📍नई दिल्ली | 18 Sep, 2025, 9:51 PM
Smart Cantonments India: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय डिफेंस एस्टेट्स सर्विस (IDES) अधिकारियों से आह्वान किया है कि वे देशभर के कैंटोनमेंट बोर्ड्स को स्मार्ट, ग्रीन और सस्टेनेबल शहरी इकोसिस्टम में बदलने की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि यह कदम सरकार के विकसित भारत विजन के अनुरूप वर्ष 2035 तक इस लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए। रक्षा मंत्री 18 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘मंथन 2025’ के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दे रहे थे। इस सम्मेलन का विषय था – ‘स्ट्रेटेजिक रोडमैप टू विकसित भारत @2047’।
राजनाथ सिंह ने आईडीईएस अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि वे एक साथ दो जिम्मेदारियां निभा रहे हैं – 18 लाख एकड़ से अधिक रक्षा भूमि का प्रबंधन और देशभर के 61 कैंटोनमेंट्स में रहने वाले नागरिकों का कल्याण। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कैंटोनमेंट्स को आधुनिक शहरों की तरह विकसित किया जाए। इसके लिए सिस्टम और प्रक्रियाओं को लगातार अपग्रेड करना होगा ताकि सेवाएं ज्यादा कारगर, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बन सकें।
रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है ताकि लोग अपने घर बैठे ही पारदर्शी और समयबद्ध सेवाओं का लाभ उठा सकें। साथ ही, नागरिकों की भागीदारी बढ़ानी होगी ताकि वे कैंटोनमेंट्स की भविष्य की योजनाओं के साझेदार बन सकें। उन्होंने कहा, “हमें कैंटोनमेंट बोर्ड्स को आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह संस्थाओं में बदलना होगा। जो समय की मांग के मुताबिक सेवाएं दे सकें। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि कैंटोनमेंट में रहने वाले नागरिकों को सर्वोत्तम नागरिक सुविधाएं और शिकायत निवारण की तुरंत व्यवस्था मिले।”
उन्होंने निवासियों के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर जोर देते हुए कहा कि ई-छावनी 2.0 (e-Chhawani 2.0) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को आगे बढ़ाना होगा। इसमें एआई-आधारित शिकायत निवारण, मल्टीलिंगुअल सेवाएं और स्मार्ट हेल्थ सुविधाएं शामिल की जानी चाहिए। राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के कैंटोनमेंट्स को स्मार्ट पावर सिस्टम, रिन्यूएबल एनर्जी ग्रिड, ईवी चार्जिंग हब, स्मार्ट वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और एआई-आधारित सर्विलांस सिस्टम से लैस किया जाना चाहिए।
उन्होंने आईडीईएस और कैंटोनमेंट बोर्ड्स को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की भी जरूरत बताई। इस दिशा में ब्रेनस्टॉर्मिंग कर ठोस फ्रेमवर्क तैयार करने की बात कही। रक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस प्रयास में पूरा सहयोग करेगी।
राजनाथ सिंह ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ डिफेंस एस्टेट्स (DGDE) की उपलब्धियों की सराहना की, जिनमें ईज ऑफ डूइंग को बढ़ावा देने के लिए ई-कनेक्ट जैसे प्लेटफॉर्म की शुरुआत शामिल है। उन्होंने कहा कि कैंटोनमेंट बोर्ड्स पर्यावरण के अनुकूल विकास का उदाहरण पेश कर रहे हैं। “आज जब हरियाली घट रही है, तब कैंटोनमेंट हमें दिखाते हैं कि विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं।”
उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे लगातार खुद को अपग्रेड करें, नई स्किल्स सीखें और ज्ञान बढ़ाएं। उनके अनुसार, काम को सिर्फ नौकरी न मानकर राष्ट्र निर्माण का माध्यम समझना चाहिए। “अपनी प्रतिभा, ऊर्जा और समय का सर्वोत्तम उपयोग कीजिए। हर दिन खुद को बेहतर बनाइए। आपकी हर कोशिश देश को और मजबूत बना रही है।”
इस अवसर पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, डीजीडीई शैलेंद्र नाथ गुप्ता और डीजीडीई-डिजिगनेट शोभा गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


