📍नई दिल्ली | 2 Apr, 2026, 10:17 PM
West Asia Crisis IGoM Meeting: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच केंद्र सरकार ने एक बार फिर हालात की समीक्षा की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों का अनौपचारिक समूह (IGoM) की दूसरी अहम बैठक नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में हुई। इस बैठक में सरकार ने मौजूदा हालात, उनके भारत पर असर और उससे निपटने के कदमों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के दौरान रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि हालात अभी अनिश्चित बने हुए हैं, इसलिए चौबीसों घंटे निगरानी रखना और हर कदम सोच-समझकर उठाना जरूरी है।
West Asia Crisis IGoM Meeting: लगातार निगरानी और संतुलित प्रतिक्रिया पर जोर
बैठक में रक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हालात पर लगातार नजर रखी जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखना जरूरी है, ताकि देश के लोगों पर इसका असर कम से कम पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को हर कदम संतुलित तरीके से उठाना होगा, ताकि अचानक होने वाले किसी भी बदलाव का सही तरीके से जवाब दिया जा सके।
मंत्रालयों ने दी तैयारी की जानकारी
इस बैठक में सात अलग-अलग सचिव समूहों ने अपनी-अपनी तैयारियों की जानकारी दी। इनमें वित्त मंत्रालय, ऊर्जा क्षेत्र और अन्य विभाग शामिल थे।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि वैश्विक व्यापार में आई रुकावटों को देखते हुए कई राहत उपाय किए गए हैं। खास तौर पर 40 जरूरी पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह हटा दी गई है, जिससे उद्योगों पर लागत का दबाव कम होगा।
इसके अलावा स्पेशल इकॉनमिक जोन यानी एसईजेड में काम करने वाली यूनिट्स को भी राहत दी गई है। अब वे अपने प्रोडक्ट देश के भीतर कम ड्यूटी पर बेच सकेंगी। इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा मिलेगा।
Chaired the second meeting of the Informal Group of Ministers (IGoM) in New Delhi.
Underlined the importance of Round-the-Clock monitoring of the situation and the need to respond in a calibrated manner to deal with any eventuality.
The IGoM was apprised of the measures being… pic.twitter.com/LT5douBImh
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 2, 2026
निवेश और उद्योग को लेकर उठाए गए कदम
सरकार ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए भी कदम उठाए हैं। पुराने निवेशों पर जीएएआर नियम लागू न करने का फैसला लिया गया है, जिससे निवेशकों को स्पष्टता मिलेगी।
इन सभी उपायों का असर टेक्सटाइल, पैकेजिंग और फार्मा जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा, जहां कच्चे माल की लागत कम हो सकेगी और सप्लाई भी स्थिर रहेगी।
इसके अलावा बैठक में एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने तय किया है कि घरेलू उड़ानों के लिए इसकी कीमतों में हर महीने 25 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी।
रक्षा मंत्री ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इससे आम लोगों पर हवाई किराए का बोझ अचानक नहीं बढ़ेगा।
एलपीजी सप्लाई को दी गई प्राथमिकता
बैठक में घरेलू गैस यानी एलपीजी की सप्लाई पर भी खास ध्यान दिया गया। सरकार ने बताया कि देश में एलपीजी की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी कमी की कोई रिपोर्ट नहीं है।
हालांकि कुछ जगहों पर घबराहट के कारण ज्यादा खरीदारी देखने को मिली, जिससे अस्थायी दबाव बना। इसके पीछे जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग को जिम्मेदार माना गया।
सरकार ने इस पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है और गलत तरीके से काम करने वाले गैस डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ भी कदम उठाए गए हैं।
छोटे सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ी
मजदूरों और कम खपत वाले परिवारों के लिए 5 किलो वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है। 23 मार्च 2026 से अब तक 4.3 लाख से ज्यादा सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।
सरकार उन राज्यों पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जहां डिमांड ज्यादा है, ताकि किसी को भी गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
उद्योगों के लिए भी जारी सप्लाई
बैठक में यह भी बताया गया कि उद्योगों को मिलने वाली एलपीजी सप्लाई भी लगभग सामान्य स्तर पर बनी हुई है। संकट से पहले की तुलना में करीब 80 प्रतिशत सप्लाई जारी है, जिससे उद्योगों का काम प्रभावित न हो।
सरकार अलग-अलग उद्योगों के साथ बैठक कर उनकी जरूरतों को समझ रही है और उसी के अनुसार सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है।
इसके साथ ही, ऑटो एलपीजी की सप्लाई भी जारी है, हालांकि निजी कंपनियों को कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से कुछ जगहों पर कतारें देखने को मिल रही हैं। जहां संभव है, वहां ड्यूल फ्यूल वाले वाहनों को पेट्रोल इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।
इसके अलावा पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि उद्योगों को एक स्थिर विकल्प मिल सके।
अफवाहों पर सरकार की नजर
बैठक में सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का भी मुद्दा उठा। सरकार ने बताया कि कुछ लोग फर्जी तस्वीरें और गलत जानकारी फैलाकर डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और लोगों से अपील की गई है कि वे बिना पुष्टि की जानकारी पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही विश्वास करें।
इस बैठक में कई बड़े मंत्री शामिल हुए। इनमें वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर, रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, विदेश मंत्री एस जयशंकर, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेन्द्र सिंह और रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव मौजूद रहे।
इससे पहले 28 मार्च को भी इसी समूह की पहली बैठक हुई थी, जिसमें अधिकारियों को हालात पर नजर रखने और तेजी से फैसले लेने के निर्देश दिए गए थे। इस दूसरी बैठक में उन निर्देशों की समीक्षा के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

