NEET UG 2026 Paper Airlift: The central government is not in the mood of taking any risk at this time with a re-examination of NEET-UG 2026. The past month paper leaks are being unprecedented about the safety of the net after the dispute. For the first time, the helicopter examination of the Indian Air Force will be used to deliver the papers across the country. While this complete campaign won’t be free. The concerned agencies for airlifting of the question papers as per the formulas must pay the prescribed fee as decided by the Ministry of Defence to the Indian Air Force.
The formulas pointed out that for the NEET-UG examination that took place on June 21, the MI-17 helicopters and other military planes of the Air Force will be helped in delivering different parts of the country. These papers will be first delivered to select Air Force Stations and will be sent to the Examination Centres between link protection from there.
NEET UG 2026 Paper Airlift: Changed Strategy After Paper Leak Dispute
Last year Neat The allegations of paper leaks and irregularities that came to the examination stood a big dispute across the country. The case also took political color and questioned the reliability of the examination system. The Central Government, National Testing Agency and Safety Agencies have then prepared new strategies to fully secure the exam process.
The transportation of question papers has been considered to be the most sensitive stage as per the formulas. This was decided to use military resources instead of being completely dependent on the road and general logistic networks.
The Defence formulas pointed out that the question papers will be transported under special security systems up to 18 airborne stations. Other military transport aircraft can also be used if needed besides MI-17 helicopters.
Free Air Force Helicopter
Often people think that in government actions the army or Air Force The resources are used without any charges, but reality is something else.
According to sources, Indian Air Force does not provide its helicopters or aircraft for any state or government department for free. The agency using based on the recovery rate laid down by the Ministry of Defence has to pay.
This payment is made on the basis of the total time of flying aver. From take-off to landing time is recorded and bills are drawn on the same basis.
Defence sources say that this arrangement is applicable for years and the same procedure is followed in election duty, disaster relief, VVIP movement and other government campaigns. (NEET UG 2026 Paper Airlift)
IAF Mi-17 helicopters to transport NEET re-test question papers from 18 locations. Ensuring secure and timely delivery of question papers remains crucial for maintaining the integrity of the examination process.#NEET2026 #NEETRetest #IAF #Mi17 #NTA #Education #ExamSecurity…
— Raksha Samachar | 🇮🇳 (@RakshaSamachar) June 8, 2018
कितना हो सकता है खर्च?
However Ministry of Defence ने वर्तमान दरें सार्वजनिक नहीं की हैं। ये दरें केवल अधिकृत सरकारी विभागों और एजेंसियों के लिए उपलब्ध रहती हैं।
एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर की लागत का हिसाब प्रति उड़ान घंटे के आधार पर लगाया जाता है। फ्लाइंग ऑवर का मतलब हेलीकॉप्टर के टेक-ऑफ से लेकर लैंडिंग तक का वास्तविक समय होता है, जिसे लॉग बुक में दर्ज किया जाता है।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि एमआई-17 या एमआई-17वी5 जैसे मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टर की रिकवरी कॉस्ट कई लाख रुपये प्रति फ्लाइंग ऑवर तक हो सकती है। हालांकि इसका पेमेंट सीधे वायुसेना के पास नहीं जाएगा, बल्कि रक्षा मंत्रालय के अधीन एक खास अकाउंट में जमा किया जाएगा।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध पुराने सरकारी दस्तावेजों, आपदा प्रबंधन रिकॉर्ड और निजी हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों की दरों के आधार पर सूत्रों का कहना है कि साल 2026 में भारतीय वायुसेना के एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर की कुल रिकवरी या ऑपरेटिंग लागत लगभग 2.8 लाख रुपये से 5.5 लाख रुपये प्रति फ्लाइंग ऑवर के बीच हो सकती है।
तुलना करें तो बेल-412 या एडब्ल्यू-139 जैसे निजी हेलीकॉप्टरों की चार्टर दरें भी आमतौर पर 2.5 लाख से 4 लाख रुपये प्रति घंटे के बीच रहती हैं।
पुराने आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से 2020 के दौरान कुछ सरकारी दस्तावेजों में एमआई-17 श्रेणी के हेलीकॉप्टरों की लागत लगभग 1.8 लाख से 2.5 लाख रुपये प्रति घंटे थी। लेकिन उसके बाद ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, स्पेयर पार्ट्स की लागत, रखरखाव खर्च और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर अपग्रेड कार्यक्रमों के कारण इन दरों में बढ़ोतरी हुई है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आंकड़े अनुमानित हैं क्योंकि रक्षा मंत्रालय की वास्तविक “प्रिस्क्राइब्ड हायरिंग रेट” लिस्ट सार्वजनिक नहीं होती। यह लिस्ट केवल अधिकृत सरकारी विभागों और एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाती है।
इसमें केवल ईंधन ही नहीं बल्कि मेंटनेंस, स्पेयर पार्ट्स, क्रू, बीमा, ओवरहॉल और ऑपरेशनल खर्च भी शामिल होते हैं।
क्यों चुना गया एमआई-17?
भारतीय वायुसेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर देश के सबसे भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट प्लेटफॉर्मों में गिना जाता है। इसका इस्तेमाल सियाचिन से लेकर पूर्वोत्तर और आपदा राहत अभियानों तक में किया जाता है।
यह हेलीकॉप्टर भारी वजन ले जाने की क्षमता रखता है और कठिन मौसम में भी उड़ान भर सकता है। इसी वजह से परीक्षा सामग्री जैसी संवेदनशील सामान को सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए इसे उपयुक्त माना गया।
वायुसेना के बेड़े में मौजूद एमआई-17वी5 संस्करण आधुनिक नेविगेशन, संचार और सुरक्षा प्रणालियों से लैस है। यही कारण है कि राष्ट्रीय महत्व के अभियानों में इसका उपयोग लगातार बढ़ा है। (NEET UG 2026 Paper Airlift)
एक घंटे की उड़ान में खर्च होता है कितना ईंधन?
सूत्रों के मुताबिक एमआई-17वी5 में लगे टीवी3-117वीएम इंजन हर घंटे लगभग 800 से 1000 लीटर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (जेट ईंधन) की खपत करते हैं। मौजूदा ईंधन कीमतों के आधार पर केवल ईंधन का खर्च ही लगभग 60 हजार से 90 हजार रुपये प्रति घंटे तक पहुंच सकता है।
केवल ईंधन की लागत ही एक घंटे में हजारों नहीं बल्कि कई दसियों हजार रुपये तक पहुंच सकती है। इसके अलावा इंजन मेंटेनेंस, टेक्निकल इंस्पेक्शन और क्रू की तैनाती जैसे खर्च अलग होते हैं।
इसी वजह से वायुसेना किसी भी नागरिक या सरकारी कार्य के लिए अपने संसाधन निर्धारित शुल्क पर ही उपलब्ध कराती है।
वायुसेना स्टेशनों से परीक्षा केंद्र तक पहुंचेगा पेपर
जानकारी के अनुसार प्रश्नपत्रों को पहले देशभर के 18 वायुसेना स्टेशनों तक पहुंचाया जाएगा। वहां से उन्हें अलग-अलग राज्यों और शहरों के परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाएगा।
पूरी प्रक्रिया में समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि किसी भी केंद्र पर प्रश्नपत्र देर से पहुंचने की स्थिति पैदा न हो। सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सूत्रों के अनुसार इस बार परीक्षा से जुड़े सभी संवेदनशील चरणों की लगातार निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सैन्य संसाधनों का भी उपयोग किया जा सकता है। (NEET UG 2026 Paper Airlift)
सुरक्षा व्यवस्था कैसी होगी?
सूत्रों के मुताबिक प्रश्नपत्रों को प्रिंटिंग और पैकेजिंग के बाद अत्यधिक सुरक्षित कंटेनरों में रखा जाएगा। इसके बाद उन्हें सैन्य सुरक्षा के बीच एयरफोर्स स्टेशनों तक पहुंचाया जाएगा।
हर स्टेज पर डिजिटल ट्रैकिंग और मल्टी-लेयर मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। प्रश्नपत्रों तक सीमित संख्या में अधिकृत अधिकारियों की ही पहुंच होगी।
एयरफोर्स स्टेशन पहुंचने के बाद राज्य प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी में इन्हें परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं बल्कि किसी भी प्रकार की लॉजिस्टिक गड़बड़ी की संभावना को भी खत्म करना है। (NEET UG 2026 Paper Airlift)
सरकार क्यों नहीं लेना चाहती कोई जोखिम?
नीट परीक्षा देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है। इसमें हर साल लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं और उनके भविष्य का फैसला इसी परीक्षा से होता है।
पिछले महीने सामने आए विवादों के बाद सरकार और परीक्षा एजेंसियों पर पारदर्शी परीक्षा कराने का भारी दबाव है। यही वजह है कि इस बार प्रश्नपत्रों के परिवहन से लेकर वितरण तक हर स्तर पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। (NEET UG 2026 Paper Airlift)

















