंह ने हाइड्रोजन और फ्यूल सेल तकनीक से जुड़े सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने पर भी जोर दिया। इस तरह के सिस्टम में सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होता है, क्योंकि इनके संचालन में विशेष तकनीकी सावधानियों की आवश्यकता होती है। (India Indigenous AIP System)

कलवरी क्लास पनडुब्बियों में लगेगा सिस्टम

स्वदेशी एआईपी सिस्टम को भारतीय नौसेना की कलवरी क्लास पनडुब्बियों में लगाने की योजना है। ये पनडुब्बियां प्रोजेक्ट-75 के तहत बनाई गई स्कॉर्पीन श्रेणी की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं।

इस श्रेणी में आईएनएस कलवरी, आईएनएस खंडेरी, आईएनएस करंज, आईएनएस वेला, आईएनएस वागीर और आईएनएस वाग्शीर शामिल हैं। इन छह पनडुब्बियों में एआईपी सिस्टम को उनके निर्धारित रिफिट के दौरान लगाने की योजना बनाई गई है।

Read also:  Delhi Defence Dialogue: CDS General Chauhan Bole-Modern Warfare is the most successful example of Operation Sindoor, the technique with arms is the key to win

भारत की छह कलवरी क्लास (प्रोजेक्ट-75, स्कॉर्पीन डिजाइन) सबमरीनें बिना एआईपी के बनी और कमीशन हुई हैं। मूल योजना में 5वीं और 6वीं सबमरीन (वागीर और वाग्शीर) निर्माण के दौरान एआईपी के साथ आने वाली थीं, लेकिन डीआरडीओ के स्वदेशी एआईपी सिस्टम के डेवलपमेंट में देरी के चलते ऐसा नहीं हो सका।

डीआरडीओ के अनुसार, एनर्जी मॉड्यूल को अगले चरण के परीक्षणों के बाद मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) को सौंपा जाएगा। इसके बाद इसे पनडुब्बी में लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह ट्रांसफर और इंटीग्रेशन 2027 की शुरुआत में होगा। दिसंबर 2024 में एआईपी प्लग बनाने और इंटीग्रेशन के लिए एमडीएल के साथ 1,990 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ था। इंस्टॉलेशन पूरा होने के बाद जुलाई-अगस्त 2027 में सी ट्रायल्स और 2028 में पूरी तरह ऑपरेशनल होने की उम्मीद है।

पनडुब्बी में एआईपी लगाने के लिए उसके स्ट्रक्चर में एक अतिरिक्त सेक्शन जोड़ना पड़ता है। इस प्रक्रिया को आम तौर पर ‘प्लग इंटीग्रेशन’ कहा जाता है। इसमें पनडुब्बी के प्रेशर हुल के एक हिस्से में बदलाव कर अतिरिक्त मॉड्यूल फिट किया जाता है। इसके बाद वेल्डिंग, स्ट्रक्चरल इन्वेस्टिगेशन और प्रेशर से जुड़े परीक्षण किए जाते हैं, ताकि समुद्र में ऑपरेशन के दौरान पनडुब्बी की सुरक्षा बनी रहे। (India Indigenous AIP System)

पहले भी हो चुका है जमीन पर परीक्षण

स्वदेशी एआईपी सिस्टम के डेवलपमेंट को लेकर मार्च 2021 में लैंड-बेस्ड प्रोटोटाइप का परीक्षण किए गए थे। इस दौरान सिस्टम को अलग-अलग पावर मोड में चलाकर उसकी क्षमता जांची गई।

इसके बाद जनवरी 2023 में डीआरडीओ ने फ्रांस की नेवल ग्रुप कंपनी के साथ समझौता किया था। इस सहयोग का उद्देश्य एआईपी सिस्टम को स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों में लगाने के लिए जरूरी डिजाइन और इंटीग्रेशन संबंधी काम करना था। एलएंडटी को एनर्जी मॉड्यूल के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई।

Read also:  Defence Shares Fall: 3rd day despite the DAC approval of Rs 79,000 crore, also fall defence shares, know the real reason for the fall

अब एसटीडब्ल्यू-2 एक्टिविटी शुरू होने के साथ सिस्टम को बिजली उत्पादन और आगे के परीक्षणों की दिशा में ले जाया जा रहा है। नौसेना के तय मानकों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही मॉड्यूल को पनडुब्बी में लगाने के लिए सौंपा जाएगा। (India Indigenous AIP System)

आईएनएस खंडेरी पर पहले लगेगा एआईपी

भारतीय नौसेना की कलवरी क्लास की पनडुब्बी आईएनएस खंडेरी पर स्वदेशी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सिस्टम लगाने की तैयारी चल रही है। इस सिस्टम का एनर्जी मॉड्यूल अभी ‘सेटिंग टू वर्क फेज-2’ में है। इसकी आगे की जांच पूरी होने के बाद इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) को सौंपा जाएगा। मौजूदा योजना के अनुसार, आईएनएस खंडेरी पर एआईपी सिस्टम का इंटीग्रेशन 2027 की शुरुआत में किया जाएगा। इसके बाद जुलाई-अगस्त 2027 में समुद्री परीक्षण किए जाने का लक्ष्य है, जबकि 2028 में इसके पूरी तरह ऑपरेशनल होने की योजना है।

शुरुआत में इसे आईएनएस कलवरी पर लगाने की योजना थी, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी के चलते अब आईएनएस खंडेरी को एआईपी सिस्टम से लैस करने की तैयारी है। इसके लिए पनडुब्बी के प्रेशर हुल में निर्धारित स्थान पर कट लगाकर एक अतिरिक्त सेक्शन जोड़ा जाएगा। इस सेक्शन में एआईपी सिस्टम लगाया जाएगा। (India Indigenous AIP System)

Author

  • News Desk

    Defence News Desk is India’s leading Hindi defence news team, offering reliable and analytical news associated with Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, Defence Equipment, War Strategy and National Security. We bring accurate, simple and updated Defence News in Hindi. Our aim is "Every news, connected with the defence of the country. ""

WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
Defence News Desk is India’s leading Hindi defence news team, offering reliable and analytical news associated with Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, Defence Equipment, War Strategy and National Security. We bring accurate, simple and updated Defence News in Hindi. Our aim is "Every news, connected with the defence of the country. ""

Most Popular

Recent Comments