📍नई दिल्ली | 28 Jan, 2026, 8:47 PM
Defence Budget 2026: बजट 2026 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला डिफेंस बजट होगा और माना जा रहा है कि सरकार इसमें भारतीय सेनाओं के लिए अब तक का सबसे बड़ा कैपिटल पुश दे सकती है। सूत्रों की मानें तो इस बार रक्षा मंत्रालय का कुल बजट 7 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकता है। केवल हथियारों और मिलिटरी इक्विपमेंट्स की खरीद के लिए रखा जाने वाला कैपिटल बजट 2 लाख करोड़ रुपये से ऊपर हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बजट होगा।
Defence Budget 2026: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीतिक सोच
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई के बाद सरकार यह मानकर चल रही है कि आने वाले वर्षों में सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ेंगी। वहीं, यह चुनौतियां सिर्फ सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए डोमेन में भी होंगी।
इसी बदली हुई सोच का असर बजट 2026 में दिखने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के लिए डबल डिजिट बढ़ोतरी, यानी कम से कम 10 फीसदी या उससे ज्यादा का इजाफा तय माना जा रहा है। (Defence Budget 2026)
क्या 7 लाख करोड़ के पार जाएगा रक्षा बजट
पिछले बजट में रक्षा मंत्रालय को करीब 6.81 लाख करोड़ रुपये मिले थे। यह रकम अपने आप में बड़ी थी, लेकिन इस बार सरकार इससे काफी आगे जाने की तैयारी में है। अगर रक्षा बजट 7 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जाता है, तो यह न सिर्फ एक आर्थिक फैसला होगा, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक स्टेटमेंट भी माना जाएगा कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहता।
इस कुल बजट में सबसे अहम हिस्सा कैपिटल एक्सपेंडिचर, यानी हथियार, फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, मिसाइल सिस्टम, रडार और दूसरे आधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्म की खरीद का होगा। (Defence Budget 2026)
कैपिटल बजट में ऐतिहासिक उछाल
बजट 2025-26 में कैपिटल एक्सपेंडिचर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये था, जो कुल रक्षा बजट का लगभग 26 फीसदी था। बजट 2026 में यह आंकड़ा 2 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जाने की संभावना है।
रक्षा जानकारों का मानना है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ रकम तक सीमित नहीं होगी, बल्कि प्राथमिकताओं में भी बदलाव दिखेगा। सरकार अब ज्यादा जोर उन सिस्टम्स पर दे रही है, जो फोर्स मल्टीप्लायर की तरह काम करते हैं।
वायुसेना को मिलेगा बड़ा हिस्सा
इस बार भारतीय वायुसेना के लिए बजट खास तौर पर अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, एयर-टू-एयर रिफ्यूलर और एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (अवाक्स) की खरीद को लेकर तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।
अवाक्स ऐसे सिस्टम होते हैं, जो हवा में उड़ते हुए दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं और जमीन व आसमान में मौजूद लड़ाकू विमानों को रियल टाइम जानकारी देते हैं। यही वजह है कि इन्हें फोर्स मल्टीप्लायर कहा जाता है।
बताया जा रहा है कि अवाक्स की कॉस्टिंग पहले ही हो चुकी है। इस प्रोजेक्ट में ब्राजील की भूमिका होगी, जबकि एयर-टू-एयर रिफ्यूलर के लिए अमेरिका और इजरायल से बातचीत चल रही है। (Defence Budget 2026)
राफेल डील पर भी नजर
बजट 2026 के आसपास 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद पर भी बातचीत जारी है यह डील करीब 30 बिलियन यूरो की बताई जा रही है। हालांकि इसके मार्च 2027 तक फाइनल होने की सिर्फ हल्की संभावना जताई जा रही है।
अभी इस डील को डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) से मंजूरी मिलनी बाकी है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करते हैं। उसके बाद कीमत पर बातचीत और स्वदेशी कंटेंट को लेकर लंबी प्रक्रिया होगी।
फिर भी, बजट 2026 में इस डील के लिए कुछ प्रोविजन या संकेत देखने को मिल सकते हैं।
स्वदेशी इंजन प्रोजेक्ट को मिलेगा फंड
रक्षा बजट 2026 में एक और अहम एलिमेंट एयरक्राफ्ट इंजन डेवलपमेंट होगा। इसे सफरान और डीआरडीओ के सहयोग से तैयार किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट करीब 3 बिलियन यूरो का हो सकता है।
इसका मकसद भारत में आधुनिक फाइटर जेट इंजन डेवलप करना है, ताकि देश को भविष्य में विदेशी इंजनों पर निर्भर न रहना पड़े। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से जुड़ा नोट कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के लिए तैयार किया जा रहा है।
अगर बजट में इसके लिए फंडिंग का साफ संकेत मिलता है, तो इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा। (Defence Budget 2026)
पिछले पांच सालों का रहा है ट्रेंड
पिछले पांच सालों में भारत के रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2021 में भारत का रक्षा खर्च करीब 4.85 लाख करोड़ रुपये था। इसके बाद हर साल इसमें इजाफा होता गया और वित्त वर्ष 2025 (संशोधित अनुमान) में यह बढ़कर लगभग 6.41 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, वित्त वर्ष 2026 के बजट अनुमान में रक्षा खर्च को 6.81 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। (Defence Budget 2026)
5 साल में 2 लाख करोड़ रुपये बढ़ा बजट
इन आंकड़ों से यह साफ है कि बीते पांच वर्षों में रक्षा बजट करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ चुका है। खासतौर पर हाल के सालों में इसमें तेजी आई है, जिसकी वजह सीमाओं पर तनाव, बदलते वैश्विक हालात और युद्ध के नए स्वरूप हैं। सरकार अब यह मानकर चल रही है कि भविष्य की चुनौतियों के लिए पहले से मजबूत तैयारी जरूरी है।
इस बढ़ते बजट के साथ सरकार का जोर सिर्फ खर्च बढ़ाने पर नहीं, बल्कि सेना के मॉर्डनाइजेशन पर भी है। बजट 2025-26 को लेकर पीआईबी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, कुल रक्षा बजट का करीब 26 फीसदी यानी लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये कैपिटल खर्च के लिए रखा गया था। इस राशि का इस्तेमाल हथियारों, सैन्य उपकरणों और नई तकनीक की खरीद पर किया जाना है।
इस कैपिटल बजट में खास बात यह रही कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू खरीद को प्राथमिकता दी गई। इसका मतलब यह है कि सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय कंपनियों से ज्यादा से ज्यादा खरीद की जा रही है। इसमें सरकारी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। (Defence Budget 2026)
मॉडर्नाइजेशन पर बढ़ता फोकस
इन बढ़ते आंकड़ों के पीछे सिर्फ खर्च बढ़ाने की सोच नहीं है। सरकार का साफ फोकस मॉडर्नाइजेशन पर है। पिछले बजट में कैपिटल बजट का बड़ा हिस्सा घरेलू इंडस्ट्री से खरीद के लिए रिजर्व रखा गया था। इसमें सरकारी कंपनियों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर को भी मौका दिया गया।
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अब कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा हथियार और सिस्टम देश में ही बनें। (Defence Budget 2026)
इंडस्ट्री की मांग: 30 फीसदी कैपिटल बजट
उद्योग संगठन फिक्की ने बजट 2026 से पहले सरकार को सुझाव दिया है कि रक्षा बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर का हिस्सा 30 फीसदी तक बढ़ाया जाए। फिक्की का कहना है कि भविष्य की लड़ाइयां टेक्नोलॉजी आधारित होंगी, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, साइबर और स्पेस कैपेबिलिटी अहम भूमिका निभाएंगी। इसके लिए पारंपरिक हथियारों से आगे सोचने की जरूरत है। (Defence Budget 2026)
रिसर्च, टेक्नोलॉजी और एक्सपोर्ट पर नजर
बजट 2026 से उम्मीद की जा रही है कि इसमें डीआरडीओ के लिए ज्यादा फंड दिया जाएगा। कुछ सुझावों में डीआरडीओ के बजट में 10 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की बात कही गई है। इसके अलावा ड्रोन, यूएवी, साइबर डिफेंस और स्पेस सिस्टम्स के लिए भी अलग से प्रावधान हो सकते हैं।
रक्षा निर्यात भी सरकार की प्राथमिकता में है। आंकड़ों के मुताबिक, 2016-17 से 2023-24 के बीच भारत के रक्षा निर्यात में 46 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक इसे 50 हजार करोड़ रुपये तक ले जाने का है। (Defence Budget 2026)


