📍नई दिल्ली | 1 Feb, 2026, 1:27 PM
Defence Budget 2026 India: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार एक फरवरी को संसद में अपना नौंवा केंद्रीय बजट पेश किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पेश हुए यूनियन बजट 2026-27 में वित्त मंत्री ने रक्षा मंत्रालय को अब तक का सबसे बड़ा बजट दिया है। इस बार रक्षा मंत्रालय को कुल 7.8 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 6.81 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 15 फीसदी ज्यादा है। सरकार के इस फैसले को देश की सुरक्षा जरूरतों, बदलते वैश्विक हालात और भविष्य की जंग की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस बड़े आवंटन में सबसे खास बात यह है कि रक्षा बलों के आधुनिकीकरण, यानी नए हथियार, प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी खरीदने के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसे कैपिटल आउटले कहा जाता है। यह रकम सीधे तौर पर सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत बढ़ाने पर खर्च होगी। (Defence Budget 2026 India)
Defence Budget 2026 India: क्यों खास है इस बार का रक्षा बजट
पिछले कुछ सालों से भारत की सीमाओं पर हालात आसान नहीं रहे हैं। पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद एलओसी और एलएसी पर लगातार तनाव बना हुआ है। एलओसी पर पाकिस्तान की तरफ से लगातार ड्रोन, आतंकवाद और हाइब्रिड वॉरफेयर जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसके अलावा साइबर हमले और स्पेस से जुड़ी सुरक्षा भी अब बड़े खतरे के रूप में उभर रही हैं।
इन्हीं हालात को देखते हुए सरकार ने इस बार रक्षा बजट में सिर्फ मामूली बढ़ोतरी नहीं, बल्कि एक ठोस और रणनीतिक बढ़त दी है। यह बजट “विकसित भारत @2047” और “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि आने वाले 20-25 सालों में भारत सैन्य रूप से पूरी तरह सक्षम और आत्मनिर्भर बन सके। (Defence Budget 2026 India)
रक्षा बजट का पूरा ब्रेकडाउन
अगर पूरे बजट को समझा जाए, तो रक्षा मंत्रालय के 7.85 लाख करोड़ रुपये को कई हिस्सों में बांटा गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा रेवेन्यू एक्सपेंडिचर का है, जिसमें सैनिकों की सैलरी, पेंशन, भत्ते, ईंधन और मेंटेनेंस जैसे खर्च शामिल होते हैं। यह खर्च जरूरी और टालना मुश्किल होता है।
वहीं, रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के तहत लगभग 3.65 से 3.70 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह हिस्सा पिछले साल की तुलना में करीब 7 से 10 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें सैनिकों की तनख्वाह, भत्ते, हथियारों और सिस्टम्स की मेंटेनेंस, स्टोर्स और ट्रांसपोर्ट जैसे जरूरी खर्च शामिल होते हैं।
पेंशन के लिए इस बार करीब 1.41 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल से लगभग 5 प्रतिशत ज्यादा है। यह रकम देश के पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए बेहद अहम मानी जाती है। जिससे लाखों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा।
India strengthens its defence push 🇮🇳
The Defence Ministry has been allocated Rs 7.8 lakh crore in the 2026–27 budget, with rs 2.19 lakh crore earmarked for modernisation of the armed forces. Big-ticket projects in the pipeline include Rafale fighter jets, submarines, and… pic.twitter.com/cf1jO3Yxak— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) February 1, 2026
इसके अलावा अन्य मदों, जैसे डीआरडीओ के प्रोजेक्ट्स, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर और कोस्ट गार्ड से जुड़ी जरूरतों के लिए करीब 0.40 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें लगभग 12 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, ताकि रिसर्च, सीमावर्ती सड़कों और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
लेकिन इस बजट की असली पहचान है 2.19 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल आउटले, जो पिछले साल के 1.80 लाख करोड़ रुपये से करीब 22 फीसदी ज्यादा है। यही पैसा नए फाइटर जेट, मिसाइल, ड्रोन, सबमरीन और अत्याधुनिक सिस्टम्स पर खर्च होगा। (Defence Budget 2026 India)
आधुनिकीकरण में कहां जाएगा पैसा
कैपिटल आउटले का बड़ा हिस्सा तीनों सेनाओं में बांटा जाएगा। अनुमान है कि इसमें से करीब 50 फीसदी नौसेना, 28 फीसदी थल सेना और 22 फीसदी वायुसेना को मिलेगा। इसका मकसद सिर्फ पुराने हथियार बदलना नहीं, बल्कि भविष्य की जंग के हिसाब से सेनाओं को तैयार करना है।
सरकार ने साफ किया है कि इस कैपिटल आउटले का करीब 75 फीसदी हिस्सा स्वदेशी खरीद पर खर्च किया जाएगा। यानी हथियार और सिस्टम देश में बनी कंपनियों से खरीदे जाएंगे। इससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा। (Defence Budget 2026 India)
फाइटर जेट्स पर बड़ा फोकस
इस बजट में वायुसेना की जरूरतों को खास तौर पर ध्यान में रखा गया है। इंडियन एयर फोर्स की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ लगातार घटती रही है और अब वह जरूरत से काफी नीचे आ गई है। इसे सुधारने के लिए राफेल फाइटर जेट्स की नई डील पर काम चल रहा है।
मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के तहत करीब 114 राफेल जेट्स खरीदने की योजना है। इनमें से ज्यादातर नए और एडवांस्ड स्टैंडर्ड वाले होंगे। इस डील की कुल कीमत 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है। बजट में इसका शुरुआती असर दिखने की उम्मीद है।
इसके अलावा स्वदेशी तेजस मार्क-2 और भविष्य के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट को भी फंडिंग मिलेगी। साथ ही, स्वदेशी जेट इंजन डेवलपमेंट पर भी खर्च बढ़ाया जाएगा, ताकि भारत को विदेशी इंजनों पर निर्भर न रहना पड़े। (Defence Budget 2026 India)
नौसेना को मिलेगी नई ताकत
नौसेना के लिए इस बजट में खास ध्यान सबमरीन और समुद्री सुरक्षा पर दिया गया है। प्रोजेक्ट 75आई के तहत 6 नई सबमरीन बनाने की योजना है, जिनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम होगा। इससे ये सबमरीन लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकेंगी।
इन सबमरीन का निर्माण भारत में ही होगा और इसमें विदेशी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा स्कॉर्पीन क्लास की अतिरिक्त सबमरीन पर भी बातचीत चल रही है। इसका सीधा फायदा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत करने में मिलेगा। (Defence Budget 2026 India)
ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम्स पर जोर
बजट 2026-27 में ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम्स को भी बड़ी प्राथमिकता दी गई है। हाल के सालों में ड्रोन ने युद्ध की तस्वीर बदल दी है। इसी को देखते हुए सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अलग-अलग तरह के ड्रोन खरीदे जाएंगे।
नौसेना के लिए शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम, सेना के लिए सर्विलांस और अटैक ड्रोन, और वायुसेना के लिए एडवांस्ड अनमैन्ड प्लेटफॉर्म्स पर काम तेज होगा। इसके अलावा काउंटर ड्रोन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर भी खर्च बढ़ेगा। (Defence Budget 2026 India)
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बड़ा सहारा
इस रक्षा बजट से देश के डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है। निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई सेक्टर को ज्यादा ऑर्डर मिलेंगे। इससे न सिर्फ रोजगार बढ़ेगा, बल्कि भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट भी मजबूत होगा।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ सालों में भारत का रक्षा निर्यात 5.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो। इस बजट को उस दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
हालांकि बजट में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा बजट अभी भी जीडीपी का करीब 2 फीसदी ही है। जबकि संसदीय समितियां लंबे समय से इसे 3 फीसदी बढ़ाने की सलाह देती रही हैं। पेंशन और सैलरी पर बड़ा खर्च होने की वजह से कैपिटल आउटले पर दबाव बना रहता है। (Defence Budget 2026 India)


