📍नई दिल्ली/बेंगलुरु | 16 Feb, 2026, 9:45 PM
BEL Missile Integration Facility: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 फरवरी को बेंगलुरु स्थित भारत इलैक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी बीईएल में आकाश मिसाइल की तीसरी और चौथी रेजिमेंट के कॉम्बैट सिस्टम्स को हरी झंडी दिखाई। साथ ही, नई मिसाइल इंटीग्रेशन सुविधा का उद्घाटन के साथ माउंटेन फायर कंट्रोल रडार का औपचारिक अनावरण भी किया।। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी एयर डिफेंस और एंटी-ड्रोन सिस्टम्स ने जिस तरह से खतरों का पता लगाा कर उन्हें निष्क्रिय किया, उसने यह साबित कर दिया कि भारत की घरेलू तकनीक किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
BEL Missile Integration Facility: क्या है मिसाइल इंटीग्रेशन सुविधा?
नई मिसाइल इंटीग्रेशन सुविधा का मकसद अलग-अलग सिस्टम्स और सब-सिस्टम्स को इंटीग्रेट करके कॉम्बैट प्लेटफॉर्म बनाना है। यहां मिसाइल, रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और कंट्रोल यूनिट्स को जोड़कर फाइनल ऑपरेशनल सिस्टम तैयार किया जाएगा। इससे प्रोडक्शन की रफ्तार बढ़ेगी और क्वालिटी कंट्रोल भी बेहतर होगा।
आकाश तीसरी और चौथी रेजिमेंट के कॉम्बैट सिस्टम्स को रवाना किया जाना भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। वहीं माउंटेन फायर कंट्रोल रडार खास तौर पर पहाड़ी इलाकों में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और मिसाइल सिस्टम को सटीक दिशा देने के लिए तैयार किया गया है। (BEL Missile Integration Facility)
स्वदेशी तकनीक पर जोर
दौरे के दौरान रक्षा मंत्री को बीईएल द्वारा विकसित एडवांस स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दी गई। इसमें एआई आधारित सॉल्यूशंस, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, एवियोनिक्स, नेवल प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स और टैंक इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि बीईएल ने नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन्स को मजबूत किया है। इंटीग्रेटेड सिस्टम, रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और डिसीजन सपोर्ट क्षमता ने हमारी कॉम्बैट इफेक्टिवनेस को नए स्तर पर पहुंचाया है। (BEL Missile Integration Facility)
इसके अलावा उन्हें बीईएल में चल रहे रिसर्च एंड डेवलपमेंट कार्यों की भी जानकारी दी गई। इनमें क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट मार्क-2, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, प्रोजेक्ट कुशा (एमआर सैम/एलआर सैम), काउंटर ड्रोन सिस्टम और नेवल वेपन कंट्रोल सिस्टम जैसे प्रमुख कार्यक्रम शामिल हैं।
इन पहलों से जमीन, हवा और समुद्र- तीनों क्षेत्रों में ऑपरेशनल तैयारी मजबूत हो रही है और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो रही है। (BEL Missile Integration Facility)
ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेशी एयर डिफेंस और एंटी-ड्रोन सिस्टम्स ने खतरों को प्रभावी तरीके से निष्क्रिय किया। एआई आधारित थ्रेट प्रिडिक्शन, अर्ली वार्निंग और रिस्पॉन्स मैकेनिज्म ने सैनिकों का भरोसा बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि जब जीत स्वदेशी हथियारों और तकनीक से मिलती है, तो देश का आत्मविश्वास भी दोगुना हो जाता है। (BEL Missile Integration Facility)
एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग पर जोर
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग अब भविष्य की बातें नहीं रह गई हैं। रियल-टाइम डिसीजन मेकिंग, ऑटोनॉमस सिस्टम, साइबर डिफेंस और प्रिसीजन ऑपरेशन्स में इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने बीईएल, अन्य डिफेंस पीएसयू और इंडस्ट्री पार्टनर्स से अपील की कि तकनीकी दौड़ में आगे रहने के लिए लगातार इनोवेशन पर काम करना होगा। स्टार्ट-अप्स, इंडस्ट्री और एकेडेमिया के साथ मिलकर तेज प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर जोर देने की जरूरत है। (BEL Missile Integration Facility)
दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ने स्टार्ट-अप्स और युवा वैज्ञानिकों से बातचीत की। उन्होंने उन्हें ज्यादा से ज्यादा एडवांस स्वदेशी तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए घरेलू उद्योग को टेक्नोलॉजी रेस में आगे रहना होगा। क्रॉस-डिसिप्लिनरी कोलैबोरेशन, इनोवेशन और रैपिड प्रोटोटाइपिंग के जरिए वर्ल्ड-क्लास प्रोडक्ट तैयार करने होंगे। (BEL Missile Integration Facility)



