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Book Review Generals Jottings: अपनी नई किताब में Lt. Gen (रिटायर्ड) केजे सिंह ने उठाए राष्ट्रीय सुरक्षा और यूक्रेन युद्ध पर सवाल

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📍नई दिल्ली | 21 Nov, 2024, 2:59 PM

Generals Jottings: National Security, Conflicts, and Strategies: भारतीय सेना के पूर्व पश्चिमी कमान के प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) केजे सिंह ने अपनी नई किताब “जनरल्स जॉटिंग्स: नेशनल सिक्योरिटी, कॉन्फ्लिक्ट्स एंड स्ट्रेटेजीज़” (General’s Jottings: National Security, Conflicts, and Strategies) में राष्ट्रीय सुरक्षा पर स्पष्ट रणनीति बनाने और देशव्यापी सहमति की आवश्यकता पर जोर दिया है।

Book Review: "General's Jottings: National Security, Conflicts and Strategies" – Author: Lieutenant General K.J. Singh

यूक्रेन युद्ध और परमाणु हथियारों की अहमियत

किताब में जनरल सिंह ने तर्क दिया है कि अगर यूक्रेन ने अपने परमाणु हथियार नहीं छोड़े होते, तो रूस के साथ युद्ध की नौबत नहीं आती। 1994 में यूक्रेन ने अपने परमाणु हथियार छोड़ दिए थे और इसके बदले रूस की परमाणु छत्रछाया और सुरक्षा की गारंटी ली थी।

उन्होंने लिखा, “अगर यूक्रेन के पास परमाणु हथियार होते, तो रूस शायद इस पर हमला करने से बचता।” उन्होंने यह भी बताया कि इन हालात की पहले ही भविष्यवाणी की गई थी कि परमाणु हथियारों के बिना यूक्रेन युद्ध का सामना करेगा।

परमाणु ठिकानों पर बढ़ते हमले

जनरल सिंह ने हाल के वर्षों में क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान परमाणु ठिकानों पर हमलों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने यूक्रेन के ज़ापोरिज़्ज़िया परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमले का जिक्र किया, जिसे रूसी सेना की कार्रवाई ने नुकसान पहुंचाया। इसी तरह, इस्राइल के स्डोट माइका बेस पर हुए हमलों पर भी उन्होंने चिंता जाहिर की।

उन्होंने कहा, “परमाणु ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे रेडिएशन और प्रसार का खतरा रहता है, जो नागासाकी, हिरोशिमा की तरह पूरी आबादी को लील सकता है।”

परमाणु हथियारों की दौड़

सिंह ने भविष्यवाणी की कि यूक्रेन युद्ध के अनुभव के बाद परमाणु हथियारों को छोड़ने की प्रवृत्ति कमजोर पड़ेगी। उन्होंने ईरान का जिक्र करते हुए कहा कि यह देश परमाणु हथियार बनाने की सीमा के करीब पहुंच रहा है।

यूक्रेन युद्ध में पश्चिम की सीमित मदद

सिंह ने यूक्रेन युद्ध का विश्लेषण करते हुए कहा कि पश्चिमी देशों की मदद सीमित हो रही है। उन्होंने लिखा, “यूक्रेन अपने साझेदारों की अनिच्छा के कारण मुश्किल में है, क्योंकि वे जमीनी सैनिक भेजने को तैयार नहीं हैं।”

उन्होंने पश्चिमी देशों द्वारा दिए गए F-16 फाइटर जेट और जर्मन लेपर्ड टैंकों की तैनाती में आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया। सिंह ने बताया कि इन हथियारों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए ट्रेनिंग और तकनीक से जोड़ने की जरूरत है।

भारत के लिए सबक

रूस-यूक्रेन युद्ध से भारत के लिए सीख लेते हुए सिंह ने लिखा कि जैसे यूक्रेन को अपने सैन्य उपकरणों में बदलाव का सामना करना पड़ा, वैसे ही भारत को भी रूसी उपकरणों पर निर्भरता कम करते समय ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

अन्य सामरिक मुद्दे

यह पुस्तक केवल रणनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है। लेखक ने अपने सैन्य अनुभवों और विभिन्न मोर्चों पर उनकी तैनाती के दौरान सीखे सबकों को भी साझा किया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में उभरती चुनौतियों और दो-फ्रंट युद्ध की संभावनाओं पर लेखक के विचार काफी प्रासंगिक और उपयोगी हैं।

सैन्य अनुभव की झलक

अपनी लंबी सैन्य सेवा में, जनरल सिंह ने सिक्किम कोर, बख्तरबंद डिवीजन, और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया। उनकी किताब “जनरल्स जॉटिंग्स” राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक मुद्दों पर उनके अनुभव और चिंतन का बेहतरीन संग्रह है।

रक्षा समाचार की राय

इस किताब के माध्यम से, लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने न केवल वैश्विक और क्षेत्रीय संघर्षों का विश्लेषण किया है, बल्कि भारत के लिए ठोस राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की आवश्यकता पर भी बल दिया है। उनकी बातों में भारतीय सेना और नीति निर्माताओं के लिए गहरे संदेश छिपे हैं।

“जनरल्स जॉटिंग्स” एक ऐसी पुस्तक है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीतियों में रुचि रखने वालों को जरूर पढ़नी चाहिए। यह पुस्तक केवल एक विश्लेषण नहीं, बल्कि एक चेतावनी और मार्गदर्शिका भी है। लेखक की सोच स्पष्ट और व्यावहारिक है, जो पाठकों को मौजूदा वैश्विक परिदृश्य के प्रति चेताता है।

यदि आप वैश्विक संघर्षों और भारत की सुरक्षा रणनीतियों को समझने में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक निश्चित रूप से आपकी रुचि और ज्ञान को समृद्ध करेगी।

Author

  • Book Review Generals Jottings: अपनी नई किताब में Lt. Gen (रिटायर्ड) केजे सिंह ने उठाए राष्ट्रीय सुरक्षा और यूक्रेन युद्ध पर सवाल

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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