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Differences on Theatre Commands: क्या थिएटर कमांड को लेकर सेनाओं में बढ़ रहे हैं मतभेद? CDS जनरल चौहान ने कैसे निकाला बीच का रास्ता?

CDS जनरल चौहान ने कहा, “अगर असहमति नजर आ रही है तो यह अच्छी बात है, क्योंकि हम इसे देशहित में सुलझा लेंगे...

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📍मऊ, मध्य प्रदेश | 27 Aug, 2025, 11:36 PM

Differences on Theatre Commands: भारतीय सेनाओं की टॉप लीडरशिप में थिएटर कमांड के स्ट्रक्चर को लेकर मतभेद सामने आ गए हैं। जहां नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने बुधवार को थिएटराइजेशन की पैरवी की। तो वहीं, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने यह स्वीकार किया कि इस मुद्दे पर असहमतियां हैं, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। इससे एक दिन पहले ही एयरफोर्स चीफ एपी सिंह ने थिएटर कमांड को लेकर जल्दबाजी नहीं करने की बात कही थी।

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Differences on Theatre Commands: क्या कहा था एयरफोर्स चीफ ने?

मऊ के आर्मी वॉर कालेज में आयोजित दो दिवसीय रण संवाद कार्यक्रम में बोलते हुए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने थिएटर कमांड के प्रस्तावित स्ट्रक्चर को लेकर अलग बात कही थी। उन्होंने सुझाव दिया कि मिलिट्री कॉर्डिनेशन का स्स्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए जिसे सीधे तीनों सेनाओं के प्रमुख मिलकर ऑपरेट करें। वायुसेना प्रमुख का कहना था कि इस स्तर पर जॉइंट प्लानिंग और फैसले अधिक व्यावहारिक होंगे और इससे अनावश्यक नई परतें जोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने यह भी कहा था कि अभी थिएटर कमांड लागू करने का समय नहीं है। उन्होंने समझाया कि इस तरह की जल्दबाजी से तीनों सेनाओं की कोर स्ट्रेंथ को नुकसान हो सकता है।

एयर चीफ का कहना था कि “हमें अभी किसी नए स्ट्रक्चर की जरूरत नहीं है। जो सिस्टम मौजूद है, उसी के जरिए बेहतर काम हो सकता है। हमें दिल्ली में एक जॉइंट प्लानिंग और कॉर्डिनेशन सेंटर बनाना चाहिए, जहां से योजनाएं तैयार हों और फिर उनका क्रियान्वयन अलग-अलग स्तरों पर किया जाए।”

वायुसेना की चिंता यह है कि उसके पास सीमित संख्या में विमान, रिफ्यूलर और निगरानी प्रणाली (AWACS) हैं। अगर हवाई संसाधन अलग-अलग थिएटर कमांड को दे दिए गए, तो वायुसेना तेजी से किसी भी मोर्चे पर अपने संसाधन नहीं भेज पाएगी। वर्तमान में वायुसेना सिर्फ 48 घंटों में अपने संसाधनों को किसी भी हिस्से में भेज सकती है, और यही उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है।

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Differences on Theatre Commands: नौसेना प्रमुख ने किया समर्थन

वहीं नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने थिएटराइजेशन का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नौसेना इस सुधार को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि तीनों सेनाओं के बीच कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और कॉम्बैट यानी युद्धक क्षमता का बेहतर कॉर्डिनेशन हो। हमें एक साझा ऑपरेशनल पिक्चर और जॉइंट प्लानिंग बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।”

नौसेना प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि वर्तमान में भी तीनों सेनाएं जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन को मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और थिएटर कमांड उसका अंतिम स्वरूप होगा।

नौसेना प्रमुख ने यह भी बताया कि समुद्री क्षेत्र में नए खतरे उभर रहे हैं। मछली पकड़ने वाली नावें और रिसर्च वेसल अब आधुनिक तकनीक से लैस होकर निगरानी और सूचनाएं इकट्ठा कर रहे हैं, जिन्हें सैन्य उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

CDS ने साधा संतुलन

दो सेनाओं के अलग-अलग विचार सामने आने के बाद, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बीच का रास्ता अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि मतभेद होना कोई बुरी बात नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि हम खुलकर चर्चा कर रहे हैं।

सीडीएस ने कहा, “अगर असहमति नज़र आ रही है तो यह अच्छी बात है, क्योंकि हम इसे देशहित में सुलझा लेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि तीनों सेनाओं में भरोसा है और हम एक-दूसरे की बात सुनने को तैयार हैं।”

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि थिएटर कमांड पर काम तेज करना होगा। “शायद हमें यह काम 10 साल पहले ही शुरू कर देना चाहिए था। अब देर हो चुकी है, लेकिन हमें इस कमी को जल्द पूरा करना होगा।”

जनरल चौहान ने कहा, “सीडीएस बनने के बाद से मेरा उद्देश्य तीनों सेनाओं में जॉइंटनेस को बढ़ावा देना रहा है। आज हम खुलकर अपनी राय रखते हैं, मतभेदों पर चर्चा करते हैं और फिर भी एक साझा समाधान तक पहुंचते हैं। यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।” सीडीएस ने यह भी कहा कि विचार-विमर्श की यह परंपरा तीनों सेनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह साबित होता है कि वे जॉइंटनेस और सहयोग के लिए गंभीर हैं।

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उन्होंने कहा कि भविष्य में केवल सेना, वायुसेना और नौसेना ही नहीं, बल्कि खुफिया एजेंसियों, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और तकनीकी संगठनों के साथ भी गहन तालमेल जरूरी होगा।

गौरतलब है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद औपचारिक रूप से 1 जनवरी 2020 को अस्तित्व में आया था, जब जनरल बिपिन रावत को देश का पहला सीडीएस नियुक्त किया गया। उनके निधन के बाद सितंबर 2022 में जनरल अनिल चौहान ने यह जिम्मेदारी संभाली। सरकार ने सीडीएस को थिएटर कमांड्स बनाने और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करने का जिम्मेदारी सौंपी है।

जनरल चौहान ने कहा कि थिएटर कमांड की दिशा में आगे बढ़ने की प्रक्रिया को और तेज करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “यकीन रखिए, हम पूरी कोशिश कर रहे हैं और इसे आगे ले जाएंगे।”

क्या है थिएटर कमांड?

थिएटर कमांड के कॉन्सेप्ट का मतलब है कि सेना, नौसेना और वायुसेना को एक ही कमांडर के अधीन रखा जाए। यह कमांडर किसी खास भौगोलिक क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा संभाले और उसके पास सभी तरह के संसाधन जैसे टैंक, तोप, जहाज, विमान, हेलिकॉप्टर और सैनिक एक साथ हों।

अभी भारतीय सेना और वायुसेना के पास सात-सात कमांड हैं और नौसेना के पास तीन। यानी कुल 17 स्वतंत्र कमांड काम कर रहे हैं। चीन ने 2016 में अपने सात सैन्य क्षेत्रों को पांच थिएटर कमांड में बदल दिया था, जिनमें भारत से सटे इलाके उसके पश्चिमी थिएटर कमांड के अंतर्गत आते हैं।

भारत में डिफेंस रिफॉर्म्स 2019 में शुरू हुए थे, जब डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स का गठन हुआ और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद सृजित किया गया। तब से लेकर अब तक थिएटर कमांड के कॉन्सेप्ट पर लगातार विचार-विमर्श चल रहा है।

भविष्य के युद्ध की नई तस्वीर

जनरल चौहान ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध केवल जमीन या आसमान तक सीमित नहीं रहेंगे। अब यह घनी आबादी वाले शहरों, रेगिस्तानों, समुद्र के भीतर, अंतरिक्ष और साइबर स्पेस तक फैलेगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि शहरी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए हल्के ड्रोन, डिटेक्शन सिस्टम और नई तकनीक निर्णायक साबित होंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अब युद्ध केवल संगठित सेनाओं के बीच नहीं हो रहे। आज पैरामिलिट्री फोर्स, निजी सुरक्षा कंपनियां, भाड़े के सैनिक और टेक्नोलॉजी आधारित हथियार प्रणाली भी सक्रिय हैं। आने वाले समय में रोबोट और स्वचालित हथियार भी युद्ध का हिस्सा बन सकते हैं।

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सीडीएस ने कहा कि आज हमें सिर्फ स्कॉलर वॉरियर ही नहीं, बल्कि टेक वॉरियर और इंफ्लुएंस वॉरियर की भी जरूरत है। जहां स्कॉलर वॉरियर युद्ध की कला और विज्ञान को समझेगा। तो टेक वॉरियर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करेगा। जबकि इंफ्लुएंस वॉरियर नैरेटिव, सूचना और जनमत को नियंत्रित करेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ेगी भूमिका

जनरल चौहान ने तकनीकी विकास को युद्ध का निर्णायक पहलू बताया। आधुनिक युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स निर्णायक भूमिका निभाएंगे। डायरेक्टेड एनर्जी वेपन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर युद्धक्षेत्र की दिशा को पूरी तरह बदल देंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि आज साइबर वारफेयर, ऑनलाइन प्रोपेगैंडा और नैरेटिव ऑपरेशंस व्यक्तिगत स्तर तक पहुंच चुके हैं। आम नागरिक भी अब युद्ध का हिस्सा बन गए हैं और सोशल मीडिया, साइबर अभियानों तथा ऑनलाइन नैरेटिव्स के जरिए सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

रण संवाद से मिली सीख

रण संवाद 2025 के दो दिनों की चर्चा का सार प्रस्तुत करते हुए सीडीएस ने कहा कि असमानता अब शक्ति संतुलन का नया आधार बन चुकी है। सटीकता पारंपरिक भारी बल प्रयोग की जगह ले रही है। युद्ध धीरे-धीरे मानव संचालित से मशीन संचालित होता जा रहा है, जिससे नैतिक सवाल भी उठेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नैरेटिव बिल्डिंग अब केवल मीडिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि युद्ध का निर्णायक पहलू बन गई है।

जनरल चौहान ने यह भी कहा कि युद्ध में काइनेटिक ऑपरेशंस और इंफॉर्मेशन ऑपरेशंस का इंटीग्रेशन अब अनिवार्य हो गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि रण संवाद जैसे मंच भविष्य के युद्धों को समझने और भारतीय सेनाओं की तैयारियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

 

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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