राजनाथ सिंह ने कहा, “आज हमारे स्वदेशी प्लेटफॉर्म – तेजस हल्का लड़ाकू विमान, एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम, आकाश मिसाइल सिस्टम और स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर – दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि भारत की तकनीक और गुणवत्ता अब विश्वस्तरीय है। यह आत्मविश्वास हमारे वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और नेतृत्व की देन है।”
📍मऊ, मध्य प्रदेश | 28 Aug, 2025, 12:16 AM
Rajnath Singh Ran Samwad 2025: मध्यप्रदेश के मऊ स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय ट्राई सर्विसेज सेमिनार रण संवाद 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत ने कभी किसी देश पर आक्रमण की शुरुआत नहीं की। लेकिन जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती मिली है, भारत ने पूरी ताकत और आत्मविश्वास के साथ उसका जवाब दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में हमेशा संवाद और संघर्ष, दोनों का संतुलन रहा है। महाभारत का उदाहरण देते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि युद्धभूमि में भी संवाद की परंपरा चलती रही। यह भारत की विशेषता है कि यहां ‘शास्त्र’ और ‘शस्त्र’ को एक ही तलवार की दो धार माना जाता है।
राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत शांति प्रेमी राष्ट्र है, लेकिन शांतिवाद का समर्थक नहीं। बिना शक्ति के शांति केवल एक कल्पना है।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि “आज युद्ध केवल हथियारों का खेल नहीं रह गया है। यह तकनीक, खुफिया जानकारी, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के मेल से लड़ा जाएगा। जो देश इस त्रिकोण तकनीक, रणनीति और अनुकूलन क्षमता को साध लेगा, वही असली वैश्विक शक्ति बनेगा।”
Rajnath Singh Ran Samwad 2025: तकनीक और ‘सरप्राइज’ की भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक और आश्चर्य (Surprise) का मेल ही उसकी जटिलता और अप्रत्याशित स्वरूप की सबसे बड़ी वजह है। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास इतनी तेजी से हो रहा है कि एक इनोवेशन को समझने से पहले ही दूसरा सामने आ जाता है और युद्ध की दिशा बदल देता है।
उन्होंने कहा कि “अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAV), हाइपरसोनिक मिसाइलें, साइबर हमले और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फैसले आज के युद्ध की नई पहचान बन चुके हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा पहलू यह है कि इसका कोई स्थायी रूप नहीं है। यह लगातार बदलता रहता है और यही अनिश्चितता दुश्मन को भ्रमित करती है।”
Rajnath Singh Ran Samwad 2025: ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में हालिया ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दिखाया कि भारत की सेनाएं तकनीक-आधारित रणनीति और संयुक्त कार्रवाई से किस तरह त्वरित और निर्णायक सफलता हासिल कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में वायुसेना ने गहराई तक प्रहार कर दुश्मन की क्षमताओं को निष्क्रिय किया, नौसेना ने अरब सागर में दुश्मन की गतिविधियों को रोक दिया और थलसेना ने रणनीतिक मोर्चों पर दबदबा बनाया।
रक्षा मंत्री ने इसे “तकनीक-चालित युद्ध का परफेक्ट उदाहरण” बताया और कहा कि इससे भारत को ऐसे अनुभव मिले जो भविष्य के किसी भी संघर्ष के लिए मार्गदर्शन करेंगे।
Rajnath Singh Ran Samwad 2025: “सुदर्शन चक्र मिशन” का विशेष रूप से उल्लेख
रण संवाद 2025 में अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित “सुदर्शन चक्र मिशन” का विशेष रूप से उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत सरकार की आत्मरक्षा (Self Defence) की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस मिशन के तहत देश के महत्वपूर्ण ठिकानों और सामरिक स्थलों को आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से बने सुरक्षा कवच से ढका जाएगा।
रक्षा मंत्री ने बताया कि सुदर्शन चक्र मिशन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भारत की रक्षा प्रणाली भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम रहे। इसमें उन्नत एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी, डाइरेक्टेड एनर्जी वेपन (Directed Energy Weapons) और अत्याधुनिक स्वदेशी हथियार प्रणालियों को शामिल किया जाएगा।
राजनाथ सिंह ने इस संदर्भ में डीआरडीओ की हालिया उपलब्धियों का भी जिक्र किया और कहा कि संगठन ने इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम और हाई पॉवर्ड डाइरेक्टेड एनर्जी वेपन का सफल परीक्षण किया है। उन्होंने इसे पूरे राष्ट्र की सफलता बताया और कहा कि यह भारत की वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि है।
Ran Samwad 2025: आत्मनिर्भरता: सुरक्षा की रीढ़
राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अटूट नींव है। उन्होंने बताया कि भारत कभी रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा आयातक था, लेकिन आज वह निर्यातक देशों में गिना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “आज हमारे स्वदेशी प्लेटफॉर्म तेजस हल्का लड़ाकू विमान, एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम, आकाश मिसाइल सिस्टम और स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर – दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि भारत की तकनीक और गुणवत्ता अब विश्वस्तरीय है। यह आत्मविश्वास हमारे वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और नेतृत्व की देन है।”
रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में जहां रक्षा उत्पादन 46,425 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इसी तरह, रक्षा निर्यात 10 साल पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
युद्ध का बदलता चेहरा
अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि अब केवल सैनिकों की संख्या या हथियारों का भंडार युद्ध जीतने के लिए पर्याप्त नहीं है। अब सफलता के लिए वास्तविक समय की खुफिया जानकारी, सटीक हथियार और डेटा-आधारित रणनीति अनिवार्य हो गई है।
उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि 2022 में यह युद्ध पारंपरिक हथियारों से शुरू हुआ था, लेकिन तीन साल में ही यह पूरी तरह बदल गया। अब इसमें ड्रोन, सेंसर-आधारित हथियार और सटीक प्रहार करने वाले म्युनिशन निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
अपने भाषण में रक्षा मंत्री ने इतिहास से लेकर आधुनिक समय तक युद्ध के स्वरूप में आए बदलावों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वायु शक्ति निर्णायक बन गई और 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट ने दिखाया कि परमाणु हथियारों ने दुनिया के संतुलन को बदल दिया।
आज के युग में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह साइबर स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तक फैल चुका है।
उन्होंने कहा कि “आज का युद्ध केवल बंदूक या मिसाइलों से नहीं लड़ा जाता। डेटा, सूचना और तकनीकी श्रेष्ठता ही निर्णायक कारक बन गई है।”
भविष्य की तैयारियां और नई पहलें
रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध अब इतने अचानक और अप्रत्याशित हो गए हैं कि यह अनुमान लगाना कठिन है कि कोई संघर्ष कब शुरू होगा और कब खत्म होगा। इसलिए भारत को हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा कि “अगर कोई युद्ध दो महीने, चार महीने, एक साल या पांच साल तक भी खिंच जाए, तो हमें पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। हमारी क्षमता ऐसी होनी चाहिए कि हम किसी भी स्थिति का सामना कर सकें।”
राजनाथ सिंह ने यह भी जानकारी दी कि आर्मी ट्रेनिंग कमांड ने 2027 तक सभी सैनिकों को ड्रोन तकनीक की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है। साथ ही सेना में नई यूनिट्स जैसे रुद्र ब्रिगेड, शक्तिबाण रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी, ड्रोन प्लाटून और भैरव बटालियन बनाई गई हैं, जो भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप हैं।
नौसेना और वायुसेना की मजबूती
राजनाथ सिंह ने बताया कि हाल ही में आईएनएस हिमगिरी और आईएनएस उदयगिरी जैसे स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट नौसेना में शामिल किए गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना ने अरब सागर में दुश्मन की गतिविधियों को पूरी तरह रोक दिया था, जिससे भारत की समुद्री सीमाएं सुरक्षित रहीं।
वायुसेना को भी लगातार नई क्षमताओं से लैस किया जा रहा है। लंबी दूरी की मिसाइलें, अगली पीढ़ी के हथियार और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स ग्रिड वायुसेना की शक्ति को और बढ़ा रहे हैं।
संपूर्ण राष्ट्र की जिम्मेदारी
रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सशस्त्र सेनाओं की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें देश की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक ढांचा, शिक्षा व्यवस्था, तकनीकी क्षमताएं और नागरिक समाज सभी की भूमिका है।
उन्होंने कहा कि “आज की दुनिया में सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह हमारी आर्थिक प्रणाली, औद्योगिक संरचना और तकनीकी नेटवर्क से भी जुड़ी हुई है। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा अब पूरे राष्ट्र का विषय है। इसमें उद्योग, शिक्षाविद, मीडिया और नागरिक समाज सभी की सक्रिय भूमिका जरूरी है।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत कभी युद्ध की शुरुआत नहीं करता और न ही किसी की भूमि पर नजर रखता है। लेकिन अगर किसी ने भारत की भूमि या संप्रभुता को चुनौती दी, तो भारत अपनी पूरी शक्ति से उसका सामना करेगा।
उन्होंने कहा कि “दुनिया हमें केवल हमारी शक्ति के लिए नहीं बल्कि सत्य, शांति और न्याय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के लिए सम्मान देती है। लेकिन जब बात सुरक्षा की आती है, तो हम हर संभव कदम उठाएंगे।”