📍नई दिल्ली | 8 Apr, 2026, 10:28 PM
5kg LPG Cylinder Supply: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने देश की तैयारियों का जायजा लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इंटरनल ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (IGoM) की अहम बैठक में देश की एनर्जी, खाद्य और जरूरी सामानों की सप्लाई को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में रक्षा मंत्री ने सभी विभागों को साफ निर्देश दिया कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखी जाए और आपसी समन्वय मजबूत बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस तैयारी, कोऑर्डिनेशन और रेजिलिएंस यानी मजबूती पर है, ताकि किसी भी तरह की चुनौती का असर देश पर कम से कम पड़े।
उन्होंने यह भी बताया कि देश में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और खाद जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई लगातार बनी हुई है। आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सप्लाई चेन पर लगातार नजर रखी जा रही है।
5kg LPG Cylinder Supply: एनर्जी सप्लाई पर खास नजर
बैठक में एनर्जी सेक्टर को लेकर आईजीओएम को बताया गया कि पिछले 40 दिनों में भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सबसे ज्यादा जहाजों को सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की है। इस दौरान 8 एलपीजी जहाज, जिनमें करीब 340 हजार मीट्रिक टन गैस थी, सुरक्षित रूप से भारत पहुंचे। यह मात्रा देश की लगभग 11 दिनों की जरूरत के बराबर मानी जा रही है।
यह भी बताया कि देश में कहीं भी एलपीजी की कमी की खबर नहीं है और घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है। इसके साथ ही कमजोर वर्गों और मजदूरों के लिए 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई बढ़ा दी गई है, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
#India welcomes the ceasefire in #WestAsia and hopes it paves the way for lasting peace.#De-escalation, #dialogue & #diplomacy remain the only path forward.
Unimpeded navigation through the #StraitofHormuz and stability in global trade are essential. #WestAsia #Ceasefire…— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) April 8, 2026
इंडस्ट्री के लिए ईंधन की व्यवस्था
सरकार ने इंडस्ट्री को ध्यान में रखते हुए भी एक अहम फैसला लिया है। अब नॉन-डोमेस्टिक यानी औद्योगिक उपयोग के लिए एलपीजी की सप्लाई बढ़ाई गई है। करीब 70 प्रतिशत ईंधन की मांग इंडस्ट्री को देने का फैसला लिया गया है, ताकि फार्मा, फूड, स्टील, कृषि और पैकेजिंग जैसे जरूरी सेक्टर प्रभावित न हों।
इस कदम का मकसद यह है कि जरूरी सामानों की सप्लाई चेन में कोई रुकावट न आए और उत्पादन लगातार चलता रहे।
पीएनजी को बढ़ावा
बैठक में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देने की बात सामने आई। सरकार के अभियान के तहत करीब 3.16 लाख नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले तीन गुना ज्यादा हैं। इसके साथ ही 16 हजार से ज्यादा लोगों ने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किया है।
खाद्य सुरक्षा पर पूरी तैयारी
खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने भरोसा जताया है। बैठक में बताया गया कि देश में चावल और गेहूं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के तहत जरूरतमंद लोगों को अनाज मिलता रहेगा।
सरकार जरूरत पड़ने पर ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत बाजार में अतिरिक्त अनाज भी जारी कर सकती है, ताकि कीमतें नियंत्रित रहें और महंगाई न बढ़े। इसके लिए एफसीआई के पास पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
रबी सीजन और खरीद व्यवस्था
रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के तहत गेहूं की खरीद प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। राज्य सरकारों के साथ मिलकर इसकी तैयारी की जा रही है। पैकेजिंग सामग्री की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि खरीद और भंडारण में कोई दिक्कत न आए।
खाने के तेल और चीनी का पर्याप्त स्टॉक
बैठक में खाने के तेल की सप्लाई को लेकर भी जानकारी दी गई। बताया गया कि इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देशों से आयात सामान्य रूप से जारी है। इसके अलावा सरसों के उत्पादन में बढ़ोतरी से घरेलू सप्लाई भी मजबूत हुई है।
चीनी के मामले में भी देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। साल 2025-26 में उत्पादन पर्याप्त रहने की उम्मीद है। अब तक 15.80 लाख मीट्रिक टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई है, जिसमें से करीब 3.73 लाख मीट्रिक टन निर्यात हो चुका है।
कीमतों पर नजर
सरकार रोजाना 40 जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों पर नजर रख रही है। देशभर के 578 केंद्रों से डेटा लिया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की असामान्य बढ़ोतरी को तुरंत पकड़ा जा सके।
अब तक ज्यादातर चीजों की कीमतें स्थिर बताई गई हैं, हालांकि खाने के तेल में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर देखी गई है। प्याज की कीमत को नियंत्रित रखने के लिए जल्द ही बफर स्टॉक के लिए खरीद शुरू की जाएगी।
सप्लाई चेन बनाए रखने की कोशिश
सरकार का पूरा फोकस इस बात पर रहा कि जरूरी चीजों की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहे। इसके लिए अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। एनर्जी, खाद्य, कृषि और उद्योग से जुड़े फैसले इसी दिशा में लिए गए हैं, ताकि देश के अंदर किसी भी तरह की कमी या असंतुलन की स्थिति न बने।
इस बैठक में कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए और हर सेक्टर की स्थिति की समीक्षा की गई। इसमें वित्त, विदेश, कृषि, पेट्रोलियम, खाद्य और अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र की जानकारी साझा की।

