📍New Delhi | 22 May, 2026, 8:53 PM
ideaForge Q6 V2 GEO Drone: India’s flagship drone company IdeaForge Technology Limited’s multi-purpose drone "Q6 V2 Geo" has got type certification from the Directorate General of Civil Aviation (DGCA). This certification drone is given in Small Categorie under Rule 2021. This category includes drones from 2 kg to 25 kg.
ideaForge Q6 V2 GEO Drone: Used in a variety of missions
The company says that this drone is especially advanced EnglishDesigned for mapping, mapping, inspection and geospatial data. It is designed to take into account the needs of Government Agencies, Security Forces and Enterprise Sector.
IdeaForge reported that Q6 V2 Geo has been designed to work continuously even in challenging areas. Different types of sensors and payloads can be installed in it, so that it can simultaneously complete a variety of missions.
The Co-founder and CEO Ankit Mehta of IdeaForge Technology Limited confirmed that Q6 V2 Geo has got the DGCA Type Certification. He said this platform has been prepared by taking into account the needs of rising aerial intelligence, surveillance, mapping and geospatial data in enterprise and government sectors.
This drone is capable of capturing high-quality data even under tough conditions, with the help of advanced payloads such as the slider, according to the aritated hostility. He said the focus of the company is on developing an indigenous drone platform that can meet safety, surveys, and administrative needs.
डीजीसीए सर्टिफिकेशन क्यों माना जाता है अहम
भारत में किसी भी ड्रोन को बड़े स्तर पर सरकारी या कमर्शियल इस्तेमाल के लिए डीजीसीए टाइप सर्टिफिकेशन जरूरी माना जाता है। इसका मतलब यह होता है कि ड्रोन सुरक्षा, तकनीकी मानकों और ऑपरेशनल नियमों को पूरा करता है।
डिफेंस और सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि टाइप सर्टिफिकेशन मिलने के बाद किसी ड्रोन का इस्तेमाल सरकारी परियोजनाओं, सर्वे मिशनों और कई संवेदनशील ऑपरेशंस में आसानी से किया जा सकता है।
आइडियाफोर्ज का यह ड्रोन पहले “प्रज्ञा 2025” कार्यक्रम में पेश किया गया था। उसी दौरान कंपनी ने इसे अपनी जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी पहल का हिस्सा बताया था।

कई तरह के मिशन कर सकता है ड्रोन
क्यू6 वी2 जियो को मल्टी-रोल प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित किया गया है। इसमें पांच तरह के अलग-अलग पेलोड कॉन्फिगरेशन लगाए जा सकते हैं।
इसमें लाइडार सिस्टम, लाइडार के साथ आरजीबी इमेजिंग, हाई-रिजॉल्यूशन फोटोग्रामेट्री, 3डी ऑब्लिक इमेजिंग और ड्यूल डे-नाइट पेलोड ऑपरेशन जैसी क्षमताएं शामिल हैं।
ड्रोन का इस्तेमाल सीमा निगरानी, औद्योगिक निरीक्षण, सर्वे, मैपिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग जैसे कामों में किया जा सकता है।
कंपनी के मुताबिक यह ड्रोन कठिन इलाकों में भी हाई-क्वालिटी एरियल डेटा जुटाने में सक्षम है।
45 मिनट से ज्यादा उड़ान भर सकता है
आइडियाफोर्ज के अनुसार क्यू6 वी2 जियो एक बार उड़ान भरने के बाद 45 मिनट से ज्यादा समय तक ऑपरेशन कर सकता है। लंबी उड़ान क्षमता की वजह से इसे बड़े सर्वे मिशनों और लंबी दूरी की मैपिंग के लिए उपयोगी माना जा रहा है। ड्रोन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पहाड़ी इलाकों, जंगलों, नदी क्षेत्रों और मुश्किल भूभाग में भी स्थिर तरीके से काम कर सके।
किन क्षेत्रों में होगा इस्तेमाल
इस ड्रोन का इस्तेमाल कई सरकारी और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जा सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में इसका उपयोग सड़कों, पुलों, बिजली लाइनों और पाइपलाइनों के निरीक्षण के लिए किया जाएगा।
माइनिंग सेक्टर में यह वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस और खनन क्षेत्रों की निगरानी में मदद करेगा। अर्बन प्लानिंग में इसका इस्तेमाल 3डी मैपिंग और शहरों की डिजिटल प्लानिंग के लिए किया जा सकता है।
पर्यावरण से जुड़े कामों में यह ड्रोन ग्लेशियर मैपिंग, नदी बेसिन संरक्षण, जंगलों की निगरानी और एवलांच जोन के अध्ययन में उपयोगी माना जा रहा है।
कृषि क्षेत्र में यह फसलों की स्थिति और एनडीवीआई एनालिसिस जैसे काम कर सकता है।
इसके अलावा डिजास्टर रिस्पॉन्स ऑपरेशंस में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां किसी आपदा प्रभावित इलाके का तेजी से एरियल सर्वे करना जरूरी होता है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी उपयोगी
ड्रोन में लगे सेंसर और कैमरे इसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण बनाते हैं। इसका इस्तेमाल पेरिमीटर सर्विलांस, पेट्रोलिंग और संवेदनशील इलाकों की निगरानी में किया जा सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आधुनिक सुरक्षा ऑपरेशंस में ऐसे ड्रोन की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो दिन और रात दोनों समय काम कर सकें और हाई-रिजॉल्यूशन डेटा उपलब्ध करा सकें।
पूरा जियोस्पेशियल सिस्टम तैयार किया
कंपनी का कहना है कि क्यू6 वी2 जियो केवल एक ड्रोन प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह पूरे जियोस्पेशियल सिस्टम का हिस्सा है। इसके साथ “ब्लूफायर टच” ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम दिया गया है, जो मिशन प्लानिंग और मल्टी-यूएवी कोऑर्डिनेशन में मदद करता है।
इसके अलावा “फ्लाइट क्लाउड” प्लेटफॉर्म के जरिए वीडियो डेटा एनालिसिस, मिशन डेटा मैनेजमेंट और 3डी टेरेन मॉडल तैयार किए जा सकते हैं। कंपनी के मुताबिक यह सिस्टम फ्लाइट से लेकर डेटा प्रोसेसिंग तक पूरा एंड-टू-एंड वर्कफ्लो उपलब्ध कराता है।
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