📍नई दिल्ली | 8 Nov, 2025, 12:26 PM
Defence Projects in Ladakh: भारत सरकार ने लद्दाख में 12 अहम डिफेंस प्रोजेक्टस को मंजूरी दी है। नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्टैंडिंग कमेटी ने इन परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि ये परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से भारत की ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूती मिलेगी। खासकर ऐसे समय में जब चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी लगातार इस इलाके अपना इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है।
यह फैसला हाल ही में हुई बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने की थी। इन परियोजनाओं में चुशुल में ब्रिगेड मुख्यालय, लेह में आर्मी कैंप, गोला-बारूद भंडारण केंद्र, आर्टिलरी बेस और एक ट्रेनिंग नोड शामिल है। साथ ही अरुणाचल प्रदेश के ईगलनेस्ट वाइल्डलाइफ सेंचुरी में एक स्थायी पुल बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।
Defence Projects in Ladakh: पैंगोंग झील से चुशुल तक कई प्रोजेक्ट्स
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों की तैनाती और लॉजिस्टिक सपोर्ट को बेहतर बनाना है। खासकर पैंगोंग त्सो झील से लेकर माउंट ग्या तक फैले क्षेत्र में तैनात काउंटर इंसरजेंसी फोर्स के लिए एक ट्रेनिंग नोड स्थापित किया जाएगा।
सूत्रों ने कहा, “क्षेत्र में पीएलए की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए, हाई लेवल ऑपरेशनल तैयारियां बेहद जरूरी हैं। इसके लिए 15,000 फीट की ऊंचाई पर सुपर हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सुविधाएं जरूरी हैं ताकि सैनिकों को वास्तविक परिस्थितियों में प्रशिक्षण मिल सके।” यह ट्रेनिंग नोड तारा बटालियन के पास बनाया जाएगा, जो चुशुल सब-सेक्टर का हिस्सा है।
पर्यावरण और सुरक्षा के बीच संतुलन
इन परियोजनाओं में से कई चांगथांग कोल्ड डेजर्ट सेंचुरी और काराकोरम वाइल्डलाइफ सेंचुरी के भीतर हैं। इस वजह से पर्यावरण मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि इकोसिस्टम पर कम से कम असर पड़े।
प्रशिक्षण नोड और गोला-बारूद भंडारण सुविधाओं के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि का चयन बेहद सावधानी से किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजनाएं पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देंगी।
दो बड़े गोला-बारूद भंडारण केंद्र
लद्दाख में दो फॉर्मेशन अम्युनिशन स्टोरेज फैसिलिटी स्थापित की जा रही हैं, एक चांगथांग सेंचुरी में त्सोग्त्सालू क्षेत्र में और दूसरी काराकोरम सेंचुरी में। ये क्रमशः 24.2 हेक्टेयर और 47.1 हेक्टेयर क्षेत्र में बनाई जाएंगी।
इन इलाकों में दुर्लभ वन्यजीव जैसे तिब्बती भेड़िया, स्नो लेपर्ड, वाइल्ड याक और भड़ल (ब्लू शिप) पाए जाते हैं। पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है कि निर्माण कार्य के दौरान इन संवेदनशील प्रजातियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
चुशुल में ब्रिगेड मुख्यालय
एक और अहम परियोजना में चुशुल में 40 हेक्टेयर भूमि पर 142 इंफैंट्री ब्रिगेड हेडक्वार्टर बनाने की मंजूरी दी गई है। मंत्रालय के अनुसार, यह मुख्यालय एलएस के पास जरूरी कमांड और कंट्रोल बनाए रखने में मदद करेगा। 142 इंफैंट्री ब्रिगेड की यूनिट्स पहले से ही एलएसी के साथ तैनात हैं। वहीं, बेहतर कॉर्डिनेशन के लिए हेडक्वार्टर का चुशुल में होना बेहद जरूरी है।
2020 के गलवान संघर्ष के बाद तेज हुईं गतिविधियां
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत ने गलवान संघर्ष के बाद से पूर्वी लद्दाख में स्ट्रेटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर कंस्ट्रक्शन को तेज कर दिया है। पहले भी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने कई अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिनमें फॉरवर्ड एविएशन बेस, मिसाइल लॉन्चिंग सुविधा और दौलत बेग ओल्डी तक वैकल्पिक सड़कें शामिल हैं। इन परियोजनाओं से सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों की मोबिलाइजेशन, रसद आपूर्ति और तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।


