📍नई दिल्ली | 12 Feb, 2026, 6:51 PM
HAL Dornier 228 Deal: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 2,312 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इस समझौते के तहत भारतीय तटरक्षक बल यानी इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए आठ डॉर्नियर 228 विमान खरीदे जाएंगे। यह खरीद “बाय (इंडियन)” कैटेगरी के तहत की गई है, यानी ये विमान पूरी तरह भारत में बनाए जाएंगे।
ये सभी विमान एचएएल की ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट डिविजन, कानपुर में तैयार होंगे। डॉर्नियर 228 कोई नया विमान नहीं है। यह पिछले कई दशकों से भारतीय नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल में इस्तेमाल हो रहा है। अब जो नए विमान मिलेंगे, वे पहले से ज्यादा आधुनिक और अपग्रेड उपकरणों से लैस होंगे। (HAL Dornier 228 Deal)
यह कॉन्ट्रैक्ट 12 फरवरी को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में साइन किया गया। इन विमानों के साथ ऑपरेशनल रोल इक्विपमेंट भी मिलेगा। इसमें समुद्री निगरानी रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रा-रेड यानी ईओ/आईआर सिस्टम, कम्युनिकेशन सिस्टम और अन्य जरूरी सेंसर शामिल होंगे। ईओ/आईआर सिस्टम की मदद से दिन और रात दोनों समय समुद्र में गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। धुंध, खराब मौसम या अंधेरे में भी यह सिस्टम गर्मी के आधार पर नाव, जहाज या संदिग्ध गतिविधि को पहचान सकता है। (HAL Dornier 228 Deal)
Ministry of Defence has signed a ₹2,312 crore contract with Hindustan Aeronautics Limited (HAL), Kanpur for 8 Dornier 228 aircraft under the Buy (Indian) category for the Indian Coast Guard.
The deal includes Operational Role Equipment and will strengthen coastal surveillance… pic.twitter.com/9lRnybQYty— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) February 12, 2026
डॉर्नियर 228 एक ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान है। यह हल्का लेकिन मजबूत विमान है, जो समुद्री निगरानी, खोज और बचाव अभियान, प्रदूषण निगरानी, तस्करी रोकने और अवैध मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करता है। इसकी फ्लाइग रेंज 1,000 किलोमीटर से ज्यादा है और यह कई घंटों तक लगातार उड़ान भर सकता है। भारतीय तटरक्षक बल के लिए यह बहुत उपयोगी प्लेटफॉर्म माना जाता है।
भारत का एक्सक्लूसिव इकोनोमिक जोन यानी ईईजेड करीब 20 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा है। इतने बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी आसान काम नहीं है। इन नए विमानों के जुड़ने से तटरक्षक बल की हवाई निगरानी क्षमता और मजबूत होगी। समुद्री डकैती, तस्करी, घुसपैठ या किसी जहाज से आई मदद पर तेजी से रेस्पॉन्स देना आसान होगा। (HAL Dornier 228 Deal)
इस कॉन्ट्रैक्ट का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। एचएएल की प्रोडक्शन सिस्टम मजबूत होगी और उसके साथ काम करने वाली छोटी और मध्यम उद्योग इकाइयों यानी एमएसएमई को भी काम मिलेगा। इसके अलावा मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ के क्षेत्र में भी लंबे समय तक काम के अवसर बनेंगे।
यह सौदा आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल को मजबूत करता है। सरकार का लक्ष्य है कि रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम की जाए और ज्यादा से ज्यादा उपकरण देश में ही बनाए जाएं। डॉर्नियर 228 कार्यक्रम इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इससे पहले आज डीएसी की बैठक में तटरक्षक बल के डॉर्नियर विमानों के लिए ईओ/आईआर सिस्टम खरीदने की जरूरत को भी मंजूरी दी गई है। इससे मौजूदा विमानों की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। (HAL Dornier 228 Deal)


