📍नई दिल्ली | 27 Jan, 2026, 2:17 PM
India EU defence cooperation: भारतीय नौसेना और यूरोपीय संघ के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग अब एक नए स्तर पर पहुंचने जा रहा है। इंडियन ओशन रीजन में बढ़ती चुनौतियों और सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए यूरोपीय संघ ने एक अहम फैसला लिया है। ईयू अब अपना एक लायजन ऑफिसर (एलओ) भारतीय नौसेना के गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) में तैनात करेगा। इस कदम से समुद्री निगरानी, सूचना साझा करने और साझा सुरक्षा प्रयासों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर 27 जनवरी को नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूरोपीय संघ (ईयू) की हाई रिप्रेजेंटेटिव और यूरोपीय कमीशन की वाइस प्रेसिडेंट काजा कलास से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग और इंडियन ओशन रीजन में साझा रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब भारत और यूरोपीय संघ अपने रिश्तों को सिर्फ कूटनीतिक स्तर तक सीमित न रखकर जमीन पर ठोस सहयोग में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि भारत और ईयू लोकतंत्र, बहुलवाद और कानून के शासन जैसे मूल्यों को साझा करते हैं, और यही साझा सोच दोनों को एक मजबूत साझेदारी की ओर ले जाती है। (India EU defence cooperation)
India EU defence cooperation: रक्षा उद्योगों की साझेदारी पर जोर
बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय और यूरोपीय रक्षा उद्योगों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इसे “लार्जर ग्लोबल गुड” यानी बड़े वैश्विक हित के लिए जरूरी बताया। रक्षा मंत्री के अनुसार, यह सहयोग भारत के आत्मनिर्भर भारत विजन के अनुरूप है और साथ ही यूरोपीय संघ की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी यानी रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से भी मेल खाता है।
उन्होंने कहा कि अगर भारत और ईयू की रक्षा सप्लाई चेन एक-दूसरे से जुड़ती हैं, तो इससे एक भरोसेमंद और मजबूत डिफेंस इकोसिस्टम तैयार होगा। यह साझेदारी भविष्य की जरूरतों के हिसाब से सैन्य क्षमताएं विकसित करने में मदद करेगी और एक फोर्स मल्टीप्लायर की तरह काम करेगी। (India EU defence cooperation)
रीआर्म इनिशिएटिव’ में भारत की भूमिका
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत की रक्षा इंडस्ट्री यूरोपीय संघ की ‘रीआर्म इनिशिएटिव’ में अहम भूमिका निभा सकती है। यूरोपीय संघ इस समय अपने रक्षा क्षेत्र में सप्लायर डाइवर्सिफिकेशन पर जोर दे रहा है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके। ऐसे में भारत एक भरोसेमंद पार्टनर के रूप में उभर सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत के पास आज रक्षा उत्पादन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मजबूत आधार है, जिसे यूरोपीय जरूरतों के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे दोनों पक्षों को फायदा होगा।
रक्षा मंत्री ने काजा कलास की भारत यात्रा को खास बताया, क्योंकि यह भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर यूरोपीय संघ की मौजूदगी दोनों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का प्रतीक है।
काजा कलास ने भी गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर परेड में यूरोपीय संघ की भागीदारी उनके लिए गर्व का विषय है और यह भारत–ईयू रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। (India EU defence cooperation)

इंडियन ओशन रीजन में मिलकर काम करने पर सहमति
काजा कलास ने बैठक के दौरान कहा कि भारत और यूरोपीय संघ को इंडियन ओशन रीजन में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र ग्लोबल ट्रेड और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के अनुभव और बेस्ट प्रैक्टिस से सीख सकते हैं।
उन्होंने जॉइंट एक्सरसाइज के जरिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इससे न सिर्फ आपसी समझ मजबूत होगी, बल्कि समुद्री खतरों से निपटने की क्षमता भी बढ़ेगी। (India EU defence cooperation)
भारतीय नौसेना के IFC-IOR में ईयू की मौजूदगी
इस बैठक में एक और अहम मुद्दे पर सहमति बनी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूरोपीय संघ के उस प्रस्ताव का स्वागत किया, जिसके तहत ईयू एक लायजन ऑफिसर (एलओ) को भारतीय नौसेना के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर), गुरुग्राम में तैनात करेगा।
यह लायजन ऑफिसर समुद्री डकैती यानी काउंटर पाइरेसी और इंडियन ओशन रीजन में उभरते खतरों के आकलन में भारतीय नौसेना के साथ बेहतर तालमेल बनाएगा। इससे ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन मजबूत होगा और दोनों पक्षों के बीच रियल टाइम जानकारी साझा करना आसान होगा।
इससे पहले जर्मनी के चांसलर की भारत यात्रा के दौरान इंडियन ओशन रीजन में साझा सुरक्षा और सूचना साझेदारी को लेकर अहम सहमति बनी थी। जर्मनी ने भी अपना लायजन ऑफिसर आईएफसी-आईओआर में तैनात करने पर सहमति दी थी। (India EU defence cooperation)
क्या है आईएफसी-आईओआर
इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) भारतीय नौसेना का एक बेहद अहम केंद्र है, जिसकी स्थापना समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए की गई है। यह केंद्र गुरुग्राम में स्थित है और इसका मुख्य काम हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली हर तरह की गतिविधियों पर नजर रखना है।
आईएफसी-आईओआर के जरिए अलग-अलग देशों की नौसेनाएं और समुद्री एजेंसियां आपस में जानकारी साझा करती हैं। यहां से जहाजों की आवाजाही, समुद्री डकैती, तस्करी, आतंकवादी गतिविधियों और संदिग्ध मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जाती है। अगर किसी इलाके में कोई खतरा दिखता है, तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित देशों तक पहुंचाई जाती है। (India EU defence cooperation)
आईएफसी-आईओआर को भारतीय नौसेना द्वारा होस्ट किया जाता है और इसमें मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के अधिकारी काम करते हैं। इसके साथ ही केंद्र में अंतरराष्ट्रीय लियाजन अफसर भी तैनात होते हैं, जो अन्य देशों से आते हैं। ये साझेदारी भागीदार देशों के प्रतिनिधि होते हैं और साझा समुद्री सुरक्षा जानकारी और सहयोग को बढ़ाते हैं।
अब तक आईएफसी-आईओआर में लगभग 12 देशों के लियाजन अफसर तैनात रहे हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली, जापान, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, श्रीलंका, सेशेल्स, सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के अफसर शामिल रहे हैं। केंद्र में तकनीकी और एनालिटिकल टीमों के सदस्य भी काम करते हैं, जो 24×7 समुद्री जानकारी एकत्रित और विश्लेषित करते हैं।
यह केंद्र हिंद महासागर के मैरिटाइम (समुद्री) सुरक्षा पर नजर रखता है और 28 देशों से 76 से ज्यादा लिंक-अप्स बनाए हुए है, जिसमें विभिन्न देशों और मल्टी-नेशनल सुरक्षा केंद्र शामिल होते हैं। (India EU defence cooperation)
भारत–ईयू रिश्तों में नया अध्याय
कुल मिलाकर, यह मुलाकात भारत और यूरोपीय संघ के रक्षा संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। जहां एक ओर भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यूरोपीय संघ भी भरोसेमंद साझेदारों के साथ अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत करना चाहता है। (India EU defence cooperation)



