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चीन बना रहा है अंडरवॉटर ड्रोन का विशाल मदरशिप, भारत के जलकपि प्रोजेक्ट से कैसे बढ़ेगी समुद्र में भारतीय नौसेना की ताकत?

चीन बड़े मानवरहित अंडरवॉटर ड्रोन और उन्हें समुद्र तक पहुंचाने वाले विशेष जहाज विकसित कर रहा है। वहीं, भारत का जलकपि और 100 टन श्रेणी का एक्सएलयूयूवी प्रोजेक्ट समुद्र के भीतर निगरानी, माइंस की पहचान और नौसैनिक अभियानों के लिए महत्वपूर्ण हैं...

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📍नई दिल्ली | 24 Oct, 2026, 4:18 PM

India Jalakapi XL AUV: समुद्र के नीचे होने वाली जंग अब केवल पनडुब्बियों और टॉरपीडो तक सीमित नहीं रह गई है। दुनिया की बड़ी नौसेनाएं ऐसे अनमैन्ड अंडरवॉटर ड्रोन डेवलप कर रही हैं, जो बिना किसी चालक दल के कई दिनों या हफ्तों तक समुद्र के भीतर काम कर सकते हैं। भारतीय नौसेना भी स्वदेशी तकनीक से ऐसे सिस्टम डेवलप कर रही है। इनमें लगभग 20 टन वजन वाला जलकपि एक्सएलएयूवी और करीब 100 टन क्लास का बड़ा एक्सएलयूयूवी कार्यक्रम शामिल है। इनका इस्तेमाल दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, समुद्र में बिछी माइंस का पता लगाने और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है। कुछ बड़े प्लेटफॉर्म को हथियारों से लैस करने की तैयारी हो रही है।

वहीं, इस क्षेत्र में चीन बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस साल सितंबर की शुरुआत में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक चीन एक बड़े जहाज का निर्माण कर रहा है। जिसे एक्स्ट्रा-लार्ज अनक्रूड अंडरवॉटर व्हीकल (एक्सएलयूयूवी) यानी बड़े आकार की मानवरहित पानी के नीचे चलने वाली पनडुब्बियों का मदरशिप कहा जा रहा है। इससे पहले सितंबर 2025 में चीन ने अपनी मिलिट्री परेड में कई बड़े अनमैन्ड अंडरवॉटर सिस्टम शोकेस किए थे।

India Jalakapi XL AUV: क्या होते हैं एक्सएलयूयूवी और एक्सएलएयूवी?

एक्सएलयूयूवी का पूरा नाम एक्स्ट्रा लार्ज अनमैन्ड अंडरवॉटर व्हीकल है। यह बहुत बड़ी अनमैन्ड पनडुब्बी है, जिसमें चालक दल के लिए रहने की जगह नहीं होती। इसे पहले से तय मिशन के अनुसार समुद्र के भीतर भेजा जाता है, जहां यह अपने नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम की मदद से काम करता है।

एक्सएलएयूवी यानी एक्स्ट्रा लार्ज ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल भी इसी क्लास का प्लेटफॉर्म है। ऑटोनॉमस का मतलब है कि यह निर्धारित निर्देशों के आधार पर काफी हद तक खुद काम कर सकता है। इसमें ऑपरेटर का काम मिशन की योजना बनाने, सिस्टम की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर निर्देश देने का होता है।

आम पनडुब्बी में चालक दल, जीवन रक्षक सिस्टम और दूसरे जरूरी उपकरणों के लिए काफी जगह चाहिए। अनमैन्ड अंडरवॉटर वाहन में इनकी जरूरत कम होती है। इससे लंबे समय तक निगरानी करने और जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में मिशन चलाने के लिए नए विकल्प मिलते हैं।

चीन की एजेएक्स002 और एचएसयू100 की खासियत

3 सितंबर 2025 को बीजिंग में आयोजित मिलिट्री परेड में चीन ने एजेएक्स002 और एचएसयू100 जैसे अनमैन्ड अंडरवॉटर वाहनों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया था।

इसमें एजेएक्स002 की लंबाई लगभग 18 से 20 मीटर है। यह समुद्र में माइंस बिछाने जैसे मिशन पूरा कर सकता है। इसमें पंप-जेट प्रोपल्शन का इस्तेमाल होता है। पंप-जेट में पानी को एक विशेष डक्ट के भीतर से तेजी से बाहर निकाला जाता है, जिससे वाहन को आगे बढ़ने के लिए थ्रस्ट मिलता है।

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एचएसयू100 को मुख्य रूप से इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस यानी आईएसआर मिशनों के लिए तैयार किया गया है। इस तरह के वाहन समुद्र के भीतर सेंसर की मदद से आसपास की गतिविधियों का पता लगाने और महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने में इस्तेमाल होते हैं।

चीन के पास यूयूवी-300 परिवार के छोटे अनमैन्ड अंडरवॉटर सिस्टम भी हैं। इनकी लंबाई लगभग 11.5 मीटर तक है। कुछ डिजाइन हथियार भी ले जा सकते है। (India Jalakapi XL AUV)

दक्षिण चीन सागर में 35 से 45 मीटर लंबे अंडरवॉटर वाहन

दक्षिण चीन सागर में हैनान के पास चीन ने लगभग 35 से 45 मीटर लंबे बेहद बड़े अनमैन्ड अंडरवॉटर वाहनों का परीक्षण भी किया है। यह एक्सएक्सएलयूयूवी यानी एक्स्ट्रा-एक्स्ट्रा लार्ज अनमैन्ड अंडरवॉटर व्हीकल क्लास के हैं। इनका आकार अमेरिका की नौसेना के ऑर्का एक्सएलयूयूवी से भी बड़ा है, जिसकी लंबाई लगभग 26 मीटर है।

चीन एक्सएक्सएलयूयूवी में बिना पारंपरिक पनडुब्बी जैसी ऊपरी संरचना के ऑपरेट करने वाला डिजाइन और एक्स-आकार के रडर दिखाई देते हैं। रडर पानी के भीतर वाहन की दिशा बदलने में मदद करते हैं। (India Jalakapi XL AUV)

चीन बना रहा है 200 मीटर लंबा मदरशिप

एक्सएलयूयूवी ऐसे ड्रोन की क्लास है, जिनकी लंबाई आम तौर पर 20 से 82 फीट के बीच होती है। इनका आकार छोटा अंडरवॉटर ड्रोन की तुलना में काफी बड़ा होता है। इससे इनमें अधिक ईंधन या ऊर्जा, सेंसर, संचार उपकरण और मिशन से जुड़े दूसरे सिस्टम लगाने की जगह मिल सकती है।

मदरशिप इन ड्रोन को उनके ऑपरेशन वाले क्षेत्र तक पहुंचा सकता है। इसके बाद ड्रोन पानी के भीतर जाकर निगरानी, समुद्री रास्तों की जानकारी जुटाने या दूसरे सैन्य मिशन पूरे कर सकते हैं। मिशन के बाद उन्हें वापस लाकर उनकी जांच और मरम्मत भी की जा सकती है।

सैटेलाइट तस्वीरों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के मुताबिक, शंघाई स्थित हुडोंग-झोंगहुआ शिपयार्ड में लगभग 205 मीटर लंबे एक विशेष जहाज का निर्माण किया जा रहा है। इसे बड़े अनमैन्ड अंडरवॉटर वाहनों के लिए संभावित मदरशिप माना जा रहा है। जहाज के डिजाइन में हैंगर और पिछले हिस्से में ऐसा स्ट्रक्चर होने के संकेत मिले हैं, जिसका इस्तेमाल पानी के भीतर चलने वाले बड़े वाहनों को उतारने और वापस जहाज पर लाने के लिए किया जा सकता है।

ग्वांगझू में लगभग 150 मीटर लंबे एक अन्य संभावित सपोर्ट जहाज की भी रिपोर्ट सामने आई है।

अगर चीन ऐसे बड़े ड्रोन को एक विशेष मदरशिप से लॉन्च करने की क्षमता विकसित करता है, तो वह उन्हें अपने तट से काफी दूर समुद्री इलाकों में तैनात कर सकता है। इससे ड्रोन को हर मिशन के लिए किसी पारंपरिक पनडुब्बी या युद्धपोत पर निर्भर रखने की जरूरत कम हो सकती है। चीन इन्हें हिंद महासागर में भी तैनात कर सकता है। (India Jalakapi XL AUV)

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What is भारत का जलकपि प्रोजेक्ट?

भारतीय नौसेना भी बड़े अनमैन्ड अंडरवॉटर वाहनों की क्षमता विकसित करने पर काम कर रही है। इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जलकपि है, जिसे लगभग 20 टन क्लास का एक्स्ट्रा लार्ज ऑटोनॉमस Underwater Vehicle is.

जलकपि की लंबाई लगभग 11 मीटर है। इसकी ऑपरेशनल रेंज करीब 1,000 नॉटिकल मील और पानी के 300 मीटर के भीतर तक लगातार 21 तक काम कर सकता है। जलकपि को iDEX ADITI 1.0 चैलेंज के तहत बनाया जा रहा है।

इस व्हीकल को भारतीय नौसेना के डायरेक्टोरेट ऑफर नेवल डिजाइन – सबमरीन डिजाइन ग्रुप (DND-SDG) के डिजाइन के आधार पर पार्टनर के तौर पर कृष्णा डिफेंस एंड एलाइड इंडस्ट्रीज डेवलप कर रहा है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर शाह ने हाल ही में एक बातचीत में कहा था कि स्वदेशी बड़े ऑटोनॉमस अंडरवॉटर वाहन अगले छह से 12 महीनों में नौसेना के साथ ऑपरेशनल हो सकते हैं।

जलकपि के निर्माण की प्रक्रिया जून 2025 में गुजरात में प्लेट-कटिंग के साथ शुरू हुई थी। प्लेट-कटिंग का मतलब जहाज या अंडरवॉटर वाहन के स्ट्रक्चर में इस्तेमाल होने वाली मेटल प्लेटों को तय आकार में काटना है। इसके बाद स्ट्रक्चर की असेंबली, प्रोपल्शन सिस्टम, नेविगेशन और सोनार जैसे उपकरणों का इंटीग्रेशन किया जाता है। (India Jalakapi XL AUV)

किन मिशनों में इस्तेमाल हो सकता है जलकपि?

जलकपि का मुख्य उद्देश्य समुद्र के भीतर लंबे समय तक निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता बढ़ाना है। इसमें आईएसआर मिशन, समुद्री निगरानी, माइंस का पता लगाना और संदिग्ध समुद्री क्षेत्रों की जांच जैसे काम शामिल हो सकते हैं।

माइन काउंटरमेजर ऑपरेशन में समुद्र के भीतर बिछाई गई माइंस का पता लगा कर उन्हें नष्ट किया जाता है। ऐसा काम जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि माइंस का पता लगाने के लिए नौसैनिक जहाजों या गोताखोरों को खतरनाक क्षेत्र के करीब जाना पड़ सकता है। अनमैन्ड वाहन शुरुआती जांच करके इस जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

जलकपि जैसे प्लेटफॉर्म का एक अन्य फायदा यह है कि इनमें चालक दल नहीं होता। इसलिए ऐसे मिशन किए जा सकते हैं, जिनमें किसी बड़ी पनडुब्बी और उसके चालक दल को भेजना जरूरी न हो।

हालांकि, पानी के भीतर कम्युनिकेट करना आसान नहीं है। हवा में इस्तेमाल होने वाले जीपीएस सिग्नल समुद्र के भीतर सामान्य तरीके से काम नहीं करते। रेडियो कम्युनिकेशन भी पानी के भीतर सीमित रहता है। ऐसे में वाहन को अपनी स्थिति का पता लगाने के लिए इनर्शियल नेविगेशन, ध्वनिक उपकरणों और दूसरे सेंसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। लंबे मिशन के दौरान सटीक नेविगेशन और ऑपरेटर तक जानकारी पहुंचाना तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण चुनौती है। (India Jalakapi XL AUV)

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100 टन के एक्सएलयूयूवी कार्यक्रम को मंजूरी

जलकपि के अलावा भारत लगभग 100 टन श्रेणी का एक बड़ा एक्सएलयूयूवी कार्यक्रम भी डेवलप कर रहा है। रक्षा मंत्रालय ने इस कार्यक्रम के लिए करीब 2,500 करोड़ रुपये के स्तर की मंजूरी दी है। इसमें अधिकतम लगभग 12 अनमैन्ड अंडरवॉटर वाहन डेवलप करने की योजना है।

इस बड़े प्लेटफॉर्म के संभावित मिशनों में समुद्री निगरानी, माइंस से जुड़े ऑपरेशन और सीमित स्ट्राइक क्षमता शामिल हैं। इसमें 533 मिलीमीटर टॉरपीडो ट्यूब और बाहरी पेलोड ले जाने जैसे विकल्प भी होंगे।

जलकपि की तुलना में 100 टन का एक्सएलयूयूवी ज्यादा पेलोड और बड़े उपकरण ले जा सकता है। इस कार्यक्रम की इंडक्शन टाइमलाइन जलकपि के बाद मानी जा रही है। (India Jalakapi XL AUV)

हिंद महासागर में भारत के लिए क्यों अहम हैं अंडरवॉटर ड्रोन?

हिंद महासागर भारत के व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर नजर रखना भारतीय नौसेना की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। समुद्र के नीचे काम करने वाले स्वायत्त वाहन निगरानी के मौजूदा साधनों को अतिरिक्त क्षमता दे सकते हैं।

चीन की नौसेना की हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के बीच ऐसे प्लेटफॉर्म समुद्री स्थिति की जानकारी जुटाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और माइंस जैसे खतरों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। अनमैन्ड वाहन पारंपरिक पनडुब्बियों की जगह लेने के बजाय उनके साथ काम कर सकते हैं और कुछ जोखिम भरे मिशनों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। (India Jalakapi XL AUV)

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  • Herry passport

    Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.

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