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भारत में हर साल बनेंगे 100 मिलिट्री हेलीकॉप्टर, अदाणी-लियोनार्डो समझौते से बदलेगी सेनाओं की तस्वीर

अब तक भारत को अपनी सैन्य जरूरतों के लिए बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टर विदेशों से आयात करने पड़ते थे। इससे न सिर्फ लागत बढ़ती थी, बल्कि स्पेयर पार्ट्स, रिपेयर और अपग्रेड के लिए भी विदेशों पर निर्भरता बनी रहती थी...

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📍नई दिल्ली | 3 Feb, 2026, 7:52 PM

Adani Leonardo helicopter manufacturing India: वह जिन दूर नहीं जब भारतीय सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल 100 मिलिट्री हेलीकॉप्टर्स बनाए जाएंगे। इसी कड़ी में देश की प्राइवेट सेक्टर की टॉप कंपनी अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इटली की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी लिओनार्डो के बीच 3 फरवरी, मंगलवार को एक अहम समझौते (एमओयू) पर दस्तखत किए। इस समझौते का मकसद भारत में एक ऐसा मजबूत और पूरी तरह इंटीग्रेटेड हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है, जो आने वाले सालों में भारतीय सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ देश को ग्लोबल लेवल पर एक भरोसेमंद डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बना सके।

Adani Leonardo helicopter manufacturing India: सिर्फ हेलीकॉप्टर नहीं, पूरी सोच बदलने वाला समझौता

अदाणी डिफेंस का कहना है कि यह समझौता सिर्फ हेलीकॉप्टर खरीद या असेंबली तक सीमित नहीं है। इसका दायरा कहीं ज्यादा बड़ा है। इस साझेदारी के तहत भारत में हेलीकॉप्टर का डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ, पायलट ट्रेनिंग और सप्लाई चेन डेवलपमेंट तक का पूरा इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

अब तक भारत को अपनी सैन्य जरूरतों के लिए बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टर विदेशों से आयात करने पड़ते थे। इससे न सिर्फ लागत बढ़ती थी, बल्कि स्पेयर पार्ट्स, रिपेयर और अपग्रेड के लिए भी विदेशों पर निर्भरता बनी रहती थी। अदाणी और लियोनार्डो की यह साझेदारी इसी निर्भरता को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

किन हेलीकॉप्टरों पर होगा फोकस

इस एमओयू के तहत शुरुआत में दो मॉडर्न मिलिट्री हेलीकॉप्टरों पर खास फोकस किया जाएगा। इनमें पहला है AW169M। यह एक लाइट ट्विन-इंजन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर है, जिसे खासतौर पर सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह ट्रूप ट्रांसपोर्ट, मेडिकल इवैक्यूएशन, सर्च एंड रेस्क्यू, सर्विलांस और सीमित अटैक रोल में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह हेलीकॉप्टर हाई-एल्टिट्यूड एरिया में भी बेहतर परफॉर्मेंस देने के लिए जाना जाता है, जो भारतीय सेना के लिए बेहद अहम है। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

दूसरा हेलीकॉप्टर है AW109 ट्रेकर-एम। यह स्किड-लैंडिंग गियर वाला हेलीकॉप्टर है, जो पहाड़ी, जंगल और दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। इसका इस्तेमाल पेट्रोलिंग, रेकॉनिसेंस, लाइट यूटिलिटी और वीआईपी मूवमेंट जैसे कामों में किया जा सकता है। इसकी स्पीड और मैन्यूवरेबिलिटी इसे खास बनाती है।

लिओनार्डो हेलीकॉप्टर्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सेसारे कैसिया ने बताया कि इस एमओयू का मकसद भारतीय सशस्त्र बलों की तत्कालिक जरूरतों को पूरा करना है, जिसमें नए नेवल यूटिलिटी और टोही और निगरानी हेलीकॉप्टर फ्लीट शामिल हैं, और भारत के सर्कुलर अलायंस पॉलिसी फ्रेमवर्क और लॉन्ग-टर्म विजन में योगदान देना है। उन्होंने बताया कि उनका फ्लीट 130 से ज्यादा देशों में उड़ता है, और उनके पास सबसे आधुनिक प्रोडक्ट रेंज में से एक है जो मिलिट्री और सिविल दोनों तरह के इस्तेमाल के लिए सभी मुख्य मार्केट सेगमेंट को कवर करती है। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

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उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी के अभी भारत में लगभग 50 हेलीकॉप्टर हैं जो एनर्जी ऑफशोर और पैसेंजर ट्रांसपोर्ट में काम कर रहे हैं। लिओनार्डो के पास हेलीकॉप्टर बनाने का 70 से ज्यादा सालों का अनुभव है और वे ट्रांसमिशन और ब्लेड जैसे जरूरी कंपोनेंट्स से लेकर हेलीकॉप्टर डिजाइन, इंटीग्रेशन और लाइफ साइकिल सपोर्ट तक पूरी वैल्यू चेन को कंट्रोल करते हैं। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

देश की रणनीतिक जरूरतों से जुड़ा हुआ कदम

अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के डायरेक्टर जीत अदाणी ने इस मौके पर कहा, “लियोनार्डो के साथ यह पार्टनरशिप, जैसा कि हमने पिछले हफ्ते एम्ब्रेयर के साथ किया था, यह दिखाता है कि हम भारत में मिलिट्री और सिविल एविएशन इकोसिस्टम का एक अहम हिस्सा बनने के लिए बहुत कमिटेड हैं।” उन्होंने कहा, यह साझेदारी सिर्फ एक कारोबारी करार नहीं है, बल्कि देश की रणनीतिक जरूरतों से जुड़ा हुआ कदम है। उन्होंने कहा कि भारत की सेनाएं बेहद कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करती हैं और उनकी जरूरतों के मुताबिक क्षमताओं का विकास करना उद्योग की जिम्मेदारी है।

उनके मुताबिक, अदाणी ग्रुप डिफेंस को सिर्फ एक सेक्टर के तौर पर नहीं, बल्कि एक समग्र रणनीतिक जरूरत के रूप में देखता है। इस साझेदारी के जरिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेनिंग और सपोर्ट का ऐसा स्ट्रक्चर खड़ा किया जाएगा, जो लंबे समय तक देश की जरूरतों को पूरा कर सके। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

वहीं, लियोनार्डो हेलीकॉप्टर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर जियान पिएरो कुटिलो ने कहा, “हम अदाणी के साथ जुड़कर बेहद खुश हैं। यह साझेदारी भारत के रोटरक्राफ्ट इंडस्ट्री को और मजबूत बनाने की उसकी सोच में योगदान देगी। हमारा लक्ष्य भारत को वही आधुनिक तकनीक और ऑपरेशनल क्षमता उपलब्ध कराना है, जिसकी उसे जरूरत है।”

आत्मनिर्भर भारत को जमीन पर उतारने वाला एमओयू

इस कार्यक्रम में विशेष तौर पर मौजूद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा, अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और लियोनार्डो के बीच हुआ यह एमओयू भारत में रोटरी विंग यानी हेलीकॉप्टर इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी और अहम कदम है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दो प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थाओं के एक साथ आने का प्रतीक है और भारत-ईयू के बीच हाल ही में हुए सुरक्षा और रक्षा रणनीतिक साझेदारी को जमीन पर उतारने वाला प्रयास है।

रक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब पूरी तरह आयात बंद करना नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से आयात पर निर्भरता कम करना और भारत में वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी औद्योगिक क्षमता खड़ी करना है। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर सेगमेंट भारत की रक्षा तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और अब निजी क्षेत्र व अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की भागीदारी से इस क्षेत्र को और मजबूत किया जाएगा।

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उन्होंने यह भी साफ किया कि 100 प्रतिशत आत्मनिर्भरता तुरंत संभव नहीं होती, लेकिन ऐसे कदम निर्भरता को लगातार कम करते हैं। उनके अनुसार, रोटरी विंग यानी हेलीकॉप्टर इकोसिस्टम का भारत में विकास सेनाओं की ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करेगा और देश को लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक फायदा देगा।

उन्होंने कहा कि ऐसी साझेदारियां न सिर्फ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कंपीटिशन को बढ़ावा देंगी, बल्कि रक्षा बजट के बेहतर उपयोग और भारत में एक मजबूत, विविध और आधुनिक रक्षा एयरोस्पेस इंडस्ट्रियल बेस के निर्माण में भी निर्णायक भूमिका निभाएंगी। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

हिमालय से समुद्री तटों तक जोड़ेगी साझेदारी

भारत में इटली के राजदूत एंतोनियो एनरिको बार्तोली ने कहा कि अदाणी डिफेंस और लियोनार्डो की साझेदारी भारत के एयरोस्पेस सफर में एक ऐतिहासिक मोड़ है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हेलीकॉप्टर सेगमेंट में एक बड़ा कदम बताया। राजदूत के अनुसार, यह साझेदारी सिर्फ मशीनें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत जैसे विशाल देश को हिमालय से लेकर समुद्री तटों तक जोड़ने का माध्यम बनेगी।

उन्होंने बताया कि वैश्विक हेलीकॉप्टर बाजार तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में भारत इसमें एक अहम हिस्सेदार बन सकता है। सैन्य आधुनिकीकरण और सिविल एविएशन की बढ़ती जरूरतें इस विकास को रफ्तार देंगी। उन्होंने रक्षा मंत्रालय की नीतियों, बजट में बढ़े पूंजीगत आवंटन और सुधारों की सराहना की, जिनसे उद्योग, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को बढ़ावा मिल रहा है।

राजदूत ने कहा कि लियोनार्डो की विश्वस्तरीय डिजाइन और अदाणी की औद्योगिक क्षमता मिलकर भारत में ऐसा इकोसिस्टम बनाएगी, जहां हेलीकॉप्टर भारत में, भारतीय हाथों से और भारत के भविष्य के लिए तैयार होंगे। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

अगले दशक में 1000 से ज्यादा हेलीकॉप्टरों की जरूरत

अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने इस साझेदारी के व्यावहारिक पहलुओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “भारतीय सशस्त्र बलों ने अगले एक दशक में एक हजार से ज्यादा हेलीकॉप्टरों की जरूरत का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि जल्दी ही भारतीय सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत में ही हर साल 100 हेलीकॉप्टर बनाएं जाएंगे। उन्होंने आगे कहा, यह साझेदारी हमारी उस सोच को साकार करती है, जिसमें भारत में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी डेवलप करना लक्ष्य है।”

उन्होंने बताया कि इस साझेदारी से इंडिजिनाइजेशन तेज होगा, सप्लाई चेन मजबूत होगी और भारत को विश्व-स्तरीय प्रोडक्शन बेस बनाने में मदद मिलेगी। उनके अनुसार, यह सिर्फ वर्तमान जरूरतों का समाधान नहीं है, बल्कि भविष्य की मांगों को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम है। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

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पुरानी पड़ चुकी फ्लीट के लिए नए ऑप्शन

आशीष राजवंशी ने बताया कि भारतीय सेनाओं के पास अभी भी बड़ी संख्या में पुराने चेतक और चीता जैसे हेलीकॉप्टर सेवा में हैं, जो दशकों पहले शामिल किए गए थे। समय के साथ-साथ इनकी मेंटेनेंस कॉस्ट बढ़ गई है और ऑपरेशनल सीमाएं भी सामने आने लगी हैं। ऐसे में AW169M और AW109 ट्रेकर-एम जैसे आधुनिक हेलीकॉप्टर इनकी जगह लेने के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

वहीं, इन नए हेलीकॉप्टरों के आने से सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ेगी। सीमावर्ती इलाकों में तेज मूवमेंट, आपात स्थिति में रेस्क्यू और लॉजिस्टिक सपोर्ट कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

भारत में बनेगा मैन्युफैक्चरिंग और एमआरओ हब

सीईओ आशीष राजवंशी के मुताबिक इस साझेदारी का सबसे अहम पहलू यह है कि हेलीकॉप्टर सिर्फ भारत में असेंबल नहीं होंगे, बल्कि धीरे-धीरे उनका मैन्युफैक्चरिंग कंटेंट भी देश के अंदर बढ़ाया जाएगा। इसे फेज्ड इंडिजिनाइजेशन कहा जा रहा है। शुरुआती चरण में कुछ अहम कंपोनेंट्स विदेश से आ सकते हैं, लेकिन समय के साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा पार्ट्स भारत में ही बनाए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि इसके साथ-साथ भारत में ही एमआरओ फैसिलिटी विकसित की जाएगी। इस एमआरओ में सिविल और मिलिट्री दोनों तरह के एप्लीकेशन में रोटरी प्लेटफॉर्म की सर्विसिंग और मेंटेनेंस का काम कर सकेंगे। जिसका मतलब यह होगा कि हेलीकॉप्टरों की रिपेयर और ओवरहॉल के लिए अब उन्हें विदेश भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी और ऑपरेशनल रेडीनेस भी बेहतर बनी रहेगी। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

पैदा होंगी बंपर नौकरियां

इस हेलीकॉप्टर इकोसिस्टम के बनने से हजारों हाई-स्किल नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, ट्रेनिंग और मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे। इसके अलावा, जब भारत में मैन्युफैक्चरिंग मजबूत होगी, तो भविष्य में इन हेलीकॉप्टरों का निर्यात भी संभव हो सकेगा। इससे विदेशी मुद्रा आएगी और भारत की पहचान एक ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर मजबूत होगी। (Adani Leonardo helicopter manufacturing India)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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